सारांश
यह मार्मिक कहानी एक वृद्धा और जमींदार के बीच की है। जमींदार वृद्धा की झोपड़ी की जमीन हड़प लेता है। वृद्धा अपनी अंतिम इच्छा के रूप में केवल एक टोकरी भर मिट्टी ले जाने की अनुमति माँगती है। जब टोकरी भारी होने पर जमींदार उसे उठाने में असमर्थ रहता है, तो वृद्धा कहती है कि एक टोकरी मिट्टी इतनी भारी है तो पूरी जमीन का बोझ कैसे उठाओगे। यह सुनकर जमींदार लज्जित होकर उसकी जमीन लौटा देता है।
मुख्य बिंदु
- गरीब और शक्तिशाली के बीच संघर्ष।
- वृद्धा की बुद्धिमत्ता और साहस।
- अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रतिरोध।
- मातृभूमि और मिट्टी से लगाव।
महत्वपूर्ण प्रश्न
- वृद्धा ने जमींदार से क्या माँगा और क्यों?
- जमींदार को अपनी गलती का अहसास कैसे हुआ?
- इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
शब्दार्थ
टोकरी - बाँस का पात्र; जमींदार - भूस्वामी; झोपड़ी - कुटिया; लज्जित - शर्मिंदा; प्रतिरोध - विरोध।
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