ग्राम श्री

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 11 of 16
ग्राम श्री

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नजर में
  • कवि: सुमित्रानंदन पंत — छायावाद के चार स्तंभों में से एक; "प्रकृति के सुकुमार कवि" की उपाधि।
  • कविता का केंद्र: गाँव की हरी-भरी प्रकृति — खेत, फसल, नदी, बाग, पशु-पक्षी, भोर और संध्या के दृश्य।
  • ऋतु: शिशिर ऋतु — ओस, कोमल धूप और पकती फसलों का मनोहर समय।
  • मुख्य अलंकार: मानवीकरण, उपमा, रूपक, अनुप्रास।
  • परीक्षा भार: ~5 अंक — भावार्थ (2-3 अंक) + प्रश्नोत्तर (2 अंक) प्रतिवर्ष।
विस्तृत नोट्स

1. कवि परिचय — सुमित्रानंदन पंत

जन्म: 20 मई 1900, कौसानी, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)। निधन: 28 दिसंबर 1977, इलाहाबाद।

पंत जी का जन्म हिमालय की गोद में हुआ। बाल्यकाल से ही प्रकृति के अनंत सौंदर्य ने उन्हें कवि बनाया। वे छायावाद के चार प्रमुख कवियों (पंत, प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा) में से एक हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि स्वयं एक सजीव, संवेदनशील पात्र है।

प्रमुख रचनाएँ:

  • वीणा (1919) — प्रथम प्रकाशित काव्य-संग्रह।
  • पल्लव (1926) — छायावाद की चरम अभिव्यक्ति।
  • गुंजन (1932) — प्रकृति-प्रेम और सौंदर्य-बोध।
  • युगांत, युगवाणी — प्रगतिवादी दौर की रचनाएँ।
  • ग्राम्या (1940) — ग्रामीण जीवन का चित्रण।
  • चिदंबरा (1958) — ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त कृति।

प्रमुख पुरस्कार: साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्मभूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार (1968)

काव्य-विशेषताएँ:

  • प्रकृति का सूक्ष्म, कोमल और चित्रात्मक वर्णन।
  • भाषा में संगीतात्मकता — हर पंक्ति पढ़ने में सरगम-जैसी।
  • मानवीय भावनाओं का प्रकृति के साथ समन्वय (प्रकृति का मानवीकरण)।
  • खड़ी बोली हिंदी में छायावादी लालित्य का श्रेष्ठ उदाहरण।

उन्हें "प्रकृति के सुकुमार कवि" इसीलिए कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में प्रकृति का वर्णन अत्यंत कोमल, सुंदर और सजीव है — ओस की एक बूँद, भँवरे की गुनगुनाहट, पत्तों की सरसराहट तक को वे बड़ी संवेदनशीलता से पकड़ते हैं।

2. कविता का सारांश

"ग्राम श्री" का अर्थ है — गाँव की शोभा / गाँव की सम्पदा। इस कविता में पंत जी ने शिशिर ऋतु के एक सुहाने दिन में भारतीय गाँव की प्रकृति का जीवंत, चित्रात्मक वर्णन किया है।

(क) हरी-भरी धरती का चित्र: कविता के आरंभ में कवि बताते हैं कि चारों ओर हरियाली ऐसी फैली है मानो धरती पर हरे रंग का मखमली कालीन बिछ गया हो। खेतों में दूर-दूर तक हरी घास और फसलें लहरा रही हैं। शिशिर की ओस की बूँदें घास की नोकों पर मोती जैसी चमक रही हैं और सुबह की कोमल धूप पड़ने पर वे चाँदी-सी झिलमिला उठती हैं।

(ख) फसलों और फूलों की शोभा: खेतों में अनेक फसलें पक रही हैं — अरहर और सनई की सुनहरी फलियाँ लटकी हैं, तीसी (अलसी) के नीले फूल खिले हैं, सरसों के पीले फूलों से खेत भर गए हैं और मटर की हरी फलियाँ हँसती-सी प्रतीत होती हैं। ये रंग-बिरंगे दृश्य मिलकर खेतों को एक सुंदर रंग-चित्र बना देते हैं।

