साँवले सपनों की याद

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 4 of 16
साँवले सपनों की याद

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नज़र में
  • यह पाठ एक संस्मरण / ललित निबंध है जिसे जाबिर हुसैन ने प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी सालिम अली की स्मृति में लिखा है।
  • सालिम अली को 'बर्डमैन ऑफ इंडिया' कहा जाता है — उन्होंने अपना पूरा जीवन पक्षियों की खोज और संरक्षण में लगाया।
  • लेखक उनकी केरल यात्रा के अंतिम दिनों, उनके असाधारण जीवट और प्रकृति-प्रेम का मार्मिक चित्रण करता है।
  • पाठ का केंद्रीय भाव: प्रकृति से गहरा लगाव, वैज्ञानिक जिज्ञासा, और मृत्यु के बाद भी अमर रहने वाली यादें।
  • परीक्षा में महत्त्व: ~5 अंक — सारांश, चरित्र-चित्रण, भाव-प्रश्न और MCQ अक्सर पूछे जाते हैं।
विस्तृत नोट्स

1. लेखक परिचय — जाबिर हुसैन

जाबिर हुसैन का जन्म 5 मार्च 1945 को बिहार के नालंदा जिले के नौनहीं गाँव में हुआ। वे हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं के सिद्धहस्त लेखक हैं। बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके जाबिर हुसैन साहित्य और राजनीति दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं — 'एक नदी रेत भरी' (डायरी), 'डोला बीबी का मज़ार', 'नौरंगिया' (उपन्यास), 'जंगल जहाँ शुरू होता है' (कविता-संग्रह) और 'बाकी सब खैरियत है'। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाज़ा गया है।

जाबिर हुसैन की लेखनी में संवेदना, काव्यात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टि का अनूठा संगम मिलता है। वे ललित गद्य लिखने में माहिर हैं — उनका गद्य कविता जैसा लयबद्ध और भावपूर्ण होता है। 'साँवले सपनों की याद' उनका एक ऐसा ही मार्मिक संस्मरण है जो पाठक के हृदय को छू जाता है।

2. सालिम अली — भारत के बर्डमैन

सालिम मोईजुद्दीन अब्दुल अली का जन्म 12 नवंबर 1896 को मुंबई में हुआ और उनका निधन 20 जुलाई 1987 को हुआ। वे भारत के सबसे प्रसिद्ध पक्षी-विज्ञानी (Ornithologist) थे। उन्हें 'बर्डमैन ऑफ इंडिया' की उपाधि दी गई।

सालिम अली ने बचपन में एक नीले कंठ वाली गौरैया को देखा जिसे उनके चाचा ने पहचान नहीं पाया। इसी जिज्ञासा ने उन्हें पक्षी-विज्ञान की दुनिया में खींचा। वे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) से जुड़े और पूरे भारत में पक्षियों का सर्वेक्षण किया।

उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — 'द बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स', 'हैंडबुक ऑफ द बर्ड्स ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान' (10 खंड, डॉ. रिप्ले के साथ)। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण (1958) और पद्म विभूषण (1976) से सम्मानित किया।

सालिम अली की विशेषता यह थी कि वे 90 वर्ष की आयु में भी पक्षी-सर्वेक्षण के लिए जंगलों में जाते थे। उनका जीवन एक प्रेरणा है — वैज्ञानिक जिज्ञासा, अदम्य उत्साह और प्रकृति-प्रेम का जीता-जागता उदाहरण।

लेखक ने उनकी तुलना सुप्रसिद्ध संगीतकार मोज़ार्ट से की है — जिस प्रकार मोज़ार्ट मृत्यु-शय्या पर भी संगीत रचते रहे, उसी प्रकार सालिम अली अंतिम साँस तक पक्षियों की दुनिया से जुड़े रहे।

3. पाठ का विस्तृत सारांश

प्रारंभिक भाग — मृत्यु की खबर और याद

पाठ की शुरुआत में लेखक बताते हैं कि सालिम अली के जाने की खबर आई। लेखक को अचानक उनकी याद आती है — वे साँवले सपनों की याद में डूब जाते हैं। 'साँवले सपने' — यह प्रतीक है उन अधूरी इच्छाओं और स्मृतियों का जो सालिम अली की मृत्यु के बाद भी जीवित हैं।

