दो बैलों की कथा

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 1 of 16
दो बैलों की कथा

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

Snapshot
  • लेखक: मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) — हिंदी-उर्दू के “उपन्यास सम्राट”, मूल नाम धनपत राय।
  • पाठ का प्रकार: कहानी (Short Story) — पशु-कथा शैली में लिखी गई प्रतीकात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण रचना।
  • मुख्य पात्र: हीरा और मोती (दो बैल), झूरी काछी (मालिक), गया (झूरी का साला), भूरी लड़की, दढ़ियल (क्रूर व्यापारी)।
  • केंद्रीय विषय: स्वाधीनता की चाह, सच्ची मित्रता, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, पशुओं में भी चेतना।
  • परीक्षा भार: ~5 अंक — सारांश, पात्र-चित्रण, विषय-वस्तु, भाषा-शैली के प्रश्न।
  • पाठ्यपुस्तक: NCERT क्षितिज भाग-1, कक्षा 9, प्रथम अध्याय।
विस्तृत नोट्स

1. लेखक परिचय — मुंशी प्रेमचंद

पूरा नाम: धनपत राय श्रीवास्तव। जन्म: 31 जुलाई 1880, लमही (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)। निधन: 8 अक्टूबर 1936।

प्रेमचंद को “कलम का सिपाही” और “उपन्यास सम्राट” कहा जाता है। उन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में लेखन किया। उनकी रचनाओं में किसान जीवन, गरीबी, शोषण, स्त्री-दशा और सामाजिक असमानता के विषय प्रमुख हैं।

  • प्रमुख उपन्यास: गोदान, गबन, निर्मला, रंगभूमि, सेवासदन, कर्मभूमि।
  • प्रमुख कहानी-संग्रह: मानसरोवर (8 खंड); प्रसिद्ध कहानियाँ — पंच परमेश्वर, ईदगाह, बड़े भाई साहब, पूस की रात, नमक का दरोगा।
  • लेखन-शैली: यथार्थवादी, सरल एवं प्रभावशाली भाषा; हास्य और करुणा का सुंदर समन्वय।
  • विशेषता: पशु-पात्रों के माध्यम से भी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक संदेश का सफल चित्रण।

दो बैलों की कथा उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानियों में से एक है, जिसमें उन्होंने बैलों के जीवन के बहाने स्वाधीनता-संघर्ष की भावना को जीवंत किया है। यह कहानी तब लिखी गई जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, इसलिए इसमें परतंत्रता से मुक्ति की गहरी छटपटाहट है।

2. कहानी का विस्तृत सारांश

प्रारंभ — हीरा-मोती का परिचय और मित्रता: कहानी का आरंभ इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी से होता है कि जानवरों में गधा सबसे अधिक ‘बुद्धिमान’ है, क्योंकि वह सब कुछ सहकर भी चुप रहता है। उसका छोटा भाई बैल कभी-कभी असंतोष प्रकट कर लेता है। झूरी काछी के पास हीरा और मोती नाम के दो सुंदर एवं हृष्ट-पुष्ट बैल थे। दोनों एक ही जैसे थे और साथ-साथ रहते, खाते और काम करते थे। दोनों में मूक समझ थी — एक के मन की बात दूसरा आँखों से ही समझ लेता था। एक-दूसरे को चाटना-सूँघना उनकी मित्रता की भाषा थी। यह मित्रता ही आगे उनकी सबसे बड़ी शक्ति बनती है।

गया के घर पहली बार — अपमान और बगावत: झूरी ने दोनों बैलों को अपने साले गया के घर कुछ दिनों के काम के लिए भेजा। बैलों को लगा कि उन्हें बेच दिया गया है, इसलिए वे बेहद दुखी हो गए। गया ने उन्हें सूखा भूसा डाला, ठीक से खाना-पानी नहीं दिया और मारपीट भी की। रात होते ही दोनों ने रस्सी (पगहा) तुड़वाकर भागने की ठान ली और सुबह होते-होते सीधे झूरी के घर पहुँच गए। झूरी खुश हो गया पर उसकी पत्नी को संदेह था।

