मेरे बचपन के दिन

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 6 of 16
मेरे बचपन के दिन

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नज़र में
  • विधा: आत्मकथात्मक संस्मरण — लेखिका ने अपने बचपन की स्मृतियों को सजीव शब्दों में प्रस्तुत किया है।
  • लेखिका: महादेवी वर्मा — हिंदी साहित्य की छायावाद की प्रमुख स्तंभ, "आधुनिक मीरा" के नाम से प्रसिद्ध।
  • मुख्य पात्र: महादेवी वर्मा (स्वयं), सुभद्राकुमारी चौहान (प्रिय सहेली व कवयित्री)।
  • केंद्रीय भाव: बचपन की मित्रता, हिंदी काव्य-रचना की शुरुआत, परिवार का संस्कारमय वातावरण।
  • भाषा: संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली, भावात्मक एवं चित्रात्मक शैली।
  • बोर्ड वेटेज: ~5 अंक — प्रायः एक लघु उत्तरीय (2 अंक) + एक दीर्घ उत्तरीय (3-5 अंक) प्रश्न।
विस्तृत नोट्स

1. लेखिका परिचय — महादेवी वर्मा

जन्म: 26 मार्च 1907, फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) | निधन: 11 सितंबर 1987, प्रयागराज।

महादेवी वर्मा का नाम हिंदी साहित्य में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है। उन्हें "आधुनिक मीरा" कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में वेदना, करुणा और अलौकिक प्रेम की अनुभूति मीरा के पदों-सी झलकती है। वे छायावाद के चार स्तंभों में से एक हैं — जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा।

शिक्षा: प्रयागराज के क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही काव्य-रचना में रुचि थी।

प्रमुख रचनाएँ:

  • काव्य-संग्रह: नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा (यामा पर ज्ञानपीठ पुरस्कार 1982)।
  • गद्य-रचनाएँ: अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, मेरा परिवार, चेन, क्षणदा।
  • संस्मरण: मेरे बचपन के दिन — स्मृति की रेखाएँ का एक महत्वपूर्ण अंश है।

पुरस्कार एवं सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (1956), पद्मभूषण (1956), पद्मविभूषण (1988 — मरणोपरांत), ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982)।

विशेषता: महादेवी वर्मा न केवल महान कवयित्री थीं, बल्कि एक संवेदनशील गद्यकार और समाज सुधारक भी थीं। उन्होंने महिला शिक्षा के क्षेत्र में अथक कार्य किया और प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या रहीं।

2. सारांश — मेरे बचपन के दिन

परिवार का वातावरण एवं जन्म की परिस्थितियाँ

महादेवी वर्मा लिखती हैं कि उनके परिवार में लगभग दो सौ वर्षों से कोई पुत्री नहीं हुई थी। इसलिए जब उनका जन्म हुआ तो घर में उत्सव का वातावरण था। उनके बाबा (दादाजी) बाँके बिहारी के भक्त थे और उन्होंने कहा कि यह लड़की देवी है, इसे "महादेवी" नाम दिया जाएगा। इस प्रकार उनका नामकरण हुआ।

उनकी माँ अत्यंत धार्मिक और सुसंस्कृत महिला थीं। वे हिंदी और संस्कृत जानती थीं और पूजा-पाठ में लीन रहती थीं। माँ ने ही महादेवी में साहित्यिक संस्कारों के बीज बोए। माँ हिंदी के पद्य पढ़ती थीं, मीरा के पद गाती थीं — इसी से महादेवी को कविता से प्रेम हुआ।

विद्यालय-जीवन और सुभद्राकुमारी चौहान से मित्रता

महादेवी जब क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज, प्रयागराज में पढ़ने गईं, तब वहाँ उनकी भेंट सुभद्राकुमारी चौहान से हुई। सुभद्राकुमारी उनसे कक्षा में वरिष्ठ थीं और पहले से ही कविताएँ लिखती थीं। उनकी कविताएँ उस समय प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में छप चुकी थीं। महादेवी उनसे बहुत प्रभावित हुईं।