लेखक याद करते हैं कि कैसे सालिम अली एक बार केरल की यात्रा पर जाने से पहले लेखक से मिले थे। उनकी आँखों में एक अजीब चमक थी, चेहरे पर असीम उत्साह था — मानो वे किसी अनजान दुनिया की तलाश में निकल रहे हों।

केरल यात्रा का वर्णन

सालिम अली केरल की साइलेंट वैली (मूक-वादी) की यात्रा पर जाने वाले थे। यह उनकी अंतिम यात्राओं में से एक थी। उनके शरीर में बीमारी थी, शरीर थका हुआ था — परंतु उनका मन और उत्साह अटूट था। वे अपनी दूरबीन लेकर पक्षियों की खोज में निकलने को तत्पर थे।

लेखक ने यहाँ एक महत्त्वपूर्ण बात लिखी है — सालिम अली की आँखें दूरबीन की तरह थीं — वे जहाँ भी जाते, हर पक्षी को, हर पत्ते की हलचल को, प्रकृति की हर आवाज़ को पहचान लेते थे। उनकी दृष्टि केवल वैज्ञानिक नहीं थी — वह एक कवि की दृष्टि भी थी।

बचपन की घटना — नीले कंठ की गौरैया

लेखक सालिम अली के बचपन की उस प्रसिद्ध घटना का उल्लेख करते हैं जब एक नीले कंठ वाली गौरैया उनकी एयरगन से घायल होकर गिरी थी। उस छोटे से पक्षी को देखकर सालिम अली के मन में जिज्ञासा जागी — यह कौन सा पक्षी है? उनके चाचा भी इसे नहीं पहचान सके। इसी जिज्ञासा ने उन्हें BNHS तक पहुँचाया और उनके जीवन की दिशा बदल गई।

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि एक छोटी-सी जिज्ञासा पूरे जीवन को बदल सकती है। सालिम अली ने उस एक पक्षी की खोज को पूरे जीवन की खोज में बदल दिया।

सालिम अली की कार्यपद्धति

सालिम अली केवल किताबों तक सीमित नहीं रहे। वे जंगलों, पहाड़ों, मैदानों, नदियों के किनारे — हर जगह जाकर पक्षियों का वास्तविक अध्ययन करते थे। उन्होंने लद्दाख से लेकर अंडमान-निकोबार तक पक्षियों का सर्वेक्षण किया। भारत के हर कोने में उन्होंने पक्षी-जीवन का दस्तावेज़ तैयार किया।

लेखक ने उनकी तुलना डेविड थोरो से भी की है — थोरो जिस प्रकार प्रकृति में रहकर जीवन का सच खोजते थे, उसी प्रकार सालिम अली ने पक्षियों के माध्यम से प्रकृति का सच खोजा।

अंतिम समय और विदाई

जब सालिम अली का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा, तब भी उन्होंने पक्षी-अध्ययन नहीं छोड़ा। 90 वर्ष से अधिक आयु में, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद, वे केरल यात्रा पर निकले। यह उनके अदम्य जीवट और प्रकृति-प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण है।

लेखक लिखते हैं कि जब सालिम अली ने अंतिम साँस ली, तो ऐसा लगा जैसे किसी ने पूरे जंगल को सुनसान कर दिया हो। प्रकृति का एक महान् संरक्षक इस दुनिया से विदा हो गया था।

लेखक की पीड़ा और श्रद्धांजलि

लेखक इस पाठ में केवल जीवनी नहीं लिखते — वे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और श्रद्धा भी व्यक्त करते हैं। सालिम अली का जाना उनके लिए किसी आत्मीय की विदाई जैसा है। 'साँवले सपने' — वे सपने जो सालिम अली देखते थे, जो अधूरे रह गए, जो अब भी लेखक के मन में जीवित हैं — इसी भाव पर पूरा पाठ टिका है।

4. मुख्य विषय-वस्तु और केंद्रीय भाव

प्रकृति-प्रेम

पूरे पाठ में प्रकृति के प्रति गहरे प्रेम का चित्रण है। सालिम अली का पक्षी-प्रेम केवल वैज्ञानिक अध्ययन नहीं था — वह एक आत्मिक लगाव था। वे पक्षियों की आवाज़ में जीवन का संगीत सुनते थे, उनके पंखों में उड़ान की स्वतंत्रता देखते थे।

