बच्चे काम पर जा रहे हैं

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 13 of 16
बच्चे काम पर जा रहे हैं

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नज़र में
  • कविता: बच्चे काम पर जा रहे हैं — राजेश जोशी द्वारा रचित सामाजिक चेतना की कविता।
  • केन्द्रीय भाव: कोहरे भरी सुबह में छोटे-छोटे बच्चे काम पर निकल जाते हैं जबकि उनकी उम्र खेलने, पढ़ने और खिलौनों से जुड़ी होनी चाहिए।
  • मुख्य विषय: बाल श्रम, बचपन का अभाव, सामाजिक असमानता, व्यवस्था पर व्यंग्य।
  • काव्य शैली: मुक्त छंद, बोलचाल की भाषा, दोहराव का प्रभावी उपयोग।
  • परीक्षा महत्त्व: भावार्थ, प्रश्नोत्तर, MCQ — लगभग 5 अंक प्रतिवर्ष।
विस्तृत नोट्स

1. कवि परिचय — राजेश जोशी

पूरा नाम: राजेश जोशी। जन्म: सन् 1946, नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश।

राजेश जोशी हिन्दी के प्रमुख समकालीन कवियों में से एक हैं। उनकी कविताएँ सामाजिक विसंगतियों, आम आदमी के दुःख-दर्द और व्यवस्था की निर्ममता पर गहरी चोट करती हैं। वे कविता के साथ-साथ नाटक और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं।

प्रमुख रचनाएँ:

  • कविता संग्रह: एक दिन बोलेंगे पेड़, मिट्टी का चेहरा, नेपथ्य में हँसी, दो पंक्तियों के बीच।
  • नाटक: जादू जंगल, अच्छे आदमी, टोपी जलाओ।

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • कविता में सरल बोलचाल की भाषा का प्रयोग।
  • सामाजिक समस्याओं को प्रत्यक्ष और मार्मिक ढंग से उठाना।
  • बिम्ब योजना अत्यंत सशक्त — पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती है।
  • व्यंग्य और करुणा का अद्भुत समन्वय।

पुरस्कार एवं सम्मान: साहित्य अकादेमी पुरस्कार, शमशेर सम्मान, पहल सम्मान।

2. कविता — मूल पाठ

कोहरे से ढँकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं
सुबह सुबह

बच्चे काम पर जा रहे हैं
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह
भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह

काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?

क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदें
क्या दीमकों ने खा लिया है
सारी किताबों को
क्या काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरों के आँगन
खत्म हो गए हैं एकाएक

तो फिर बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं?

चाहिए तो यह कि बच्चे खेलते रहें
और इस दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक रहे

3. कविता का सम्पूर्ण भावार्थ

पहला भाग — कोहरे में बच्चे काम पर

कविता की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है जो हमारे आस-पास रोज़ घटित होता है, लेकिन जिसे हम देखते हुए भी अनदेखा कर देते हैं। कोहरे से ढकी हुई सड़क पर, सुबह-सुबह छोटे-छोटे बच्चे काम पर जा रहे हैं। कवि ने "कोहरे" का प्रयोग केवल मौसम के संदर्भ में नहीं किया, बल्कि यह कोहरा उस अँधेरे और अनिश्चितता का प्रतीक भी है जो इन बच्चों के जीवन को घेरे हुए है। "सुबह सुबह" शब्द की पुनरावृत्ति से एक उदासी और भारीपन का बोध होता है — यह दृश्य कोई एक दिन का नहीं, हर दिन का है।

दूसरा भाग — सबसे भयानक पंक्ति

कवि कहते हैं कि "बच्चे काम पर जा रहे हैं" — यह हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है। इसे महज़ एक विवरण (description) की तरह लिखना और पढ़ना अपने आप में एक अपराध है। इसे एक सवाल बनना चाहिए — "काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?" यह व्यंग्य उन लोगों पर है जो इस त्रासदी को स्वीकार कर लेते हैं, जो इसे सामान्य मान लेते हैं। कवि चाहते हैं कि समाज इस पर प्रश्न उठाए, बेचैन हो और विद्रोह करे।