(ग) बागों का सौंदर्य: कवि बागों की ओर दृष्टि ले जाते हैं — आम के पेड़ों पर बौर (मंजरी) आ गई है, उनकी मधुर सुगंध चारों ओर फैल रही है। अमरूद और बेर के पेड़ पके फलों से लदे हैं। पके फल इस तरह चमकते हैं मानो पेड़ों ने रत्न-आभूषण पहन लिए हों।

(घ) नदी-तट का दृश्य: गाँव के पास बहती गंगा का तट अत्यंत मनोरम है। नदी के किनारे चमकीली बालू (रेत) फैली है — धूप में वह सोने-सी दमकती है। नदी का जल शांत और स्वच्छ है। तट पर खरबूजे की बेलें और हरी क्यारियाँ सौंदर्य को चार गुना कर देती हैं।

(ङ) पशु-पक्षी: हरे-भरे खेतों में गाय-बैल, भैंसें चर रही हैं। आम के पेड़ पर कोयल कूक रही है। तोते फलियाँ चुग रहे हैं। मोर जंगल में नृत्य कर रहे हैं। पक्षियों का यह कलरव वातावरण को संगीतमय बना देता है।

(च) प्रकृति का संदेश: कवि कविता के अंत में स्पष्ट करते हैं — भारतीय गाँव की यह प्राकृतिक संपदा अतुलनीय है। मिट्टी की सोंधी सुगंध, फसलों का लहराना, पक्षियों का गाना, नदी का निर्मल जल — यही भारत की असली शान और समृद्धि है।

3. प्रत्येक पद का भावार्थ

पद 1 — फसलों का वर्णन (अरहर, सनई):

भावार्थ

इस पद में कवि ने खेतों में लटकती अरहर और सनई की पीली-सुनहरी फलियों का वर्णन किया है। ये फलियाँ सोने के समान चमकीली लग रही हैं। साथ ही झींगुरों (झिल्ली) की झनझनाहट वातावरण को संगीतमय बना रही है। यहाँ कवि ने प्रकृति को एक सजीव, गुनगुनाते संसार के रूप में प्रस्तुत किया है — फसलें चुप नहीं, वे गा रही हैं।

पद 2 — तीसी और सरसों के फूल:

भावार्थ

तीसी (अलसी) के नीले फूल और सरसों के पीले फूल खेतों में बिछे हैं। मटर की हरी फलियाँ लटकी हैं मानो हँस रही हों। कवि ने फसलों को जीवित मनुष्य की तरह प्रस्तुत किया है जो मुस्कुरा रहे हैं — यह प्रकृति के मानवीकरण का श्रेष्ठ उदाहरण है। तीन रंग (नीला, पीला, हरा) मिलकर प्रकृति का त्रिरंगी चित्र बनाते हैं।

पद 3 — पकती फसलें और खेतों की परिपक्वता:

भावार्थ

तिल, मूँग, उड़द की फलियाँ पक-पककर तैयार हो रही हैं। उनका रंग हरे से पीला और लाल हो रहा है। कवि ने यहाँ परिपक्वता को सौंदर्य के रूप में देखा है — जैसे जीवन में परिपक्वता आने पर इंसान और निखरता है, वैसे ही फसलें पकने पर और सुंदर लगती हैं। यह फसलों का "श्रम-श्रृंगार" है।

पद 4 — आम का बौर और बागों की सुगंध:

भावार्थ

शिशिर ऋतु में आम के पेड़ों पर मंजरी (बौर) आ गई है। उनकी मधुर सुगंध चारों ओर फैल रही है। अमरूद और बेर के पेड़ पके फलों से लदे हैं — ऐसे लग रहे हैं मानो पेड़ों ने रत्न-आभूषण पहन लिए हों। यहाँ रूपक अलंकार है — फल और रत्न का अभेद।

पद 5 — गंगा-तट की चमकीली बालू:

भावार्थ

गाँव के पास बहती गंगा का किनारा अत्यंत सुंदर है। रेत (बालू) धूप में सोने-सी चमक रही है। तट पर खरबूजे और खीरे की बेलें फैली हैं। नदी का शांत, स्वच्छ जल गाँव की निश्छलता और पवित्रता का प्रतीक है। नदी को "चाँदी-सी" कहना उपमा का उदाहरण है।

पद 6 — पशु-पक्षियों का कलरव:

भावार्थ

हरे खेतों और मैदानों में गाय-बैल चर रहे हैं। आम पर कोयल की मधुर कूक सुनाई दे रही है। तोते फलियाँ चुग रहे हैं, मोर वन में नृत्य कर रहे हैं। इस पशु-पक्षी-वर्णन से गाँव की जैव-विविधता और प्राकृतिक समृद्धि स्पष्ट होती है। कोयल की कूक आनंद का, मोर का नृत्य उत्सव का प्रतीक है।

पद 7 — प्रभात और संध्या के दृश्य:

भावार्थ

सुबह सूरज की पहली किरणें जब ओस से भीगी पत्तियों पर पड़ती हैं तो वे हीरे की तरह चमकती हैं। शाम के समय लाल-नारंगी आकाश की पृष्ठभूमि में गाँव का दृश्य अत्यंत मनोहर लगता है। ओस की बूँदों को "हीरे-से" कहना उपमा का उदाहरण है। प्रभात और संध्या दोनों दृश्य मिलकर दिन की पूर्ण सुंदरता प्रकट करते हैं।

पद 8 — ग्रामीण सौंदर्य का उपसंहार:

भावार्थ

कविता के अंत में कवि कहते हैं कि यह ग्रामीण प्रकृति की सम्पदा अनमोल है। मिट्टी की सोंधी सुगंध, फसलों का लहराना, पक्षियों का कलरव — यही भारत का असली सौंदर्य है। कवि का निष्कर्ष है कि नगरीय चकाचौंध से दूर, गाँव की सादगी में ही जीवन का सच्चा आनंद है।

4. मुख्य विषय — ग्रामीण जीवन और प्रकृति सौंदर्य

(क) ग्रामीण भारत की समृद्धि: कविता में गाँव के खेत, नदी-तालाब, बाग, पशु-पक्षी, फसलें — सब मिलकर एक समृद्ध और आत्मनिर्भर जीवन का चित्र बनाते हैं। पंत जी का मानना है कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है।

(ख) प्रकृति और मनुष्य का सह-अस्तित्व: खेतों में काम करता किसान और लहलहाती फसलें मिलकर जीवन की एक सुंदर तस्वीर बनाते हैं। फसलें किसान के परिश्रम का फल हैं — कवि ने इसे "श्रम-श्रृंगार" कहकर श्रम को गौरवान्वित किया है।

(ग) प्रकृति की चक्रीयता: सुबह से शाम तक, बुआई से कटाई तक — कवि ने प्रकृति के चक्र को बड़ी सुंदरता से दर्शाया है। यह चक्रीयता ही जीवन की स्थायिता का आधार है।

(घ) आधुनिकता बनाम प्रकृति: पंत जी परोक्ष रूप से यह संदेश देते हैं कि नगरीय आधुनिकता के बावजूद, गाँव की जड़ें ही भारतीय संस्कृति की असली पहचान हैं। प्रकृति से कटना मनुष्य की सबसे बड़ी हानि है।

(ङ) प्रकृति में आध्यात्मिकता: छायावादी दृष्टि से पंत जी प्रकृति में परमात्मा की झलक देखते हैं। हरियाली, सुगंध, प्रकाश — ये सब ईश्वरीय सौंदर्य के प्रतीक हैं।

5. प्रकृति का मानवीकरण

मानवीकरण (Personification) वह काव्य-शैली है जिसमें प्राकृतिक वस्तुओं, पशु-पक्षियों या निर्जीव चीजों को मनुष्य के गुण, भाव या क्रियाएँ दी जाती हैं।

"ग्राम श्री" में मानवीकरण के प्रमुख उदाहरण:

  • फसलों का हँसना: मटर की फलियाँ "हँसती-सी" प्रतीत होती हैं — फलियों को भावना दी गई है।
  • खेतों का मुस्कुराना: फसलें हवा में लहराती हैं मानो प्रसन्न होकर मुस्कुरा रही हों।
  • फूलों का झूमना: सरसों, तीसी के फूल हवा में झूमते हैं — मानो नृत्य कर रहे हों।
  • प्रकृति का जागना: भोर में सूरज के उगने के साथ प्रकृति "जाग उठती" है।
  • धरती का श्रृंगार: फूल-फसलें धरती के आभूषण हैं, जैसे कोई नायिका गहने पहनती है।
  • पेड़ों का आभूषण: पके फल पेड़ों के "रत्न-आभूषण" हैं — पेड़ को मनुष्य का रूप मिला।