अदम्य जीवट और संकल्प

सालिम अली का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा जुनून उम्र और बीमारी को भी परास्त कर देता है। जब डॉक्टर उन्हें आराम करने की सलाह दे रहे थे, वे तब भी पक्षियों की तलाश में निकल पड़ते थे। यह जीवट उन्हें असाधारण बनाता है।

वैज्ञानिक जिज्ञासा

एक छोटी-सी जिज्ञासा — नीले कंठ की गौरैया — ने एक महान् वैज्ञानिक को जन्म दिया। लेखक इस संदेश को उभारते हैं कि जिज्ञासा ही विज्ञान की जननी है

स्मृति और श्रद्धा

यह पाठ किसी महान् व्यक्ति के जाने के बाद उसे श्रद्धा और प्रेम के साथ याद करने का उदाहरण है। 'साँवले सपने' का प्रतीक — वे सपने जो पूरे हो गए और वे जो अधूरे रह गए — दोनों मिलकर एक अमर स्मृति बनाते हैं।

पर्यावरण संरक्षण

सालिम अली का पूरा जीवन पर्यावरण और जैव-विविधता के संरक्षण को समर्पित था। उन्होंने साइलेंट वैली को बचाने के लिए आवाज़ उठाई। यह पाठ अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति-संरक्षण का संदेश भी देता है।

5. भाषा-शैली और साहित्यिक विशेषताएँ

ललित गद्य शैली

जाबिर हुसैन ने इस पाठ में ललित निबंध की शैली अपनाई है। यह शैली कविता और गद्य के बीच की होती है — भावनात्मक, संगीतमय और चित्रात्मक। वाक्य छोटे-छोटे, लय में बँधे और भावपूर्ण हैं।

संस्मरण की विशेषताएँ

यह पाठ संस्मरण विधा का उत्कृष्ट उदाहरण है। लेखक अपनी व्यक्तिगत स्मृतियों को ऐतिहासिक तथ्यों के साथ मिलाकर एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करते हैं। पाठक को लगता है जैसे वे स्वयं सालिम अली के साथ उस यात्रा में शामिल हैं।

प्रतीकात्मकता

  • 'साँवले सपने' — वे यादें जो मन में गहरी, सुंदर और कुछ उदास हैं।
  • दूरबीन — सालिम अली की वैज्ञानिक दृष्टि और गहरी पारखी नज़र का प्रतीक।
  • पक्षी — स्वतंत्रता, जिज्ञासा और प्रकृति की विविधता के प्रतीक।
  • केरल की साइलेंट वैली — प्रकृति के उस अनछुए रूप का प्रतीक जिसे सालिम अली बचाना चाहते थे।

उपमाएँ और बिम्ब

लेखक ने अनेक सुंदर उपमाओं का प्रयोग किया है। मोज़ार्ट से तुलना, डेविड थोरो का संदर्भ, दूरबीन जैसी आँखों का बिम्ब — ये सब पाठ को समृद्ध बनाते हैं। पाठ में मानवीकरण (पक्षियों को मानवीय भावनाओं से जोड़ना) का भी सुंदर प्रयोग है।

भाषा

भाषा सहज हिंदी-उर्दू मिश्रित है। कठिन शब्दों का प्रयोग कम है। वाक्य-विन्यास काव्यात्मक है। लेखक कभी-कभी सीधे पाठक से संवाद करते हैं जो पाठ को जीवंत बनाता है।

6. महत्त्वपूर्ण अंश और उनका भाव

अंश 1 — साँवले सपनों की याद में डूबे लेखक

भाव: लेखक सालिम अली की मृत्यु के बाद उनकी यादों में खो जाते हैं। 'साँवले सपने' — वे सपने जो सालिम अली ने पक्षी-जगत के लिए देखे थे — अब यादों में बदल गए हैं। 'साँवले' शब्द में एक मधुर उदासी है।

अंश 2 — दूरबीन और प्रकृति का आमंत्रण

भाव: सालिम अली की दूरबीन केवल उनका उपकरण नहीं थी — वह उनकी आँखों का विस्तार थी। प्रकृति मानो उन्हें अपना रहस्य बताने को उत्सुक रहती थी। यह वाक्य उनके प्रकृति से अटूट संबंध को दर्शाता है।