दूसरी बार गया के घर — कठोरता और लड़की का स्नेह: झूरी ने उन्हें फिर गया के पास भेजा। इस बार गया और भी कठोर हो गया — मोटी रस्सी से बाँधा, भूखा रखा, डंडे मारे। इसी दौरान गया की छोटी बेटी (जिसकी माँ मर चुकी थी) दोनों बैलों पर दया करती और रात को चुपके से उन्हें रोटियाँ खिलाती। उस बच्ची के निःस्वार्थ प्रेम ने बैलों के कठोर मन को कोमल बना दिया। बाद में उसी लड़की ने उनकी रस्सी खोलकर भागने में मदद की।

साँड़ से मुकाबला — एकता की शक्ति: भागते समय रास्ते में एक खूँखार साँड़ ने उन पर हमला कर दिया। पहले दोनों डरे, फिर हीरा और मोती ने मिलकर रणनीति बनाई — दोनों ओर से सींग लगाकर उन्होंने साँड़ को परास्त कर दिया और भगा दिया। यह प्रसंग दिखाता है कि एकता में ही अजेय शक्ति होती है।

काँजीहौस में कैद: भागते-भागते दोनों बैल एक मटर के खेत में घुस गए और फसल चर ली। खेत के मालिक ने उन्हें पकड़कर काँजीहौस (आवारा पशुओं को बंद रखने की सरकारी जगह) में डाल दिया। वहाँ अनेक दुर्बल, भूखे-प्यासे पशु पहले से बंद थे — गधे, घोड़े, भैंसें, बकरियाँ। खाने-पीने की घोर कमी थी।

दीवार तोड़ना और साथी पशुओं की मुक्ति: मोती ने काँजीहौस की कच्ची दीवार को सींगों से खोदना शुरू किया। रात भर मेहनत के बाद दीवार इतनी कमजोर हो गई कि अन्य सभी पशु उसमें से निकल गए। पर मोती का पैर कीचड़ में फँस गया और वह नहीं निकल सका। चौकीदार को जब पता चला तो उसने मोती को और कसकर बाँध दिया तथा हीरा-मोती दोनों को पीटा। इस प्रसंग में हीरा ने मोती को अकेला नहीं छोड़ा — मित्रता की पराकाष्ठा।

नीलामी और दढ़ियल का खरीदना: काँजीहौस में दोनों बैल भूख-प्यास से दुर्बल हो गए। अंततः उनकी नीलामी हुई। एक दढ़ियल (दाढ़ी वाला) क्रूर व्यापारी ने उन्हें खरीद लिया जो दिखने में कसाई जैसा लग रहा था। उसने उन्हें भूखे-प्यासे रखा और डंडे मारे।

अंतिम विद्रोह और घर वापसी: दढ़ियल के यहाँ दोनों बैल किसी तरह रस्सी तोड़कर भागे और सौभाग्य से सीधे झूरी के घर पहुँच गए। झूरी ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया। दढ़ियल भी पीछे आ गया और बैलों को वापस ले जाने लगा, पर दोनों बैलों ने उस पर सींगों से ऐसा जोरदार प्रहार किया कि वह जान बचाकर भाग खड़ा हुआ। अंत में झूरी की पत्नी ने भी प्रेम से उनके माथे चूमे और रोटियाँ खिलाईं। हीरा-मोती अपने घर में सुख से रहने लगे — स्वतंत्रता की विजय।

3. पात्र-चित्रण

हीरा: दोनों बैलों में बुद्धिमान और धैर्यशील पात्र। वह शांत स्वभाव का है, सोच-समझकर काम करता है। मोती को बेकार जोखिम लेने से रोकता है। उचित समय पर सही कदम उठाने की सलाह देता है। मित्रता में पराकाष्ठा — मोती को अकेला छोड़कर भागने से इनकार करता है, भले ही खुद मुक्त हो सकता था।