सुभद्राकुमारी ने ही महादेवी को हिंदी में कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। दोनों सखियाँ मिलकर कविता करतीं, एक-दूसरे की कविताएँ सुनतीं और उन्हें सुधारतीं। सुभद्राकुमारी महादेवी की कविताएँ अपनी सहेलियों को गर्व से दिखाती थीं और कहती थीं — यह मेरी सहेली की कविता है। यह गर्व और प्रेम का वह क्षण था जो महादेवी को जीवन भर याद रहा।

यह मित्रता केवल भावनात्मक नहीं थी; यह एक साहित्यिक साझेदारी थी। दोनों एक-दूसरे की प्रेरणास्रोत थीं। महादेवी स्वीकार करती हैं कि सुभद्राकुमारी के बिना शायद वे कभी कवयित्री नहीं बन पातीं।

छात्रावास का जीवन

छात्रावास में महादेवी का जीवन बड़ा सादा था। वे वहाँ एकाग्रता से पढ़ती थीं। उनकी कविताएँ छात्रावास की दीवारों पर लगी रहती थीं। एक बार किसी ने उनकी लिखी कविता को बिना नाम के छपवा दिया — तब भी उन्हें गर्व की अनुभूति हुई।

छात्रावास में उनकी अन्य सहेलियाँ भी थीं जो विभिन्न पृष्ठभूमियों से आती थीं। इस विविधता ने महादेवी के व्यक्तित्व को व्यापकता दी। उन्होंने सीखा कि प्रेम और मित्रता की कोई जाति या वर्ग नहीं होती।

हिंदी काव्य-रचना का आरंभ

महादेवी की माँ ने उन्हें बचपन में ही मीरा के पद और अन्य भक्ति-काव्य सिखाए थे। इसी आधार पर जब सुभद्राकुमारी ने उन्हें प्रेरित किया, तो महादेवी की छिपी हुई काव्य-प्रतिभा बाहर आ गई। उन्होंने पहले ब्रजभाषा में कविताएँ लिखना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे खड़ीबोली की ओर मुड़ीं।

एक महत्वपूर्ण प्रसंग यह है कि महादेवी की कविताएँ जब सरस्वती पत्रिका में छपीं तो उनके गुरु और परिवार के लोग अत्यंत प्रसन्न हुए। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था जिसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी।

माँ की भूमिका

महादेवी की माँ उनके जीवन की प्रथम गुरु थीं। माँ स्वयं हिंदी और संस्कृत में शिक्षित थीं। वे प्रतिदिन पूजा करती थीं और धार्मिक ग्रंथ पढ़ती थीं। उन्होंने महादेवी को घर पर ही हिंदी, संस्कृत और चित्रकारी सिखाई। माँ मीरा के भजन गाती थीं जिन्हें सुनकर महादेवी के मन में कविता के प्रति आकर्षण जागा। इस प्रकार माँ ने महादेवी की साहित्यिक प्रतिभा की जड़ों को सींचा।

बचपन की धार्मिकता और दार्शनिकता

महादेवी बताती हैं कि बचपन में उनके मन में अनेक दार्शनिक प्रश्न उठते थे। वे सोचती थीं कि जीवन का उद्देश्य क्या है, सुख-दुख का क्या अर्थ है। बौद्ध धर्म से भी उन्हें गहरी प्रेरणा मिली। उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं की जीवन-शैली से करुणा और वैराग्य का पाठ सीखा। यही करुणा उनकी कविताओं का मूल स्वर बनी और उनके पूरे काव्य-जीवन में व्याप्त रही।

सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्कार

महादेवी के घर में पर्वों और उत्सवों का विशेष महत्व था। होली, दीपावली और अन्य त्योहारों पर घर में उत्साह छाया रहता था। इन उत्सवों में भाग लेते हुए महादेवी ने जीवन की विविधता और सामूहिकता को समझा। इन्हीं अनुभवों ने उनके साहित्य को जीवंतता और गहराई प्रदान की।