अंश 3 — एक गौरैया और एक महान् जीवन-दिशा

भाव: यह अंश जिज्ञासा की शक्ति को रेखांकित करता है। एक साधारण घटना असाधारण खोज का आरंभ बन सकती है। बचपन की वह नीले कंठ की गौरैया सालिम अली के जीवन का मोड़-बिंदु बन गई।

अंश 4 — मृत्यु से निडर, विलुप्त प्रजातियों से भयभीत

भाव: सालिम अली के लिए किसी पक्षी प्रजाति का विलुप्त हो जाना, अपनी मृत्यु से बड़ी त्रासदी थी। यह कथन उनकी असाधारण प्राथमिकताओं और प्रकृति-प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

अंश 5 — मोज़ार्ट और सालिम अली की तुलना

भाव: महान् संगीतकार मोज़ार्ट ने मृत्यु-शय्या पर भी संगीत नहीं छोड़ा। ठीक उसी प्रकार सालिम अली ने अंतिम साँस तक पक्षियों की दुनिया नहीं छोड़ी। मोज़ार्ट का उदाहरण देकर लेखक सालिम अली को उसी श्रेणी में रखते हैं जहाँ महान् कलाकार और वैज्ञानिक होते हैं।

7. कठिन शब्द और उनके अर्थ

  • संस्मरण — किसी की याद में लिखी गई रचना; memoir
  • ललित निबंध — भावपूर्ण, काव्यात्मक शैली में लिखा निबंध
  • पक्षी-विज्ञानी (Ornithologist) — पक्षियों का वैज्ञानिक अध्ययन करने वाला
  • दूरबीन (Binoculars) — दूर की वस्तु देखने का उपकरण
  • जिज्ञासा — जानने की इच्छा; curiosity
  • साँवले सपने — मधुर, किंचित् उदास यादें और अधूरी इच्छाएँ
  • जीवट — जिजीविषा; जीने की अटूट इच्छाशक्ति
  • मूक-वादी (Silent Valley) — केरल का एक घना जंगल क्षेत्र जहाँ सालिम अली ने सर्वेक्षण किया
  • सर्वेक्षण — व्यापक अध्ययन और जाँच-पड़ताल; survey
  • BNHS — Bombay Natural History Society; प्रकृति-अध्ययन की प्रतिष्ठित संस्था
  • पारखी नज़र — जो असलियत को पहचान सके; discerning eye
  • बिम्ब — मन में उठने वाला चित्र; image
  • मानवीकरण — प्रकृति या निर्जीव वस्तुओं को मानवीय गुण देना; personification
  • आत्मीय — अपना, प्रिय; very close and dear
  • विलुप्त — जो अब न रहे; extinct
  • त्रासदी — बड़ी दुखद घटना; tragedy
  • पराकाष्ठा — चरम सीमा; the highest point
  • जैव-विविधता — जीव-जंतुओं और पक्षियों की विविधता; biodiversity
  • मोड़-बिंदु — जहाँ से जीवन की दिशा बदल जाए; turning point
  • एयरगन — हवा से चलने वाली बंदूक; air gun
  • प्रतीक — किसी बड़े भाव का प्रतिनिधित्व करने वाली वस्तु या शब्द; symbol
  • जिजीविषा — जीने की प्रबल इच्छा; will to live
  • अदम्य — जिसे दबाया न जा सके; indomitable
  • श्रद्धांजलि — आदर के साथ दी गई विदाई; tribute

8. NCERT प्रश्नोत्तर (प्रश्न-अभ्यास)

प्रश्न 1 — किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा बदल दी और उन्हें पक्षी-प्रेमी बना दिया?

उत्तर: बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक नीले कंठ वाली गौरैया घायल होकर गिरी। उस अनजाने पक्षी को देखकर उनके मन में गहरी जिज्ञासा जागी। उनके चाचा उसे पहचान नहीं सके तो वे उसे लेकर बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) गए। वहाँ उन्हें पक्षी-विज्ञान की दुनिया से परिचय हुआ। यही वह मोड़-बिंदु था जिसने एक साधारण बच्चे को भारत का महान् पक्षी-विज्ञानी बना दिया।

प्रश्न 2 — सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री से क्या निवेदन किया था और क्यों?