तीसरा भाग — काल्पनिक प्रश्नों की झड़ी

कवि व्यंग्यात्मक ढंग से पूछते हैं — क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदें? क्या दीमकों ने सारी किताबें खा लीं? क्या काले पहाड़ के नीचे सारे खिलौने दब गए? क्या भूकंप ने स्कूलों (मदरसों) की इमारतें गिरा दीं? क्या सारे मैदान, बगीचे और घरों के आँगन खत्म हो गए? ये सभी प्रश्न काल्पनिक हैं — वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ। गेंदें हैं, किताबें हैं, खिलौने हैं, स्कूल हैं, मैदान हैं — फिर भी बच्चे काम पर जा रहे हैं। यही असली त्रासदी है। इन प्रश्नों के माध्यम से कवि यह स्थापित करता है कि बाल श्रम का कारण प्राकृतिक आपदा या संसाधनों का अभाव नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक असमानता और व्यवस्था की विफलता है।

चौथा भाग — कवि की कामना

कविता का अंतिम भाग एक सरल किन्तु मार्मिक इच्छा व्यक्त करता है — "चाहिए तो यह कि बच्चे खेलते रहें, और इस दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक रहे।" यह "चाहिए" शब्द बहुत महत्त्वपूर्ण है — यह स्थिति की विडम्बना को उजागर करता है। बच्चों का खेलना उनका अधिकार है, उनकी स्वाभाविक अवस्था है। लेकिन जब बच्चे काम पर जाते हैं तो इसका अर्थ है कि दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है।

4. प्रत्येक पंक्ति का विस्तृत अर्थ

काव्य-पंक्ति अर्थ एवं विशेषता
"कोहरे से ढँकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं / सुबह सुबह" ठंड-भरी, धुंधली सुबह में बच्चे काम पर निकल पड़े हैं। कोहरा = अंधकारमय भविष्य का प्रतीक। "सुबह सुबह" की पुनरावृत्ति — नित्य की त्रासदी का बोध।
"हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह" आज के युग में बाल श्रम सबसे बड़ी सामाजिक त्रासदी है — यह कवि की स्वीकारोक्ति और व्यथा है।
"भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना / लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह" इस तथ्य को सामान्य समझकर स्वीकार करना भयानक है। समाज को इस पर सवाल उठाना चाहिए — उदासीनता पर सीधा व्यंग्य।
"क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदें" गेंद = बचपन का खेल, मस्ती। व्यंग्यात्मक प्रश्न — गेंदें तो हैं, फिर भी बच्चे खेल नहीं रहे।
"क्या दीमकों ने खा लिया है सारी किताबों को" किताब = शिक्षा का प्रतीक। दीमक द्वारा किताब खाना = शिक्षा के अवसर नष्ट होना। वस्तुतः किताबें हैं, पर बच्चे उन तक नहीं पहुँच पाते।
"क्या काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं सारे खिलौने" काला पहाड़ = गरीबी, आर्थिक विपन्नता का प्रतीक जो बच्चों से खिलौने और खेल छीन लेता है।
"क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं / सारे मदरसों की इमारतें" मदरसा = विद्यालय, शिक्षा का स्थान। भूकंप = सामाजिक-आर्थिक उथल-पुथल का प्रतीक। स्कूल मौजूद हैं, पर बच्चे वहाँ नहीं जा पा रहे।
"क्या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरों के आँगन / खत्म हो गए हैं एकाएक" मैदान-बगीचे-आँगन = बच्चों के खेलने के स्थान। "एकाएक" से व्यंग्य — अचानक तो कुछ नहीं हुआ; सब मौजूद है, फिर भी बच्चे बेगार में हैं।
"तो फिर बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं?" यह प्रश्न ही कविता का मर्म है। सब साधन उपलब्ध हैं फिर भी बच्चे काम पर क्यों? — सामाजिक विफलता पर सीधी अँगुली।
"चाहिए तो यह कि बच्चे खेलते रहें / और इस दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक रहे" कवि की आकांक्षा — बच्चे खेलें, पढ़ें। यदि बच्चे काम पर जा रहे हैं तो दुनिया में सब कुछ ठीक नहीं है — यह कथन व्यवस्था पर सीधा आरोप है।