मोती: दोनों में साहसी, उत्साही और जोशीला पात्र। वह जल्दी निर्णय लेता है और जोखिम उठाने से नहीं डरता। काँजीहौस में दीवार खोदकर अन्य पशुओं को मुक्त करने की कोशिश उसी के निर्भीक स्वभाव का परिचायक है। अन्याय को बर्दाश्त नहीं करता।

झूरी काछी: एक सीधा-सादा, संवेदनशील किसान। वह अपने बैलों से बहुत प्रेम करता है। उन्हें गया के घर भेजना उसकी मजबूरी थी। अंत में दोनों को देखकर उसकी आँखें भर आती हैं — यह उसके प्रेम की सच्चाई है।

गया: झूरी का साला। स्वार्थी और क्रूर स्वभाव का व्यक्ति। बैलों से काम लेना चाहता है पर उन्हें उचित खाना-पानी नहीं देता, मारता-पीटता है। वह शोषण का प्रतीक है।

भूरी लड़की (गया की बेटी): कहानी की सबसे करुणामयी पात्र। उसकी माँ मर चुकी है, घर में उपेक्षा मिलती है। वह बैलों के दुख में अपना दुख देखती है और रात को चुपके से उन्हें रोटियाँ खिलाती है। यह निःस्वार्थ करुणा का जीता-जागता उदाहरण है। उसी ने रस्सी खोलकर उन्हें भागने में सहायता की।

दढ़ियल: क्रूरता और शोषण का प्रतीक। वह कसाई जैसा दिखने वाला व्यापारी है जो बैलों को भूखा-प्यासा रखकर अपना स्वार्थ साधता है। उसकी पराजय अंत में न्याय की विजय दर्शाती है।

4. मुख्य विषय और संदेश

(क) स्वाधीनता की भावना: कहानी का केंद्रीय संदेश स्वतंत्रता की अदम्य चाह है। हीरा-मोती बार-बार बंधन तोड़कर भागते हैं। यह सिर्फ पशुओं की कहानी नहीं — यह उस दौर के भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम का रूपक है। बंधन = परतंत्रता, भागना = विद्रोह, घर लौटना = स्वतंत्रता। लेखक संदेश देता है कि स्वतंत्रता हर प्राणी का जन्मसिद्ध अधिकार है।

(ख) सच्ची मित्रता: हीरा और मोती की मित्रता आदर्श मित्रता का उदाहरण है। विपत्ति में एक-दूसरे को नहीं छोड़ना, मिलकर संघर्ष करना — यही सच्ची मित्रता है। ‘मूक भाषा’ में भी गहरी समझ।

(ग) अन्याय के विरुद्ध संघर्ष: दोनों बैल चुपचाप अन्याय नहीं सहते। गया के घर से भागना, काँजीहौस में दीवार खोदना, दंगल/दढ़ियल पर सींग से प्रहार करना — ये सब प्रतिरोध के रूप हैं।

(घ) पशुओं में भी भावना: प्रेमचंद यह दिखाते हैं कि पशुओं में भी प्रेम, वफादारी, दुःख, आनंद जैसी भावनाएँ होती हैं। हीरा-मोती का झूरी के प्रति लगाव और भूरी बच्ची के प्रति कृतज्ञता इसका प्रमाण है।

(ङ) करुणा और प्रेम की शक्ति: गया की लड़की का प्रसंग बताता है कि मार और कठोरता से अधिक शक्तिशाली होता है निःस्वार्थ प्रेम। भूरी लड़की ने प्रेम से जो किया, वह गया की कठोरता से संभव नहीं था।

(च) प्रतीकात्मक अर्थ: हीरा-मोती = भारतीय जनता / किसान; गया = उपनिवेशी शोषक; काँजीहौस = बंदीगृह / दमनकारी व्यवस्था; झूरी = स्वदेश / मुक्ति का लक्ष्य।