उत्तर: सालिम अली ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से निवेदन किया था कि वे केरल की साइलेंट वैली (मूक-वादी) को बचाएँ। वहाँ एक बाँध बनाने की योजना थी जो उस घने जंगल और उसकी जैव-विविधता को नष्ट कर देती। सालिम अली प्रकृति के उस अनमोल खज़ाने को बचाना चाहते थे। यह उनके पर्यावरण-संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

प्रश्न 3 — लेखक ने सालिम अली की तुलना मोज़ार्ट से क्यों की?

उत्तर: महान् संगीतकार मोज़ार्ट ने मृत्यु-शय्या पर भी अपना 'रेक्विम' (संगीत-रचना) पूरी करने की कोशिश की — वे अंतिम क्षण तक अपनी कला से जुड़े रहे। ठीक उसी प्रकार सालिम अली ने 90 वर्ष से अधिक आयु में, गंभीर बीमारी के बावजूद, केरल की पक्षी-सर्वेक्षण यात्रा की। दोनों ने अपने जुनून को मृत्यु से भी बड़ा माना। इसीलिए लेखक ने दोनों महान् व्यक्तित्वों की तुलना की।

प्रश्न 4 — 'साँवले सपनों की याद' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'साँवले सपने' — यह शब्द-युग्म अत्यंत सार्थक है। 'साँवला' रंग मधुर, गहरा और कुछ उदास होता है। सालिम अली के सपने — पक्षियों की नई प्रजातियाँ खोजना, प्रकृति को बचाना, पक्षी-ज्ञान को आम लोगों तक पहुँचाना — ये सपने कुछ पूरे हुए, कुछ अधूरे रह गए। उनकी मृत्यु के बाद ये सपने 'साँवली यादों' में बदल गए। शीर्षक इस मधुर-उदास स्मृति को पूरी तरह व्यक्त करता है।

प्रश्न 5 — प्रकृति के प्रति सालिम अली के लगाव का वर्णन पाठ के आधार पर कीजिए।

उत्तर: सालिम अली का प्रकृति-प्रेम असाधारण था। वे पूरे भारत के जंगलों, पहाड़ों और मैदानों में जाकर पक्षियों का अध्ययन करते थे। उनकी दूरबीन हमेशा उनके साथ रहती। वे केवल पक्षियों को नहीं देखते थे — उनकी आवाज़, उनके घोंसले, उनकी उड़ान को भी महसूस करते थे। बीमारी में भी केरल जाना उनके प्रकृति-प्रेम की पराकाष्ठा है। उन्होंने साइलेंट वैली बचाने के लिए प्रधानमंत्री तक से अनुरोध किया।

प्रश्न 6 — इस पाठ में जाबिर हुसैन की भाषा-शैली की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: जाबिर हुसैन की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं — (1) ललित गद्य जो कविता जैसा भावपूर्ण है, (2) हिंदी-उर्दू का सहज मिश्रण, (3) मोज़ार्ट और थोरो जैसे वैश्विक संदर्भ, (4) प्रतीकात्मकता — 'साँवले सपने', दूरबीन, पक्षी, (5) चित्रात्मक बिम्ब जो पाठक के मन में दृश्य बना देते हैं, (6) संस्मरण और विचार का संगम। उनका गद्य पाठक को भीतर तक छू जाता है।