5. मुख्य विषय और संदेश

बाल श्रम (Child Labour)

कविता का प्राथमिक विषय बाल श्रम है। छोटे बच्चों से काम करवाना न केवल उनके शारीरिक विकास को रोकता है, बल्कि उन्हें शिक्षा, खेल और सामान्य बचपन से भी वंचित करता है। कवि इस समस्या को "हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति" कहकर इसकी गंभीरता को रेखांकित करते हैं।

बचपन का अभाव

बचपन सीखने, खेलने, सपने देखने और निश्चिंत रहने का समय है। जब बच्चे इस उम्र में काम पर जाते हैं तो उनका बचपन छिन जाता है। गेंद, किताब, खिलौने, मैदान, बगीचे — ये सब बचपन के प्रतीक हैं जिनसे ये बच्चे वंचित हैं।

सामाजिक असमानता

जहाँ एक ओर कुछ बच्चे स्कूल जाते हैं, खेलते हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब परिवारों के बच्चे मजदूरी करने को मजबूर हैं। यह आर्थिक असमानता और वर्ग-भेद की त्रासदी है।

व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न

कवि सरकार, समाज और प्रत्येक जागरूक नागरिक से पूछता है — यदि संसाधन हैं, स्कूल हैं, मैदान हैं, तो बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं? यह उन नीतियों की विफलता पर व्यंग्य है जो बाल श्रम को रोकने में असमर्थ रही हैं।

6. सामाजिक व्यंग्य — कविता की विशेष शक्ति

राजेश जोशी ने इस कविता में व्यंग्य को अपना सबसे धारदार हथियार बनाया है। कुछ प्रमुख व्यंग्य-बिन्दु:

  • विवरण बनाम सवाल: कवि कहते हैं कि इस तथ्य को विवरण की तरह लिखना भयानक है। आज समाज बाल श्रम को एक समस्या मानकर भी उसे 'सामान्य' स्वीकार कर लेता है — यही सबसे बड़ी विडंबना है।
  • काल्पनिक प्रश्नों का व्यंग्य: "क्या गेंदें अंतरिक्ष में गिर गईं?" — ये प्रश्न जानबूझकर हास्यास्पद हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाल श्रम का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है। यह महज़ सामाजिक अन्याय है।
  • "सब कुछ ठीक-ठाक रहे" का व्यंग्य: कविता का अंत बताता है कि यदि बच्चे काम पर जा रहे हैं तो स्पष्ट है कि दुनिया में सब ठीक नहीं है। यह उन लोगों पर व्यंग्य है जो कहते हैं "सब ठीक है" जबकि बच्चे मजदूरी कर रहे हैं।
  • पुनरावृत्ति का प्रभाव: "बच्चे काम पर जा रहे हैं" पंक्ति की पुनरावृत्ति एक जोर से थप्पड़ की तरह है — हर बार यह पंक्ति आती है, पाठक की संवेदना को झकझोरती है।

7. भाषा-शैली की विशेषताएँ

सरल बोलचाल की भाषा

कविता में कठिन शब्दों से परहेज़ किया गया है। "कोहरे से ढँकी सड़क", "सुबह सुबह", "काम पर जा रहे हैं" — ये सब आम बोलचाल के शब्द हैं जो कविता को सीधे पाठक के मन तक पहुँचाते हैं।

मुक्त छंद

कविता में कोई निश्चित छंद-योजना नहीं है। यह मुक्त छंद में लिखी गई है जो कवि को अपनी बात बिना बंधन के कहने की स्वतंत्रता देता है। इससे कविता का स्वर अधिक स्वाभाविक और प्रवाहमान लगता है।

पुनरावृत्ति (Repetition)

"बच्चे काम पर जा रहे हैं" — इस पंक्ति की तीन बार पुनरावृत्ति हुई है। यह तकनीक पाठक के मन में बेचैनी और उद्विग्नता उत्पन्न करती है। हर बार यह पंक्ति नए संदर्भ में आती है और नया प्रभाव उत्पन्न करती है।