3. प्रमुख पात्र

महादेवी वर्मा (स्वयं लेखिका)

इस संस्मरण की केंद्रीय पात्र स्वयं महादेवी हैं। वे एक संवेदनशील, जिज्ञासु और प्रतिभाशाली बालिका के रूप में सामने आती हैं। बचपन से ही उनमें काव्य-प्रतिभा थी जिसे उचित प्रेरणा मिलते ही वह पल्लवित हो गई। उनका स्वभाव अत्यंत सरल, भावुक और जिज्ञासु था। दार्शनिक प्रश्न उनके मन को बचपन से ही व्याकुल करते थे।

सुभद्राकुमारी चौहान

सुभद्राकुमारी चौहान इस संस्मरण की सबसे महत्वपूर्ण सहायक पात्र हैं। वे महादेवी से उम्र में बड़ी थीं और पहले से ही प्रसिद्ध कवयित्री थीं। उनकी कविता झाँसी की रानी आज भी अत्यंत लोकप्रिय है। सुभद्राकुमारी का व्यक्तित्व साहसी, उत्साही और प्रेरणादायक था। वे महादेवी की सबसे प्रिय सखी और साहित्यिक मार्गदर्शक थीं। उनकी उपस्थिति ने महादेवी के जीवन को एक नई दिशा दी।

माँ

महादेवी की माँ एक ममतामयी, धार्मिक और सुशिक्षित महिला थीं। उन्होंने न केवल महादेवी को जन्म दिया, बल्कि उनके व्यक्तित्व और प्रतिभा को सँवारा भी। माँ की भक्ति-भावना, मीरा-प्रेम और शिक्षा के प्रति उत्साह ने महादेवी को जीवन की सबसे बड़ी पूँजी दी। माँ का प्रभाव महादेवी के साहित्य में जीवन भर दिखाई देता है।

बाबा (दादाजी)

बाबा धर्मपरायण व्यक्ति थे जो बाँके बिहारी के भक्त थे। महादेवी के जन्म पर उन्होंने उन्हें देवी-स्वरूप माना और महादेवी नाम रखा। उनकी भक्ति-भावना ने परिवार के धार्मिक वातावरण को और गहरा किया। बाबा के इस स्नेह ने महादेवी के बचपन को विशेष बनाया।

4. मुख्य विषय-वस्तु

(क) बचपन की स्मृतियाँ

संस्मरण का सबसे महत्वपूर्ण विषय बचपन की उन यादों को जीवंत करना है जिन्होंने एक साधारण बालिका को महान कवयित्री बनाया। लेखिका ने बचपन के छोटे-छोटे प्रसंगों को इस तरह प्रस्तुत किया है कि पाठक उनमें खो जाता है और उसे अपने बचपन की याद आ जाती है।

(ख) मित्रता का महत्व

सुभद्राकुमारी चौहान के साथ महादेवी की मित्रता यह सिद्ध करती है कि सच्ची मित्रता व्यक्ति के जीवन को एक नई दिशा दे सकती है। यह मित्रता केवल भावनात्मक नहीं थी — यह दो प्रतिभाओं का मिलन था जिसने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।

(ग) साहित्यिक प्रेरणा का उद्गम

महादेवी ने स्पष्ट किया है कि उनकी काव्य-प्रतिभा का आधार माँ के संस्कार और सुभद्राकुमारी की प्रेरणा थी। यह विषय हर उस व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है जो जानना चाहता है कि महान साहित्यकार कैसे बनते हैं।

(घ) स्त्री-शिक्षा और स्वतंत्रता

उस युग में जब स्त्री-शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था, महादेवी का छात्रावास में रहकर पढ़ना और कविता लिखना एक क्रांतिकारी कदम था। यह संस्मरण अप्रत्यक्ष रूप से स्त्री-स्वतंत्रता और स्त्री-शिक्षा का प्रबल संदेश देता है।