अभ्यास MCQ
1. 'साँवले सपनों की याद' पाठ के लेखक कौन हैं?
  1. हरिशंकर परसाई
  2. जाबिर हुसैन
  3. महादेवी वर्मा
  4. सालिम अली
उत्तर: (B) जाबिर हुसैन — यह उनका लिखा संस्मरण है।
2. सालिम अली को किस उपनाम से जाना जाता है?
  1. बर्डमैन ऑफ एशिया
  2. बर्डमैन ऑफ इंडिया
  3. नेचरमैन ऑफ इंडिया
  4. बर्ड किंग
उत्तर: (B) बर्डमैन ऑफ इंडिया — पक्षी-विज्ञान में उनके अतुलनीय योगदान के कारण।
3. सालिम अली के जीवन का मोड़-बिंदु कौन-सी घटना थी?
  1. BNHS में पहली नौकरी
  2. केरल यात्रा
  3. नीले कंठ की गौरैया का घायल होना
  4. पद्म विभूषण मिलना
उत्तर: (C) बचपन में एयरगन से नीले कंठ की गौरैया का घायल होना — यही जिज्ञासा उन्हें पक्षी-विज्ञानी बनाने का कारण बनी।
4. BNHS का पूरा नाम क्या है?
  1. Botanical Natural Heritage Society
  2. Bombay Natural History Society
  3. Bird Nature and Habitat Survey
  4. Bombay Nature Habitat Society
उत्तर: (B) Bombay Natural History Society — सालिम अली इस संस्था से जुड़े और पूरे जीवन इसके लिए काम किया।
5. सालिम अली की तुलना पाठ में किस महान् संगीतकार से की गई है?
  1. बीथोवेन
  2. बाख
  3. मोज़ार्ट
  4. शोपाँ
उत्तर: (C) मोज़ार्ट — दोनों ने मृत्यु के करीब होने पर भी अपने कार्य को नहीं छोड़ा।
6. 'साँवले सपनों की याद' पाठ की विधा क्या है?
  1. कहानी
  2. संस्मरण / ललित निबंध
  3. नाटक
  4. यात्रा-वृत्तांत
उत्तर: (B) संस्मरण / ललित निबंध — यह सालिम अली की स्मृति में लिखा भावपूर्ण गद्य है।
7. सालिम अली ने किस स्थान को बचाने के लिए प्रधानमंत्री से निवेदन किया था?
  1. कान्हा अभयारण्य
  2. सुंदरबन
  3. साइलेंट वैली, केरल
  4. गिर, गुजरात
उत्तर: (C) साइलेंट वैली (मूक-वादी), केरल — वहाँ बाँध बनने से जैव-विविधता नष्ट होने का खतरा था।
8. 'साँवले सपने' शब्द से लेखक का क्या आशय है?
  1. रात में आने वाले डरावने सपने
  2. मधुर-उदास यादें और अधूरी इच्छाएँ
  3. साँवले रंग के पक्षियों की कल्पना
  4. भविष्य की योजनाएँ
उत्तर: (B) मधुर-उदास यादें और अधूरी इच्छाएँ — सालिम अली की स्मृतियाँ जो मन में बसी हैं।
9. जाबिर हुसैन किस राज्य से संबंधित हैं?
  1. उत्तर प्रदेश
  2. मध्य प्रदेश
  3. बिहार
  4. राजस्थान
उत्तर: (C) बिहार — उनका जन्म नालंदा जिले के नौनहीं गाँव में हुआ।
10. सालिम अली के पक्षी-प्रेम की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
  1. वे केवल किताबों से पक्षियों का अध्ययन करते थे
  2. वे केवल विदेशी पक्षियों में रुचि रखते थे
  3. 90 वर्ष की आयु में भी, बीमारी के बावजूद, जंगलों में जाकर सर्वेक्षण करते थे
  4. वे पक्षियों को पालते थे
उत्तर: (C) 90 वर्ष की आयु में भी, बीमारी के बावजूद, वे जंगलों में पक्षी-सर्वेक्षण के लिए जाते थे — यही उनके अदम्य जीवट का प्रमाण है।
11. सालिम अली को भारत सरकार ने किस पुरस्कार से सम्मानित किया?
  1. भारत रत्न
  2. पद्म श्री
  3. पद्म विभूषण
  4. साहित्य अकादमी
उत्तर: (C) पद्म विभूषण (1976) — इससे पहले उन्हें 1958 में पद्म भूषण भी मिला था।
12. पाठ में 'दूरबीन' किसका प्रतीक है?
  1. आधुनिक तकनीक का
  2. सालिम अली की गहरी पारखी दृष्टि और वैज्ञानिक जिज्ञासा का
  3. युद्ध का
  4. यात्रा का
उत्तर: (B) सालिम अली की गहरी पारखी दृष्टि और वैज्ञानिक जिज्ञासा का — दूरबीन उनकी आँखों का विस्तार थी।
अभिकथन-तर्क (Assertion-Reason)
A (अभिकथन): सालिम अली ने जीवन के अंतिम दिनों में भी पक्षी-सर्वेक्षण जारी रखा।