प्रश्नात्मक शैली

कविता का मध्य भाग पूरी तरह प्रश्नों से भरा है। "क्या... क्या... क्या...?" — यह शैली पाठक को सोचने पर मजबूर करती है। प्रश्नों की यह झड़ी एक आंदोलन की तरह है।

बिम्ब योजना (Imagery)

  • दृश्य बिम्ब: कोहरे से ढँकी सड़क, काले पहाड़ — आँखों के सामने चित्र उपस्थित हो जाते हैं।
  • प्रतीक बिम्ब: गेंद = खेल, किताब = शिक्षा, खिलौना = बचपन, मैदान = स्वतंत्रता।
  • काला पहाड़: गरीबी और शोषण की शक्तियों का सशक्त प्रतीक।

व्यंग्यात्मक शैली

काल्पनिक और असंभव कारण गिनाकर कवि वास्तविक कारण को और भी उघाड़ता है। यह व्यंग्यात्मक विधि पाठक के मन में तीखा प्रभाव छोड़ती है।

करुण रस

पूरी कविता में एक गहरी करुणा और पीड़ा का स्वर है। बच्चों की दुर्दशा का चित्रण पाठक के हृदय को द्रवित कर देता है और सहानुभूति जगाता है।

8. शब्द-अर्थ (Word Meanings)

शब्द अर्थ
कोहराधुंध, कुहासा (fog / mist)
ढँकीढकी हुई (covered)
भयानकडरावना, भयंकर (terrible / dreadful)
विवरणब्यौरा (description)
अंतरिक्षआकाश, ब्रह्मांड (outer space)
दीमकलकड़ी खाने वाला कीड़ा (termite)
मदरसाविद्यालय, पाठशाला (school)
भूकंपधरती का काँपना (earthquake)
ढह गईगिर गई, ध्वस्त हो गई (collapsed)
एकाएकअचानक, तुरंत (suddenly)
आँगनघर का खुला हिस्सा (courtyard)
ठीक-ठाकसब सही, व्यवस्थित (all right, fine)

9. NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़कर आपके मन में कौन-सा चित्र उभरता है?

उत्तर: "कोहरे से ढँकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं / सुबह सुबह" — इन पंक्तियों को पढ़कर मन में एक मार्मिक और करुणामय चित्र उभरता है। सर्दी की धुंध भरी सुबह में नन्हे-नन्हे बच्चे जो ठंड से काँप रहे हैं, मैले-कुचैले कपड़े पहने, थके-हारे चेहरे लिए, काम की तलाश में निकले हैं। इनके छोटे-छोटे हाथ जो किताब और खिलौने पकड़ने के लिए बने हैं, आज औजार थामे हुए हैं। यह दृश्य हृदय को द्रवित करता है और सामाजिक असमानता की पीड़ा को महसूस कराता है।

प्रश्न 2. कविता में कवि ने जिन काल्पनिक प्रश्नों की सृष्टि की है, उनकी भूमिका क्या है?

उत्तर: कवि ने एक के बाद एक काल्पनिक प्रश्न पूछे हैं — क्या गेंदें अंतरिक्ष में गिर गईं, क्या दीमकों ने किताबें खा लीं, क्या खिलौने पहाड़ के नीचे दब गए, क्या स्कूल भूकंप में ढह गए, क्या मैदान-बगीचे खत्म हो गए? ये प्रश्न इसलिए काल्पनिक हैं क्योंकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इन प्रश्नों की भूमिका यह है कि ये पाठक को यह सोचने पर विवश करते हैं कि जब सब कुछ मौजूद है — खेलने के स्थान, खिलौने, किताबें, स्कूल — तो बच्चे काम पर क्यों जा रहे हैं? इस तरह कवि व्यंग्यात्मक तरीके से बाल श्रम की जड़ में मौजूद सामाजिक-आर्थिक असमानता और व्यवस्था की विफलता को उजागर करते हैं।

प्रश्न 3. कविता में "काला पहाड़" किसका प्रतीक है?