(ङ) परिवार और माँ की भूमिका

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती; वह बच्चे के व्यक्तित्व की निर्मात्री भी होती है। महादेवी की माँ ने उनमें साहित्य-प्रेम के बीज बोए जो आगे चलकर वटवृक्ष बने और जिसकी छाया में हिंदी साहित्य समृद्ध हुआ।

(च) सामाजिक समरसता

छात्रावास के जीवन ने महादेवी को यह सिखाया कि समाज में विभिन्न वर्गों, जातियों और पृष्ठभूमियों के लोग साथ मिलकर रह सकते हैं। उनकी मित्रताएँ जाति और धर्म की सीमाओं से परे थीं।

5. भाषा-शैली

भाषा की विशेषताएँ

  • संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली: महादेवी ने शुद्ध हिंदी का प्रयोग किया है जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों की प्रधानता है — जैसे आत्मकथात्मक, वातावरण, संस्कार, करुणा।
  • चित्रात्मकता: उनकी भाषा में दृश्यात्मकता है — पाठक मानो स्वयं उस छात्रावास में पहुँच जाता है और महादेवी-सुभद्रा की बातें सुनता है।
  • भावात्मकता: हर वाक्य में गहरी भावना छुपी है। लेखिका ने तथ्य बताने के साथ-साथ हृदय के भाव भी व्यक्त किए हैं।
  • व्यंग्य और हास्य: कहीं-कहीं हल्का व्यंग्य और सहज हास्य भी मिलता है जो पाठक को आनंदित करता है।
  • मुहावरों का प्रयोग: उचित स्थानों पर सटीक मुहावरों का प्रयोग भाषा को प्रभावशाली बनाता है।

शैली की विशेषताएँ

  • संस्मरण-शैली: यह आत्मकथात्मक संस्मरण है जिसमें "मैं" के माध्यम से घटनाएँ वर्णित हैं। लेखिका और पाठक के बीच आत्मीयता का भाव उत्पन्न होता है।
  • वर्णनात्मक शैली: घटनाओं और पात्रों का सजीव और विस्तृत वर्णन किया गया है।
  • काव्यात्मक गद्य: गद्य होते हुए भी वाक्यों में लय और संगीत की अनुभूति होती है — यही महादेवी की विशिष्टता है जो उन्हें अन्य गद्यकारों से अलग करती है।
  • स्मृति-प्रवाह: घटनाएँ कालक्रम में नहीं, बल्कि स्मृति के प्रवाह में प्रस्तुत होती हैं — जैसे मन की गहराई से एक-एक याद उभरती हो।

6. महत्वपूर्ण प्रसंग

प्रसंग 1 — नामकरण का प्रसंग

महादेवी के जन्म पर उनके बाबा ने बड़े उत्साह के साथ उनका नाम "महादेवी" रखा। इस परिवार में दो सौ वर्षों से कोई बेटी नहीं हुई थी। बाबा ने कहा कि यह देवी-स्वरूप है। यह प्रसंग बताता है कि एक ऐसे समय में जब बेटियों को अवांछित माना जाता था, कुछ परिवार उन्हें देवी मानते थे। यह प्रसंग उनके सकारात्मक बचपन का आधार है।

प्रसंग 2 — सुभद्राकुमारी से पहली मुलाकात

छात्रावास में जब महादेवी पहुँचीं, तो उन्होंने देखा कि एक लड़की — सुभद्राकुमारी — पहले से ही प्रसिद्ध कवयित्री है। उनकी कविताएँ सरस्वती जैसी पत्रिकाओं में छप चुकी थीं। महादेवी उनसे मिलकर अभिभूत हो गईं। इसी मुलाकात से एक ऐतिहासिक मित्रता का आरंभ हुआ जिसने हिंदी साहित्य को अमूल्य रचनाएँ दीं।