मानवीकरण का महत्त्व: इस अलंकार के कारण प्रकृति का वर्णन प्राणवान हो जाता है। पाठक प्रकृति से सिर्फ देखकर नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़ता है। यही छायावादी काव्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

6. अलंकार — विस्तृत विवेचन

(क) उपमा अलंकार — जब किसी वस्तु की तुलना किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु से "जैसे / सा / सी / के समान" आदि शब्दों से की जाए:

  • "सोने की कंकरियाँ" — अरहर-सनई की फलियाँ सोने के समान पीली और चमकीली हैं।
  • "चाँदी-सी नदी" — नदी का जल चाँदी जैसा चमकदार है।
  • "हीरे-से ओस के कण" — ओस की बूँदें सूरज की रोशनी में हीरे की तरह चमकती हैं।
  • "मखमली घास" — घास की कोमलता मखमल जैसी है।

(ख) रूपक अलंकार — जब उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप हो (बिना "जैसा/सा" के):

  • "हरित वसुधा" — धरती हरियाली का वस्त्र पहने है; धरती और हरियाली का अभेद।
  • "प्रकृति का श्रृंगार" — फूल और फसलें धरती के गहने हैं।
  • "रत्न-आभूषण" — फल और रत्न एक हो गए हैं।

(ग) अनुप्रास अलंकार — एक ही वर्ण की आवृत्ति से संगीतात्मक प्रभाव:

  • "नई ोने की" — 'स' वर्ण की आवृत्ति।
  • "ोयल ूकती रती" — 'क' की आवृत्ति।
  • "रियाली वा में िलती" — 'ह' की आवृत्ति।
  • "सलें लती ूलती" — 'फ' की आवृत्ति।

(घ) मानवीकरण — (विस्तार खंड 5 में देखें।)

(ङ) पुनरुक्ति प्रकाश: "पक-पककर", "लहर-लहर", "धीरे-धीरे" — शब्द की द्विरुक्ति से प्रभाव को तीव्र किया गया है।

(च) चित्रात्मकता (बिंब-योजना):

  • दृश्य-बिंब (Visual): हरे खेत, पीली सरसों, नीली तीसी — आँखों के सामने चित्र।
  • श्रव्य-बिंब (Auditory): कोयल की कूक, पक्षियों का कलरव, झींगुर की आवाज़।
  • घ्राण-बिंब (Olfactory): आम के बौर की सुगंध, मिट्टी की सोंधी महक।
  • स्पर्श-बिंब (Tactile): मखमली घास, ओस की शीतल बूँदें।

इन चारों प्रकार के बिंबों का प्रयोग "ग्राम श्री" को हिंदी की सर्वश्रेष्ठ प्रकृति-कविताओं में स्थान दिलाता है।

7. शब्द-अर्थ (कठिन शब्दों के अर्थ)

शब्द अर्थ
ग्राम श्रीगाँव की शोभा / गाँव की सम्पदा
अरहरएक दलहनी फसल (तुअर/पिजन पी)
सनईएक रेशेदार फसल, जिसके पीले फूल होते हैं
तीसी / अलसीनीले फूलों वाली तेलीय फसल
बौर / मंजरीआम के नए फूल जो बहार में आते हैं
कंकरियाँछोटी-छोटी फलियाँ
झिल्लीझींगुर — रात में आवाज करने वाला कीट
हरितहरा / हरियाली
वसुधाधरती / पृथ्वी
सोंधीमिट्टी की वह विशेष सुगंध जो वर्षा के बाद आती है
कलरवपक्षियों की मधुर चहचहाहट
प्रभातसुबह / भोर का समय
संध्याशाम का समय
मखमलीमखमल जैसा मुलायम और चिकना
बालूरेत / बारीक मिट्टी
शिशिरजाड़े की ऋतु (दिसंबर-जनवरी)
छायावादहिंदी काव्य की वह धारा जिसमें प्रकृति, रहस्य और सौंदर्य का सूक्ष्म चित्रण हो
श्रम-श्रृंगारमेहनत का सौंदर्य — किसान की मेहनत को गौरव देना

8. NCERT प्रश्नोत्तर (पाठ्यपुस्तक के प्रश्न)

प्रश्न 1. कवि ने गाँव की प्रकृति का वर्णन करने के लिए किन-किन दृश्यों को चुना है?