5. भाषा और शैली

  • सरल, बोलचाल की हिंदी: प्रेमचंद की भाषा आम पाठक तक सीधे पहुँचती है। उर्दू, अवधी और ग्रामीण शब्द भी स्वाभाविक रूप से आते हैं जैसे — पगहा, नाँद, काँजीहौस, दढ़ियल।
  • व्यंग्य और हास्य: गधे की ‘बुद्धिमानी’ वाला प्रारंभिक अंश हल्के व्यंग्य से भरा है। जो चुपचाप सब सह लेता है, उसे ही ‘बुद्धिमान’ कहना समाज पर कटाक्ष है।
  • मानवीकरण (Personification): पशु-पात्रों को मानवीय भावनाओं और सोच से युक्त दिखाया गया है — यह प्रेमचंद की विशेषता है और इसी से पाठक बैलों से जुड़ जाता है।
  • चित्रात्मक वर्णन: काँजीहौस का दृश्य, साँड़ से मुठभेड़, भूरी बच्ची का रात को रोटी खिलाना — इन प्रसंगों में दृश्य-चित्रण बहुत सजीव है।
  • मुहावरों का प्रयोग: कहानी में ‘नाँद में मुँह डालना’, ‘पगहा तुड़वाना’ जैसे लोक-व्यवहार के शब्द ग्रामीण जीवन को जीवंत करते हैं।
  • प्रतीकात्मकता: पूरी कहानी प्रतीकों पर टिकी है जो इसे एक साधारण पशु-कथा से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय स्तर का संदेश देती है।

6. महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और उनके अर्थ

1. “जानवरों में गधा सबसे ज़्यादा बुद्धिमान समझा जाता है।”
अर्थ एवं विशेषता: यह व्यंग्योक्ति है। गधे की असीम सहनशीलता को ‘बुद्धिमानी’ कहना दरअसल उन लोगों पर तीखा कटाक्ष है जो अन्याय को भी चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं और विद्रोह नहीं करते।

2. “दोनों आपस में एक-दूसरे को सूँघकर अपना दुख-सुख कह लेते थे।”
अर्थ: हीरा और मोती की मूक मित्रता का सुंदर चित्रण। बिना भाषा के भी सच्चे मित्र एक-दूसरे की भावनाएँ समझ लेते हैं। यह इंसानी रिश्तों पर भी लागू होता है।

3. “मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगा।” (हीरा का मोती से)
अर्थ: काँजीहौस में मोती के फँस जाने पर हीरा स्वयं निकल सकता था, पर उसने मित्र को नहीं छोड़ा। यह आदर्श मित्रता की पराकाष्ठा है — सुख में नहीं, संकट में साथ देना।

4. “अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।”
अर्थ: प्रेमचंद कहते हैं कि बिना भाषा के एक-दूसरे को समझने की शक्ति पशुओं में है, जो मनुष्य में अक्सर नहीं होती। मनुष्य भाषा तो जानता है पर प्रायः पास के व्यक्ति का दर्द नहीं समझता। यह मनुष्य पर एक सूक्ष्म व्यंग्य है।

5. “झूरी की आवाज़ सुनते ही दोनों के हृदय में एक उछाल आया।”
अर्थ: अपने ‘घर’ और ‘अपनों’ की आवाज़ ही सच्चा सुकून देती है। यह मातृभूमि और स्वदेश के प्रति गहरे प्रेम का प्रतीक भी है।