प्रसंग 3 — कविता की प्रेरणा

सुभद्राकुमारी ने एक दिन महादेवी से कहा — "तुम भी कविता लिखो।" महादेवी ने झिझकते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। सुभद्राकुमारी ने उन्हें पढ़कर बहुत प्रशंसा की और सबको दिखाया। इस प्रकार महादेवी का काव्य-जीवन आरंभ हुआ। यह एक मित्र के प्रोत्साहन की शक्ति का अद्भुत उदाहरण है — कि कैसे एक छोटी-सी प्रेरणा किसी के जीवन की दिशा बदल देती है।

प्रसंग 4 — माँ का साहित्यिक प्रभाव

महादेवी बताती हैं कि माँ रोज सुबह मीरा के भजन गाती थीं। वे हिंदी और संस्कृत के श्लोक पढ़ती थीं। इसी वातावरण में पली-बढ़ी महादेवी के मन में शब्दों के प्रति प्रेम स्वाभाविक रूप से जागा। माँ ने घर पर ही उन्हें चित्रकारी और लेखन सिखाया। माँ के इस योगदान को महादेवी ने बड़े कृतज्ञ भाव से याद किया है।

प्रसंग 5 — सरस्वती पत्रिका में कविता का प्रकाशन

जब महादेवी की कविताएँ सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुईं तो यह उनके जीवन का एक स्मरणीय क्षण था। उस समय सरस्वती हिंदी की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका थी जिसके संपादक महावीरप्रसाद द्विवेदी थे। स्कूल में सभी ने महादेवी की प्रशंसा की। इस घटना ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी और उन्हें आगे लिखते रहने की प्रेरणा मिली।

7. कठिन शब्द और अर्थ

शब्दअर्थ
संस्मरणकिसी बीती हुई घटना या व्यक्ति की स्मृति में लिखी गई रचना
आत्मकथात्मकस्वयं के जीवन से संबंधित, आत्मकथा के रूप में लिखा गया
छायावादहिंदी काव्य की एक प्रमुख प्रवृत्ति (1920-1936) जिसमें प्रकृति, प्रेम और रहस्यवाद प्रधान है
अभिभूतमोहित हो जाना, अत्यंत प्रभावित होना
पल्लवितविकसित होना, फलना-फूलना
वैराग्यसांसारिक विषयों से उदासीनता, संसार से विरक्ति
करुणादूसरों के कष्ट पर दया और सहानुभूति की भावना
संस्कारमाता-पिता और समाज द्वारा दिए गए अच्छे विचार और आचरण
प्रतिष्ठितसम्मानित, प्रसिद्ध, मान्यता प्राप्त
ब्रजभाषामथुरा-वृंदावन क्षेत्र की भाषा, मध्यकाल में काव्य की मुख्य भाषा
तत्समसंस्कृत से सीधे लिए गए शब्द जो हिंदी में ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं
काव्यात्मककविता के गुणों से युक्त, काव्यमय
छात्रावासविद्यार्थियों के रहने का आवासीय स्थान, हॉस्टल
सखीघनिष्ठ मित्र (स्त्री), सहेली
नामकरणजन्म के बाद शिशु का नाम रखने का संस्कार
कृतज्ञउपकार मानने वाला, आभारी
वेदनापीड़ा, दर्द, भावनात्मक कष्ट
साझेदारीभागीदारी, मिल-जुलकर कार्य करना

8. NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 — मेरे बचपन के दिन में लेखिका ने अपने बचपन की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?