उत्तर

कवि ने गाँव की प्रकृति का वर्णन करने के लिए निम्नलिखित दृश्यों को चुना है —

  • खेतों में लहलहाती अरहर, सनई, तीसी, सरसों, मटर की रंग-बिरंगी फसलें और फूल।
  • बागों में आम का बौर, अमरूद और बेर के पके फलों से लदे पेड़।
  • गंगा के तट की चमकीली बालू और शांत, स्वच्छ जल।
  • चरते हुए पशु — गाय, बैल, भैंसें।
  • कोयल की कूक, तोतों का फलियाँ चुगना, मोर का नृत्य।
  • शिशिर की सुबह में ओस से भीगी हरियाली और धूप की किरणें।

इन विविध दृश्यों के माध्यम से कवि ने गाँव का एक सम्पूर्ण और जीवंत चित्र प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 2. "ग्राम श्री" शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

"ग्राम" का अर्थ है गाँव और "श्री" का अर्थ है शोभा, सम्पदा या सौंदर्य। इस प्रकार "ग्राम श्री" का अर्थ है — गाँव की शोभा

यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक है क्योंकि सम्पूर्ण कविता में कवि ने गाँव के हरे-भरे खेतों, रंग-बिरंगे फूलों, फलों से लदे बागों और गंगा के सुंदर तट का मनोहारी चित्रण किया है। कविता का हर दृश्य गाँव की प्राकृतिक समृद्धि और सौंदर्य को प्रकट करता है। अतः शीर्षक पूरी तरह उपयुक्त और सार्थक है।

प्रश्न 3. कविता में किस अलंकार का सर्वाधिक प्रयोग हुआ है और क्यों?

उत्तर

इस कविता में मानवीकरण और उपमा अलंकार का सर्वाधिक प्रयोग हुआ है।

मानवीकरण इसलिए — कवि प्रकृति को निर्जीव नहीं मानते। वे खेतों को मुस्कुराते, फूलों को हँसते और पेड़ों को आभूषण पहनते देखते हैं। इससे प्रकृति प्राणवान हो उठती है।

उपमा इसलिए — कवि प्रकृति की सुंदरता को पाठक तक पहुँचाने के लिए परिचित वस्तुओं (सोना, चाँदी, हीरा, मखमल) से तुलना करते हैं, जिससे चित्र स्पष्ट और प्रभावशाली हो जाता है।

प्रश्न 4. कविता में शिशिर ऋतु की सुबह का चित्रण किस प्रकार हुआ है?

उत्तर

कवि ने शिशिर ऋतु की सुहावनी सुबह का अत्यंत सजीव चित्रण किया है। इस ऋतु में हल्की ठंड रहती है और हर ओर ओस की बूँदें बिखरी रहती हैं। सूर्य की कोमल किरणें पड़ने पर ये बूँदें चाँदी और सोने-सी झिलमिला उठती हैं। मंद-मंद बहती हवा, पक्षियों का कलरव और फूलों की सुगंध मिलकर वातावरण को आनंदमय बना देते हैं। यह ऋतु फसल पकने और वसंत के आगमन का संकेत देती है।

प्रश्न 5. कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

उत्तर

"ग्राम श्री" का केंद्रीय भाव यह है कि भारतीय गाँव और उसकी प्रकृति में अतुलनीय सौंदर्य है। नगरीय जीवन की चमक-दमक से अधिक सुंदर है गाँव की हरियाली, सोंधी मिट्टी, लहलहाती फसलें और पक्षियों का कलरव। कवि का संदेश है कि मनुष्य को प्रकृति से प्रेम करना चाहिए और उसे नष्ट होने से बचाना चाहिए।

प्रश्न 6. सुमित्रानंदन पंत को "प्रकृति के सुकुमार कवि" क्यों कहा जाता है?