7. कठिन शब्द और उनके अर्थ

शब्द अर्थ
काँजीहौसआवारा या अवांछित पशुओं को बंद रखने का सरकारी बाड़ा
नाँदपशुओं को दाना-पानी खिलाने का लकड़ी या पत्थर का बर्तन (Trough)
थूथनीपशुओं का मुँह या नाक का अगला हिस्सा (Snout)
पगहापशुओं को बाँधने की रस्सी
साँड़बिना बधिया किया हुआ नर पशु (Bull)
दढ़ियलघनी दाढ़ी वाला व्यक्ति; यहाँ क्रूर व्यापारी के लिए प्रयुक्त
काछीसाग-सब्जी उगाने वाली एक जाति / किसान वर्ग
रगेदनादौड़ाते हुए पीटना / खदेड़ना
पराकाष्ठाचरमसीमा / उच्चतम बिंदु
विषादगहरा दुःख / मानसिक पीड़ा
स्नेहप्रेम / वात्सल्य
ललकारनाचुनौती देना / सामना करना
मूकमौन / बिना शब्दों के
हृष्ट-पुष्टस्वस्थ और मोटा-ताज़ा / तंदुरुस्त
नमकहरामएहसान फरामोश / विश्वासघाती
वफ़ादारीनिष्ठा / ईमानदारी से साथ देना
अड़ियलज़िद्दी / जो किसी की न माने
मुँहज़ोरमुँह से ज़ोर लगाकर खाने वाला / ज़बरदस्त

8. NCERT प्रश्न — पाठ के साथ (उत्तर सहित)

प्रश्न 1. काँजीहौस में कैद पशुओं की हाजिरी क्यों ली जाती थी?

उत्तर: काँजीहौस में बंद पशुओं की हाजिरी इसलिए ली जाती थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पशु भागा तो नहीं है। यह एक प्रकार का रोल-कॉल था जो चौकीदार प्रतिदिन करता था। पशुओं पर नियंत्रण बनाए रखना और उन्हें मालिकों को वापस करने या नीलामी में बेचने के लिए सुरक्षित रखना इसका उद्देश्य था।

प्रश्न 2. छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?

उत्तर: गया की छोटी बेटी की माँ मर चुकी थी। घर में उसे भी उपेक्षा और दुर्व्यवहार मिलता था। जब उसने देखा कि बैलों को भी भूखा रखा जा रहा है और उन पर अत्याचार हो रहा है, तो उसे उनमें अपनी दशा दिखी — दोनों ही बेसहारा और दुखी थे। इसी सहानुभूति और समानुभूति के कारण उसका प्रेम इन बैलों के प्रति उमड़ आया और वह रात को चुपके से उन्हें रोटियाँ खिलाने लगी।

प्रश्न 3. कहानी में बैलों के माध्यम से कौन-सी सामाजिक समस्या उठाई गई है?

उत्तर: इस कहानी में बैलों के माध्यम से स्वाधीनता की चाह और परतंत्रता के विरुद्ध संघर्ष की समस्या उठाई गई है। परोक्ष रूप से यह भारत के स्वतंत्रता-संग्राम का रूपक है। साथ ही, शोषण, दुर्व्यवहार, और निर्बल प्राणियों के अधिकारों की अनदेखी भी इस कहानी के महत्वपूर्ण विषय हैं।

प्रश्न 4. आशय स्पष्ट कीजिए — “अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।”

उत्तर: इस पंक्ति में प्रेमचंद कहते हैं कि हीरा और मोती बिना शब्दों के एक-दूसरे की बात समझ लेते थे — उनके बीच एक मूक आत्मिक संवाद था। मनुष्य भाषा तो जानता है, पर अक्सर पास के व्यक्ति का दर्द नहीं समझ पाता। इस प्रकार लेखक कहते हैं कि पशुओं में जो प्रेम और संवेदना है, वह कभी-कभी मनुष्य की भाषाई क्षमता से भी अधिक गहरी और सच्ची होती है।

प्रश्न 5. “गधे का सबसे बड़ा गुण उसकी सहनशीलता है” — इससे लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर: लेखक यहाँ व्यंग्य कर रहे हैं। गधे की सहनशीलता को ‘गुण’ बताकर वे दरअसल उन मनुष्यों पर कटाक्ष करते हैं जो अन्याय और शोषण को चुपचाप सह लेते हैं और उसके विरुद्ध कभी आवाज़ नहीं उठाते। सच्ची सहनशीलता और भय से उत्पन्न मौन — इन दोनों में अंतर होता है।

9. NCERT पाठ से आगे — अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न — इस कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?