उत्तर: लेखिका ने निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है —

  • परिवार में दो सौ वर्षों बाद जन्म लेने वाली पुत्री होने के कारण उन्हें विशेष स्नेह और देवी का दर्जा मिला।
  • माँ का धार्मिक और सुसंस्कृत वातावरण जिसने उनमें साहित्यिक रुचि जगाई।
  • सुभद्राकुमारी चौहान से मित्रता और उनकी प्रेरणा से कविता लिखने की शुरुआत।
  • छात्रावास का सादा लेकिन सृजनशील जीवन।
  • बौद्ध धर्म की करुणा और वैराग्य की भावना का उन पर पड़ा गहरा प्रभाव।
  • सरस्वती पत्रिका में कविताओं का प्रकाशन और उससे मिली प्रसिद्धि।
प्रश्न 2 — सुभद्राकुमारी चौहान के साथ महादेवी वर्मा की मित्रता किस प्रकार हुई और उसका क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: महादेवी वर्मा जब क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने गईं, तब वहाँ सुभद्राकुमारी चौहान से उनकी भेंट हुई। सुभद्राकुमारी उनसे वरिष्ठ थीं और पहले से ही प्रतिष्ठित कवयित्री थीं। दोनों में शीघ्र ही गहरी मित्रता हो गई। सुभद्राकुमारी ने महादेवी को हिंदी में कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। इस मित्रता का प्रभाव यह पड़ा कि महादेवी की छिपी हुई काव्य-प्रतिभा बाहर आई और वे आगे चलकर महान कवयित्री बनीं। यह मित्रता एक साहित्यिक साझेदारी थी जिसने हिंदी साहित्य को दो महान लेखिकाएँ दीं।

प्रश्न 3 — महादेवी वर्मा की माँ का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: महादेवी की माँ उनकी प्रथम गुरु थीं। माँ धर्मपरायण, हिंदी-संस्कृत में शिक्षित और काव्य-प्रेमी महिला थीं। वे प्रतिदिन मीरा के भजन गाती थीं और धार्मिक ग्रंथ पढ़ती थीं। इस वातावरण का महादेवी पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने घर पर ही हिंदी, संस्कृत और चित्रकारी सीखी। माँ की भक्ति-भावना और काव्य-प्रेम ने ही महादेवी में साहित्यिक संस्कारों के बीज बोए। माँ के बिना शायद महादेवी वर्मा जैसी महान कवयित्री का जन्म न हुआ होता।

प्रश्न 4 — महादेवी वर्मा के बचपन में उनकी काव्य-प्रतिभा किस प्रकार विकसित हुई?

उत्तर: महादेवी की काव्य-प्रतिभा दो मुख्य कारणों से विकसित हुई — पहला, माँ के धार्मिक-साहित्यिक वातावरण से जिसमें मीरा के भजन और संस्कृत श्लोक नित्य सुनाई देते थे; दूसरा, सुभद्राकुमारी चौहान की प्रेरणा से जिन्होंने महादेवी को हिंदी में लिखने के लिए उत्साहित किया। महादेवी ने पहले ब्रजभाषा में कविताएँ लिखना शुरू किया, फिर खड़ीबोली में आईं। उनकी कविताएँ सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुईं जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उनकी प्रतिभा और भी निखरती गई।

प्रश्न 5 — महादेवी वर्मा के बचपन में परिवार का क्या वातावरण था?

उत्तर: महादेवी के परिवार का वातावरण अत्यंत धार्मिक और संस्कारमय था। उनके बाबा बाँके बिहारी के भक्त थे और उन्होंने महादेवी को देवी-स्वरूप माना। माँ हिंदी-संस्कृत में शिक्षित थीं और प्रतिदिन भजन-पाठ करती थीं। इस वातावरण में महादेवी ने साहित्य, धर्म और अध्यात्म के संस्कार ग्रहण किए। परिवार ने उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जिसके फलस्वरूप वे उच्च शिक्षा के लिए छात्रावास गईं और एक महान साहित्यकार बनीं।

प्रश्न 6 — मेरे बचपन के दिन में बौद्ध धर्म का उल्लेख किस प्रसंग में हुआ है?