R (तर्क): क्योंकि उनके लिए पक्षी-विज्ञान केवल पेशा नहीं, जीवन का उद्देश्य था।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A का सही कारण है। सालिम अली का जुनून उन्हें मृत्यु के करीब होने पर भी जंगलों में ले जाता था।
A (अभिकथन): 'साँवले सपनों की याद' विधा से एक कहानी है।
R (तर्क): क्योंकि इसमें एक काल्पनिक पात्र की कहानी है।
उत्तर: A और R दोनों असत्य हैं। यह पाठ एक संस्मरण / ललित निबंध है और इसमें वास्तविक पक्षी-विज्ञानी सालिम अली को याद किया गया है।
पूर्व-वर्ष के प्रश्न (PYQ)
PYQ 1 — सालिम अली ने पक्षी-विज्ञान के क्षेत्र में क्या योगदान दिया? (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: सालिम अली ने पूरे भारत में पक्षियों का व्यापक सर्वेक्षण किया। उन्होंने 'द बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स' और डॉ. रिप्ले के साथ 10 खंडों में 'हैंडबुक ऑफ द बर्ड्स ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान' लिखी। BNHS के माध्यम से उन्होंने पक्षी-संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया। साइलेंट वैली जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों को बचाने के लिए उन्होंने राजनीतिक स्तर तक आवाज़ उठाई। उनका कार्य आज भी पक्षी-विज्ञान का आधार है।
PYQ 2 — 'साँवले सपनों की याद' पाठ में जाबिर हुसैन ने सालिम अली के किन गुणों का वर्णन किया है? (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: लेखक ने सालिम अली के निम्न गुणों का वर्णन किया है — (1) जिज्ञासा: बचपन से ही प्रकृति के रहस्यों को जानने की ललक, (2) जीवट: बीमारी और वृद्धावस्था में भी काम जारी रखना, (3) प्रकृति-प्रेम: पक्षियों और जंगलों से आत्मिक लगाव, (4) वैज्ञानिक दृष्टि: हर पक्षी को ध्यान से देखना और उसका दस्तावेज़ीकरण करना, (5) पर्यावरण-चेतना: साइलेंट वैली जैसे क्षेत्रों को बचाने का प्रयास।
PYQ 3 — पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि एक छोटी-सी जिज्ञासा जीवन को बदल सकती है। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: सालिम अली का उदाहरण इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। बचपन में एयरगन से घायल हुई एक छोटी-सी नीले कंठ की गौरैया ने उनके मन में जिज्ञासा जगाई। उस एक पक्षी को पहचानने की कोशिश ने उन्हें BNHS तक पहुँचाया और उनका पूरा जीवन बदल गया। वे भारत के सबसे महान् पक्षी-विज्ञानी बने। जिज्ञासा ही विज्ञान और खोज की जननी है।
PYQ 4 — 'साँवले सपनों की याद' पाठ में पर्यावरण संरक्षण का संदेश किस प्रकार दिया गया है? (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: सालिम अली ने केरल की साइलेंट वैली को बचाने के लिए प्रधानमंत्री से निवेदन किया था। उनका मानना था कि पक्षियों और जंगलों की रक्षा किए बिना मानव-जीवन भी संभव नहीं है। उनका पूरा जीवन जैव-विविधता के दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण को समर्पित था। पाठ का संदेश है — प्रकृति हमारी धरोहर है, उसे बचाना हमारा दायित्व है।
PYQ 5 — जाबिर हुसैन की भाषा-शैली को उदाहरण सहित समझाइए। (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: जाबिर हुसैन की भाषा-शैली ललित और काव्यात्मक है। उनके गद्य में — (1) प्रतीकात्मकता है: 'साँवले सपने' मधुर-उदास यादों के प्रतीक हैं। (2) उपमाएँ हैं: सालिम अली की तुलना मोज़ार्ट से। (3) बिम्ब हैं: दूरबीन लिए जंगल में चलते सालिम अली का दृश्य। (4) हिंदी-उर्दू का मिश्रण है जो भाषा को सहज और मनोरम बनाता है। (5) संवेदनशीलता है — लेखक की व्यक्तिगत पीड़ा पाठक तक सीधे पहुँचती है।
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