सारांश
यह कविता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित है। इसमें एक बालक रात को सोने से पहले अपनी माँ से कहानी सुनाने का हठ करता है। माँ बालक को राजकुमार और परियों की कहानी सुनाने का प्रयास करती है, परंतु बच्चा बीच-बीच में प्रश्न पूछता रहता है। कविता में माँ और पुत्र के बीच का स्नेहपूर्ण संवाद बड़े सुंदर ढंग से प्रस्तुत हुआ है। यह बाल मन की जिज्ञासा और माँ के वात्सल्य को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु
- माँ और बालक के बीच मधुर संवाद।
- बाल सुलभ जिज्ञासा का चित्रण।
- माँ के वात्सल्य और ममता का वर्णन।
- कवि मैथिलीशरण गुप्त की सरल भाषा।
महत्वपूर्ण प्रश्न
- बालक माँ से क्या सुनना चाहता है?
- इस कविता के कवि कौन हैं?
- कविता में किस भाव का चित्रण हुआ है?
शब्दार्थ
हठ = जिद, वात्सल्य = ममता, जिज्ञासा = जानने की इच्छा, संवाद = बातचीत।
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