उत्तर: महादेवी बताती हैं कि बचपन में उन्हें बौद्ध भिक्षुओं की जीवन-शैली ने बहुत प्रभावित किया। उनके जीवन में दिखने वाली करुणा, त्याग और वैराग्य की भावना ने महादेवी के मन में गहरी छाप छोड़ी। यही करुणा और वेदना उनके पूरे काव्य-जीवन का मूल स्वर बनी। बौद्ध धर्म के इस प्रभाव ने उन्हें जीवन की क्षणभंगुरता और करुणा का पाठ पढ़ाया जो उनकी कविताओं में जीवन भर झलकता रहा।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. मेरे बचपन के दिन किस विधा में लिखी गई रचना है?
  1. कहानी
  2. आत्मकथात्मक संस्मरण
  3. निबंध
  4. नाटक
उत्तर: (B) आत्मकथात्मक संस्मरण — लेखिका ने अपने बचपन की स्मृतियों को संस्मरण शैली में प्रस्तुत किया है।
2. महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा क्यों कहा जाता है?
  1. वे मीरा के बारे में लिखती थीं
  2. उनकी कविताओं में मीरा जैसी वेदना और भक्ति-भाव है
  3. वे मीरा की वंशज थीं
  4. उन्होंने मीरा पर शोध किया था
उत्तर: (B) उनकी कविताओं में मीरा जैसी करुणा, वेदना और अलौकिक प्रेम की अनुभूति है।
3. महादेवी वर्मा के बचपन में उनकी सबसे प्रिय सखी कौन थीं?
  1. महादेवी की माँ
  2. सुभद्राकुमारी चौहान
  3. मीराबाई
  4. इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (B) सुभद्राकुमारी चौहान — जिनसे महादेवी की छात्रावास में मित्रता हुई।
4. महादेवी वर्मा के परिवार में लगभग कितने वर्षों से कोई पुत्री नहीं हुई थी?
  1. पचास वर्ष
  2. सौ वर्ष
  3. दो सौ वर्ष
  4. तीन सौ वर्ष
उत्तर: (C) दो सौ वर्ष — इसीलिए महादेवी के जन्म को विशेष माना गया और उन्हें देवी-स्वरूप कहा गया।
5. महादेवी वर्मा को किस महत्वपूर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
  1. केवल पद्मभूषण
  2. केवल साहित्य अकादमी
  3. ज्ञानपीठ पुरस्कार
  4. उपर्युक्त सभी
उत्तर: (D) उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्मभूषण, पद्मविभूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार — सभी से सम्मानित किया गया।
6. महादेवी वर्मा के बाबा किसके भक्त थे?
  1. राम
  2. शिव
  3. बाँके बिहारी (कृष्ण)
  4. दुर्गा
उत्तर: (C) बाँके बिहारी — अर्थात् श्रीकृष्ण के एक रूप के उपासक थे।
7. सुभद्राकुमारी चौहान की कौन-सी कविता सबसे अधिक प्रसिद्ध है?
  1. मधुशाला
  2. झाँसी की रानी
  3. कामायनी
  4. यामा
उत्तर: (B) झाँसी की रानी — खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।
8. महादेवी वर्मा का काव्य-संग्रह यामा किस साहित्यिक धारा का प्रतिनिधित्व करता है?
  1. भक्तिकाल
  2. रीतिकाल
  3. छायावाद
  4. प्रयोगवाद
उत्तर: (C) छायावाद — महादेवी छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं।
9. महादेवी वर्मा ने पहले किस भाषा में कविता लिखना शुरू किया?
  1. खड़ीबोली
  2. अवधी
  3. ब्रजभाषा
  4. संस्कृत
उत्तर: (C) ब्रजभाषा — बाद में उन्होंने खड़ीबोली (आधुनिक हिंदी) में लिखा।
10. मेरे बचपन के दिन में महादेवी वर्मा की माँ की क्या विशेषता बताई गई है?
  1. वे अशिक्षित थीं
  2. वे हिंदी-संस्कृत में शिक्षित, धार्मिक और काव्य-प्रेमी थीं
  3. वे केवल घर का काम करती थीं
  4. वे अंग्रेजी पढ़ती थीं
उत्तर: (B) माँ हिंदी-संस्कृत में शिक्षित थीं, धार्मिक थीं और मीरा के भजन गाती थीं।