उत्तर: "काला पहाड़" गरीबी, शोषण, आर्थिक विपन्नता और सामाजिक अन्याय का प्रतीक है। जिस प्रकार एक विशाल काला पहाड़ सूर्य के प्रकाश को रोक देता है, उसी प्रकार गरीबी और सामाजिक असमानता की ये ताकतें बच्चों से उनके खिलौने, खेल, शिक्षा और उज्जवल भविष्य छीन लेती हैं। यह बिम्ब बेहद सशक्त है और बच्चों पर पड़ने वाले आर्थिक-सामाजिक बोझ को दृश्यात्मक रूप में प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 4. कवि ने इस कविता में 'मदरसा' शब्द का प्रयोग क्यों किया?

उत्तर: 'मदरसा' अरबी मूल का शब्द है जिसका अर्थ है विद्यालय या पाठशाला। कवि ने यह शब्द यह दर्शाने के लिए प्रयोग किया है कि बाल श्रम की समस्या किसी एक धर्म, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। यह समस्या सार्वभौमिक है। साथ ही, 'मदरसा' शब्द हिन्दी-उर्दू मिश्रित भाषा की उस परंपरा का हिस्सा है जो कवि की भाषाई विशेषता है — जनसामान्य की बोलचाल की भाषा।

प्रश्न 5. "भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना" — इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि "बच्चे काम पर जा रहे हैं" — यह वाक्य यदि हम सामान्य तथ्य (विवरण) की तरह पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं तो यह हमारी उदासीनता और संवेदनहीनता का प्रमाण है। यह स्थिति इतनी भयावह है कि इसे एक तथ्य की तरह स्वीकार करना अपने आप में एक अपराध है। इसे सवाल की तरह देखना चाहिए — यह क्यों हो रहा है, इसे कैसे रोका जाए? कवि समाज की उस मानसिकता पर चोट कर रहे हैं जो त्रासदी को स्वाभाविक मान लेती है।

प्रश्न 6. कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

उत्तर: इस कविता का केंद्रीय भाव बाल श्रम की त्रासदी और बचपन के अभाव पर गहरी व्यथा व्यक्त करना है। कवि यह स्थापित करना चाहते हैं कि बच्चों का खेलना, पढ़ना और खुश रहना उनका मौलिक अधिकार है। जब बच्चे यह अधिकार नहीं पा पाते और काम पर जाते हैं, तो इसका अर्थ है कि समाज और व्यवस्था में कुछ मूलभूत गलत है। कवि केवल समस्या का चित्रण नहीं करते, बल्कि समाज को जगाने और प्रश्न उठाने का आह्वान भी करते हैं।

प्रश्न 7. कविता में "सुबह सुबह" शब्द की पुनरावृत्ति क्या प्रभाव उत्पन्न करती है?

उत्तर: "सुबह सुबह" की पुनरावृत्ति यह बताती है कि यह घटना किसी एक दिन की नहीं, बल्कि प्रतिदिन की है। हर सुबह ये बच्चे बिना किसी बदलाव के काम पर निकल जाते हैं। यह पुनरावृत्ति एक गहरी उदासी और निराशा का भाव जगाती है — जैसे स्थिति बदलने की कोई उम्मीद नहीं। साथ ही यह सुबह के ताजगी और उमंग से भरे होने की स्वाभाविक अपेक्षा को तोड़ती है — इन बच्चों की सुबह ताजगी नहीं, बोझ लेकर आती है।

10. काव्य-सौन्दर्य के बिन्दु (परीक्षा के लिए)

