सारांश
यह कविता वर्षा ऋतु की सुंदरता और आनंद का मनोहर चित्रण करती है। वर्षा के आते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है, नदी-नाले भर जाते हैं और मोर नाचने लगते हैं। आकाश में बादल गरजते हैं, बिजली चमकती है और किसानों के चेहरे खिल उठते हैं क्योंकि वर्षा से उनकी फसलें लहलहाती हैं। बच्चे वर्षा में भीगकर खेलते हैं। कवि ने प्रकृति के इस सुंदर रूप को बड़े ही सजीव और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया है, जिससे वर्षा ऋतु की बहार जीवंत हो उठती है।
मुख्य बिंदु
- वर्षा ऋतु की सुंदरता का चित्रण।
- प्रकृति में हरियाली और आनंद।
- किसानों की खुशी का वर्णन।
- सजीव एवं भावपूर्ण भाषा।
महत्वपूर्ण प्रश्न
- वर्षा ऋतु में प्रकृति में क्या परिवर्तन होते हैं?
- वर्षा से किसान क्यों प्रसन्न होते हैं?
- कविता का मुख्य भाव क्या है?
शब्दार्थ
बहार = सौंदर्य, हरियाली = हरा-भरा, लहलहाना = झूमना, सजीव = जीवंत।
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