11. महादेवी वर्मा की कविताएँ बचपन में किस पत्रिका में प्रकाशित हुईं?
  1. धर्मयुग
  2. सरस्वती
  3. हंस
  4. कादम्बिनी
उत्तर: (B) सरस्वती — हिंदी साहित्य की उस समय की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका।
12. मेरे बचपन के दिन में महादेवी वर्मा किस विद्यालय में पढ़ती थीं?
  1. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
  2. क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज, प्रयागराज
  3. दिल्ली विश्वविद्यालय
  4. इलाहाबाद विश्वविद्यालय
उत्तर: (B) क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज, प्रयागराज — जहाँ सुभद्राकुमारी से भेंट हुई।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)
PYQ 1 — महादेवी वर्मा के जीवन में सुभद्राकुमारी चौहान का क्या महत्व था? विस्तार से स्पष्ट कीजिए। (CBSE, 5 अंक)
उत्तर-संकेत: सुभद्राकुमारी चौहान महादेवी की सबसे प्रिय सखी और साहित्यिक मार्गदर्शक थीं। वे महादेवी से वरिष्ठ थीं और पहले से ही प्रसिद्ध कवयित्री थीं। उन्होंने महादेवी को हिंदी कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। दोनों मिलकर कविताएँ लिखती और सुधारती थीं। इस मित्रता ने महादेवी की प्रतिभा को पहचाना और उसे सही दिशा दी। सुभद्राकुमारी की प्रेरणा के बिना शायद महादेवी इतनी महान कवयित्री न बनतीं।
PYQ 2 — मेरे बचपन के दिन पाठ के आधार पर महादेवी वर्मा की माँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर-संकेत: माँ की प्रमुख विशेषताएँ — (1) धार्मिक और भक्ति-भाव से परिपूर्ण; (2) हिंदी और संस्कृत में सुशिक्षित; (3) मीरा के भजन गाने वाली, काव्य-प्रेमी; (4) महादेवी को घर पर ही शिक्षित करने वाली; (5) ममतामयी और संस्कारशील। इन्हीं गुणों के कारण वे महादेवी की प्रथम गुरु मानी जाती हैं।
PYQ 3 — मेरे बचपन के दिन संस्मरण में छायावादी काव्य की किन प्रवृत्तियों का संकेत मिलता है? (CBSE, 3 अंक)
उत्तर-संकेत: छायावाद की प्रमुख प्रवृत्तियाँ जो इस संस्मरण में झलकती हैं — (1) करुणा और वेदना का स्वर (बौद्ध धर्म का प्रभाव); (2) आत्म-अभिव्यक्ति की प्रवृत्ति; (3) स्त्री-जीवन की अनुभूति और स्वतंत्रता का आग्रह; (4) प्रकृति और अध्यात्म के प्रति संवेदनशीलता; (5) संस्कृतनिष्ठ, काव्यात्मक भाषा।
PYQ 4 — मेरे बचपन के दिन पाठ की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर-संकेत: (1) भाषा — संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली, तत्सम शब्दों की प्रधानता, शुद्ध और प्रांजल हिंदी। (2) शैली — संस्मरण-शैली, वर्णनात्मक, भावात्मक और काव्यात्मक गद्य। (3) विशेषता — गद्य होते हुए भी लय और संगीत की अनुभूति, चित्रात्मकता और सजीवता। यह शैली महादेवी को अन्य गद्यकारों से अलग और विशिष्ट बनाती है।
PYQ 5 — महादेवी वर्मा के बचपन में उनके नामकरण से संबंधित क्या विशेष घटना हुई? (CBSE, 2 अंक)
उत्तर-संकेत: महादेवी के परिवार में लगभग दो सौ वर्षों से कोई पुत्री नहीं हुई थी। जब महादेवी का जन्म हुआ तो उनके बाबा ने उन्हें देवी-स्वरूप माना। बाबा बाँके बिहारी के भक्त थे और उन्होंने कहा कि यह लड़की देवी है, इसलिए इसका नाम महादेवी रखा जाएगा। इस प्रकार उनका यह नाम पड़ा जो आजीवन उनकी पहचान बना।
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