उत्तर

सुमित्रानंदन पंत को "प्रकृति के सुकुमार कवि" इसलिए कहा जाता है क्योंकि —

  • उनकी कविताओं में प्रकृति का वर्णन अत्यंत कोमल (सुकुमार) और सूक्ष्म है।
  • वे ओस की एक बूँद, भँवरे की गुनगुनाहट, पत्तों की सरसराहट तक को संवेदनशीलता से पकड़ते हैं।
  • उनकी भाषा में प्रकृति का वर्णन इतना मृदु और सुंदर है कि मन मुग्ध हो जाता है।
  • वे प्रकृति को केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक जीवंत, भावनाशील सत्ता मानते हैं।

9. काव्य-सौंदर्य के विशेष बिंदु (परीक्षोपयोगी)

  • भाषा: खड़ी बोली हिंदी, छायावादी लालित्य से युक्त — सरल, प्रवाहमयी और संगीतात्मक।
  • शैली: चित्रात्मक, प्रतीकात्मक, मानवीकरण-प्रधान।
  • छंद: मुक्त छंद — कविता किसी एक निश्चित छंद-विधान से बँधी नहीं है।
  • रस: शृंगार रस (प्रकृति की सुंदरता) और शांत रस (गाँव की निश्छल शांति) दोनों का मिश्रण।
  • बिंब: दृश्य, श्रव्य, घ्राण और स्पर्श — चारों प्रकार के बिंब उपस्थित।
  • गति: कविता की गति धीमी और प्रवाहमयी — जैसे खेतों में धीरे-धीरे बहती हवा।
  • ध्वनि: कोयल, पक्षी, झींगुर की आवाज़ें — श्रव्य बिंब भरपूर।
  • काल: शिशिर ऋतु — ओस, कोमल धूप, पकती फसलें, वसंत के आगमन का पूर्व-संकेत।
अभ्यास MCQ
1. "ग्राम श्री" कविता के कवि कौन हैं?
  1. जयशंकर प्रसाद
  2. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  3. सुमित्रानंदन पंत
  4. महादेवी वर्मा
उत्तर: (C) सुमित्रानंदन पंत — छायावाद के प्रमुख कवि।
2. सुमित्रानंदन पंत को किस उपाधि से जाना जाता है?
  1. कलाधर
  2. प्रकृति के सुकुमार कवि
  3. राष्ट्रकवि
  4. आधुनिकता के कवि
उत्तर: (B) "प्रकृति के सुकुमार कवि" — प्रकृति के कोमल और सूक्ष्म वर्णन के कारण।
3. "ग्राम श्री" कविता में मुख्यतः किसका वर्णन है?
  1. नगरीय जीवन का
  2. युद्ध का
  3. ग्रामीण प्रकृति का
  4. नदी-यात्रा का
उत्तर: (C) ग्रामीण प्रकृति का — खेत, फसल, नदी, पशु-पक्षी सभी का जीवंत वर्णन।
4. "सोने की कंकरियाँ" में कौन-सा अलंकार है?
  1. अनुप्रास
  2. उपमा
  3. रूपक
  4. यमक
उत्तर: (B) उपमा — फलियाँ सोने के समान पीली और चमकीली हैं।
5. "झिल्ली" शब्द का अर्थ है —
  1. तितली
  2. झींगुर
  3. मछली
  4. चिड़िया
उत्तर: (B) झींगुर — रात में आवाज करने वाला कीट।
6. पंत जी का जन्म किस स्थान पर हुआ था?
  1. वाराणसी
  2. इलाहाबाद
  3. कौसानी, अल्मोड़ा
  4. देहरादून
उत्तर: (C) कौसानी, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)।
7. "ग्राम श्री" कविता में "वसुधा" शब्द का अर्थ है —
  1. आकाश
  2. धरती
  3. नदी
  4. फसल
उत्तर: (B) धरती / पृथ्वी।
8. कविता में किस अलंकार का सर्वाधिक प्रयोग है?
  1. यमक
  2. श्लेष
  3. मानवीकरण
  4. अतिशयोक्ति
उत्तर: (C) मानवीकरण — खेतों का मुस्कुराना, फूलों का हँसना आदि।
9. "ग्राम श्री" कविता किस पाठ्यपुस्तक में है?
  1. स्पर्श
  2. क्षितिज-1
  3. कृतिका
  4. संचयन
उत्तर: (B) क्षितिज-1 — NCERT कक्षा 9 की हिंदी पाठ्यपुस्तक।
10. पंत जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस रचना पर मिला?
  1. पल्लव
  2. गुंजन
  3. चिदंबरा
  4. युगांत