  • अनुप्रास / पुनरुक्ति: "सुबह सुबह", "सारी-सारी-सारे-सारे" — एक ही शब्द की आवृत्ति से भाव की तीव्रता।
  • प्रतीक (Symbol): कोहरा = अंधकार, काला पहाड़ = गरीबी, गेंद = खेल-बचपन, किताब = शिक्षा, मदरसा = ज्ञान।
  • व्यंग्य (Satire/Irony): काल्पनिक प्रश्नों के माध्यम से समाज और व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य।
  • अनाफोरा (Anaphora): "क्या... क्या... क्या..." — एक ही शब्द से अनेक पंक्तियाँ शुरू होना।
  • करुण रस: पूरी कविता में करुणा और पीड़ा का स्वर है।
  • मुक्त छंद: कविता में निश्चित तुकबंदी या मात्राएँ नहीं — विषय की गंभीरता के अनुकूल।
  • बिम्ब विधान: दृश्य और प्रतीक बिम्बों का सशक्त प्रयोग — पाठक के मन में चित्र उभरते हैं।
  • भाषा: तत्सम-तद्भव-उर्दू मिश्रित, सरल, बोधगम्य।
अभ्यास MCQ
1. "बच्चे काम पर जा रहे हैं" कविता के रचयिता कौन हैं?
  1. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
  2. राजेश जोशी
  3. मैथिलीशरण गुप्त
  4. रामधारी सिंह 'दिनकर'
उत्तर: (B) राजेश जोशी — ये मध्यप्रदेश के समकालीन कवि हैं।
2. कविता में "कोहरा" किसका प्रतीक है?
  1. सर्दी के मौसम का
  2. सुबह की ताजगी का
  3. बच्चों के अंधकारमय जीवन और अनिश्चितता का
  4. सड़क की सुन्दरता का
उत्तर: (C) कोहरा यहाँ बच्चों के जीवन में व्याप्त अंधकार और अनिश्चितता का प्रतीक है।
3. कवि के अनुसार "हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति" कौन-सी है?
  1. कोहरे से ढँकी सड़क पर
  2. बच्चे काम पर जा रहे हैं
  3. सारे मैदान खत्म हो गए
  4. दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक रहे
उत्तर: (B) "बच्चे काम पर जा रहे हैं" — कवि इसे हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति कहते हैं।
4. "काला पहाड़" किसका प्रतीक है?
  1. एक वास्तविक पर्वत का
  2. प्रकृति की शक्ति का
  3. गरीबी और सामाजिक-आर्थिक शोषण का
  4. बच्चों की जिज्ञासा का
उत्तर: (C) काला पहाड़ गरीबी, शोषण और आर्थिक विपन्नता का प्रतीक है।
5. कवि का मानना है कि बाल-श्रम की घटना को लिखा जाना चाहिए:
  1. विवरण की तरह
  2. कहानी की तरह
  3. सवाल की तरह
  4. शिकायत की तरह
उत्तर: (C) कवि कहते हैं — "लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह" — ताकि समाज इस पर प्रश्न उठाए।
6. "दीमकों ने खा लिया है सारी किताबों को" पंक्ति में दीमक किसका प्रतीक है?
  1. पुस्तकों को नष्ट करने वाले कीड़े का
  2. शिक्षा के अवसर नष्ट करने वाली परिस्थितियों का
  3. बुरी संगति का
  4. आलस्य का
उत्तर: (B) दीमक उन परिस्थितियों का प्रतीक है जो बच्चों से शिक्षा के अवसर छीन लेती हैं।
7. कवि राजेश जोशी का जन्म किस राज्य में हुआ था?
  1. उत्तर प्रदेश
  2. राजस्थान
  3. मध्यप्रदेश
  4. बिहार
उत्तर: (C) राजेश जोशी का जन्म नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश में हुआ था।
8. "सुबह सुबह" में कौन-सा अलंकार है?
  1. उपमा
  2. रूपक
  3. पुनरुक्ति अलंकार
  4. मानवीकरण
उत्तर: (C) "सुबह सुबह" में पुनरुक्ति (पुनरावृत्ति) अलंकार है जो भाव की तीव्रता बढ़ाता है।
9. कविता में "मदरसा" शब्द का अर्थ है:
  1. मस्जिद
  2. विद्यालय / पाठशाला
  3. बाजार
  4. घर
उत्तर: (B) मदरसा = विद्यालय, पाठशाला। यह अरबी मूल का शब्द है।