उत्तर: हीरा और मोती भारत की सामान्य जनता/किसान के प्रतीक हैं जो परिश्रमी और सहनशील हैं किंतु अन्याय सहने को तैयार नहीं। गया और काँजीहौस उपनिवेशी दमनकारी व्यवस्था के प्रतीक हैं। बार-बार बंधन तोड़कर भागना स्वतंत्रता-संग्राम की निरंतर लड़ाई का प्रतीक है। काँजीहौस की दीवार तोड़कर दूसरों को मुक्त करना सामूहिक मुक्ति और क्रांति का संदेश देता है।

प्रश्न — काँजीहौस किसका प्रतीक है?

उत्तर: काँजीहौस उस व्यवस्था का प्रतीक है जो निर्बल और असहाय को बंधक बनाए रखती है। यह ब्रिटिश शासन के कारागार या किसी भी ऐसी संस्था का प्रतीक है जो स्वतंत्रता का दमन करती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. “दो बैलों की कथा” के लेखक कौन हैं?
  1. जयशंकर प्रसाद
  2. मुंशी प्रेमचंद
  3. हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
  4. रामचंद्र शुक्ल
उत्तर: (B) मुंशी प्रेमचंद — यह उनकी प्रसिद्ध प्रतीकात्मक कहानी है।
2. हीरा और मोती किसके बैल थे?
  1. गया के
  2. झूरी काछी के
  3. काँजीहौस चौकीदार के
  4. दढ़ियल के
उत्तर: (B) झूरी काछी के — वही उनके असली एवं प्रिय मालिक थे।
3. गया झूरी का कौन था?
  1. भाई
  2. चाचा
  3. साला
  4. दोस्त
उत्तर: (C) साला — गया झूरी की पत्नी का भाई था।
4. काँजीहौस क्या होता है?
  1. पशुओं के इलाज का स्थान
  2. आवारा पशुओं को बंद रखने का सरकारी बाड़ा
  3. पशु बाज़ार
  4. किसानों का अनाज भंडार
उत्तर: (B) आवारा या अवांछित पशुओं को बंद रखने की सरकारी जगह।
5. मोती ने काँजीहौस में क्या किया?
  1. भूख हड़ताल की
  2. दीवार खोदकर पशुओं को मुक्त करने की कोशिश की
  3. चौकीदार को मार भगाया
  4. हीरा से झगड़ा किया
उत्तर: (B) मोती ने दीवार खोदकर अन्य पशुओं को बाहर निकालने का प्रयास किया।
6. गया की छोटी बेटी ने बैलों के लिए क्या किया?
  1. उन्हें मारा
  2. रात को चुपके से रोटियाँ खिलाईं और रस्सी खोली
  3. उन्हें काँजीहौस भेजा
  4. झूरी को खबर दी
उत्तर: (B) उसने प्रेम से रोटियाँ खिलाईं और रस्सी खोलकर उन्हें भागने में मदद की।
7. प्रेमचंद ने किस जानवर को सबसे ‘बुद्धिमान’ कहा है और यह कैसा कथन है?
  1. घोड़ा — प्रशंसा
  2. हाथी — वास्तविकता
  3. गधा — व्यंग्य
  4. कुत्ता — सत्य
उत्तर: (C) गधा — यह व्यंग्योक्ति है; गधे की अत्यधिक सहनशीलता को ‘बुद्धिमानी’ कहकर अन्याय सहने वालों पर कटाक्ष है।
8. दोनों बैलों ने खूँखार साँड़ को कैसे हराया?
  1. झूरी की मदद से
  2. मिलकर दोनों ओर से सींग मारकर
  3. चिल्लाकर भगाया
  4. भाग गए
उत्तर: (B) दोनों ने एकता दिखाई — दोनों ओर से सींग लगाकर साँड़ को परास्त किया।
9. दढ़ियल कौन था?
  1. झूरी का भाई
  2. काँजीहौस का मालिक