उत्तर: (C) चिदंबरा — सन् 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार।
11. कविता में "कोयल की कूक" किसका प्रतीक है?
  1. दुःख का
  2. आनंद और वसंत का
  3. वर्षा के आगमन का
  4. रात का
उत्तर: (B) आनंद और वसंत का — कोयल की मधुर आवाज़ उत्सव और खुशी का प्रतीक है।
12. "ग्राम श्री" में किस ऋतु का वर्णन प्रमुख रूप से है?
  1. वसंत
  2. ग्रीष्म
  3. शिशिर
  4. वर्षा
उत्तर: (C) शिशिर ऋतु — ओस, कोमल धूप और पकती फसलों का मनोहर चित्रण।
Assertion-Reason (कथन-कारण)
कथन (A): पंत जी को "प्रकृति के सुकुमार कवि" कहते हैं।   कारण (R): उनकी कविताओं में प्रकृति का वर्णन कोमल, सूक्ष्म और सजीव है।
उत्तर: कथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
कथन (A): "ग्राम श्री" में मानवीकरण अलंकार है।   कारण (R): कवि ने खेतों, नदियों और प्रकृति को मानवीय गुण दिए हैं।
उत्तर: कथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
पूर्व-वर्ष प्रश्न (PYQ)
PYQ 1. "ग्राम श्री" कविता के आधार पर प्रकृति के किन्हीं दो सौंदर्य-चित्रों का वर्णन कीजिए। (CBSE, 2 अंक)
उत्तर: (i) खेतों का सौंदर्य: अरहर और सनई की सोने जैसी पीली-चमकीली फलियाँ लटकी हैं; सरसों के पीले और तीसी के नीले फूल खेतों को रंगों का संसार बनाते हैं — यह दृश्य आँखों को सुकून देता है। (ii) प्रभात का सौंदर्य: सूरज की पहली किरणें जब ओस से भीगी पत्तियों पर पड़ती हैं तो वे हीरे की तरह चमकती हैं — यह दृश्य अत्यंत मनोहर है।
PYQ 2. सुमित्रानंदन पंत का साहित्यिक परिचय लिखिए। (CBSE, 4 अंक)
उत्तर: पंत जी (1900-1977) हिंदी के छायावादी काव्य के चार स्तंभों में से एक हैं। जन्म अल्मोड़ा के कौसानी में हुआ। प्रमुख रचनाएँ — पल्लव, गुंजन, चिदंबरा। उन्हें साहित्य अकादमी, पद्मभूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार (1968) मिले। वे "प्रकृति के सुकुमार कवि" कहलाते हैं क्योंकि उनकी भाषा में प्रकृति का वर्णन अत्यंत कोमल और जीवंत है।
PYQ 3. "ग्राम श्री" कविता में प्रयुक्त किन्हीं दो अलंकारों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: (i) उपमा: "सोने की कंकरियाँ" — अरहर की फलियाँ सोने के समान पीली-चमकीली हैं। (ii) मानवीकरण: "मटर की फलियों का हँसना" — फलियों को मनुष्य की तरह हँसने की क्रिया दी गई है।
PYQ 4. "ग्राम श्री" कविता का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए। (CBSE, 2 अंक)
उत्तर: "ग्राम श्री" का केंद्रीय भाव यह है कि भारतीय गाँव की प्रकृति में अपार सौंदर्य है। लहलहाती फसलें, कलरव करते पक्षी, चाँदी-सी नदी, सोंधी मिट्टी — यही भारत की असली पहचान है। कवि हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति ही हमारी सबसे बड़ी संपदा है और हमें उससे जुड़े रहना चाहिए।
PYQ 5. प्रकृति के किन रूपों का वर्णन "ग्राम श्री" में हुआ है? किन्हीं तीन का उल्लेख कीजिए। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: (i) फसलें: अरहर, सनई, तीसी, सरसों, मटर आदि की विविध फसलें। (ii) जल-तत्त्व: गंगा-तट, बालू, ओस की बूँदें। (iii) पशु-पक्षी: गाय-बैल, कोयल, तोते, मोर — जैव-विविधता का सुंदर चित्रण।
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