  3. एक क्रूर व्यापारी जिसने नीलामी में बैलों को खरीदा
  4. गया का मित्र
उत्तर: (C) दढ़ियल एक क्रूर व्यापारी था जिसे कसाई समझा गया — उसने काँजीहौस में नीलामी पर बैल खरीदे।
10. “दो बैलों की कथा” का केंद्रीय संदेश क्या है?
  1. पशुओं को पालना लाभदायक है
  2. किसानों का जीवन कठिन है
  3. स्वाधीनता की भावना सर्वोपरि है और अन्याय से संघर्ष करना चाहिए
  4. एकला चलो की नीति अपनानी चाहिए
उत्तर: (C) स्वाधीनता की अदम्य चाह, मित्रता में एकता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष — यही कहानी का मूल संदेश है।
परीक्षा के संभावित प्रश्न
1. “दो बैलों की कथा” में प्रेमचंद ने स्वाधीनता की भावना को किस प्रकार व्यक्त किया है? (5 अंक)
संकेत-उत्तर: (i) बार-बार बंधन तोड़ना = परतंत्रता का विरोध; (ii) काँजीहौस = बंदीगृह / औपनिवेशिक व्यवस्था का प्रतीक; (iii) दीवार तोड़कर पशुओं को मुक्त कराना = सामूहिक क्रांति; (iv) दढ़ियल को भगाना = अंतिम विद्रोह; (v) झूरी के घर वापसी = स्वतंत्रता की प्राप्ति। हीरा-मोती = भारतीय जनता का प्रतीक। लेखन में इन पाँचों बिंदुओं को विस्तार से लिखें।
2. हीरा और मोती की मित्रता को आप आदर्श मित्रता क्यों मानते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)
संकेत-उत्तर: (i) बिना भाषा के एक-दूसरे को समझना (मूक संवाद); (ii) साथ काम करना, साथ खाना-सोना; (iii) साँड़ से मिलकर मुकाबला; (iv) काँजीहौस में मोती के फँसने पर हीरा का न जाना; (v) दढ़ियल पर मिलकर हमला। प्रत्येक बिंदु पर एक-दो वाक्य लिखें।
3. भूरी लड़की का चरित्र-चित्रण कीजिए। (3 अंक)
संकेत-उत्तर: करुणामयी, बेसहारा (माँ मर चुकी), दूसरों के दर्द को महसूस करने वाली, निःस्वार्थ प्रेम की प्रतीक। वह बैलों में अपनी दशा देखती है — दोनों ही उपेक्षित और भूखे हैं। उसने रोटियाँ खिलाकर और रस्सी खोलकर बैलों की रक्षा की।
4. “गधे का सबसे बड़ा गुण उसकी सहनशीलता है” — इस कथन का व्यंग्यार्थ समझाइए। (3 अंक)
संकेत-उत्तर: यह व्यंग्य है। सहनशीलता को ‘गुण’ कहना दरअसल उन लोगों पर कटाक्ष है जो अन्याय सहकर भी आवाज़ नहीं उठाते। प्रेमचंद का संदेश है कि असीम सहनशीलता कायरता का रूप हो सकती है। अन्याय का विरोध करना — जैसे हीरा-मोती करते हैं — वास्तविक साहस है।
5. प्रेमचंद की भाषा-शैली की विशेषताएँ “दो बैलों की कथा” के आधार पर लिखिए। (3 अंक)
संकेत-उत्तर: (i) सरल, बोलचाल की भाषा — पगहा, नाँद, काँजीहौस जैसे देशज शब्द; (ii) व्यंग्य और हास्य — गधे की ‘बुद्धिमानी’; (iii) मानवीकरण — पशुओं को भावनायुक्त दिखाया; (iv) चित्रात्मक वर्णन — काँजीहौस, साँड़-मुठभेड़; (v) प्रतीकात्मकता — हर पात्र और घटना में गहरा अर्थ।
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