10. "चाहिए तो यह कि बच्चे खेलते रहें" से कवि का क्या आशय है?
  1. बच्चों को पढ़ाई छोड़ देनी चाहिए
  2. बच्चों का खेलना उनका स्वाभाविक अधिकार है
  3. खेल सबसे जरूरी काम है
  4. बच्चों को घर पर रहना चाहिए
उत्तर: (B) कवि का आशय है कि खेलना बच्चों का स्वाभाविक अधिकार है; यदि वे काम पर जाते हैं तो दुनिया में कुछ गलत है।
11. "क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदें" — इस पंक्ति में कवि ने किस शैली का प्रयोग किया है?
  1. वर्णनात्मक
  2. भावात्मक
  3. व्यंग्यात्मक-प्रश्नात्मक
  4. उपदेशात्मक
उत्तर: (C) कवि ने व्यंग्यात्मक-प्रश्नात्मक शैली का प्रयोग किया है — काल्पनिक प्रश्न पूछकर वास्तविक विडंबना उजागर की है।
12. इस कविता में मुख्य रूप से कौन-सा रस है?
  1. वीर रस
  2. श्रृंगार रस
  3. करुण रस
  4. हास्य रस
उत्तर: (C) करुण रस — बच्चों की पीड़ा और बचपन के अभाव का चित्रण करुण रस उत्पन्न करता है।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)
PYQ 1. "बच्चे काम पर जा रहे हैं" कविता में कवि ने किस सामाजिक समस्या पर प्रकाश डाला है? विस्तार से समझाइए। (5 अंक, CBSE Board)
उत्तर-संकेत: कवि राजेश जोशी ने इस कविता में बाल श्रम की गहरी समस्या पर प्रकाश डाला है। मुख्य बिन्दु: (1) कोहरे में काम पर जाते बच्चे — दैनिक त्रासदी का चित्रण। (2) "हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति" — समस्या की गंभीरता। (3) काल्पनिक प्रश्न — व्यवस्था की विफलता उजागर करना। (4) बचपन का अधिकार छिन जाना — खेल, शिक्षा, खिलौने से वंचित होना। (5) अंत में कवि की आकांक्षा — बच्चे खेलें, दुनिया ठीक रहे।
PYQ 2. "काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?" — इस प्रश्न के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं? (3 अंक)
उत्तर: यह प्रश्न पूरी कविता का मर्म है। कवि यह कहना चाहते हैं कि बाल श्रम को 'सामान्य' मानकर स्वीकार कर लेना सबसे बड़ा सामाजिक अपराध है। इस प्रश्न के माध्यम से वे समाज, सरकार और हर नागरिक को चुनौती देते हैं — जब स्कूल हैं, मैदान हैं, खिलौने हैं, किताबें हैं, तो बच्चे काम पर क्यों? इसका उत्तर है — गरीबी, शोषण और सामाजिक असमानता। यह प्रश्न एक आंदोलन का आह्वान है।
PYQ 3. कविता में प्रयुक्त किन्हीं दो प्रतीकों की व्याख्या कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: (1) कोहरा — सर्दी की धुंध के साथ-साथ यह बाल मजदूरों के जीवन में व्याप्त अंधकार, अनिश्चितता और निराशा का प्रतीक है। (2) काला पहाड़ — गरीबी, सामाजिक-आर्थिक शोषण और उन ताकतों का प्रतीक है जो बच्चों से उनके खिलौने, खेल और शिक्षा छीन लेती हैं। जिस प्रकार काला पहाड़ प्रकाश को रोकता है, उसी प्रकार गरीबी बच्चों के उज्जवल भविष्य को रोकती है।
PYQ 4. "चाहिए तो यह कि बच्चे खेलते रहें / और इस दुनिया में सब कुछ ठीक-ठाक रहे" — इन पंक्तियों का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि की गहरी मानवीय आकांक्षा व्यक्त हुई है। "चाहिए" शब्द यह स्पष्ट करता है कि बच्चों का खेलना उनका स्वाभाविक और मौलिक अधिकार है। "सब कुछ ठीक-ठाक रहे" में एक व्यंग्यात्मक संकेत है — यदि बच्चे काम पर जा रहे हैं तो दुनिया में सब ठीक नहीं है। यहाँ करुणा और व्यंग्य का अद्भुत समन्वय है। कवि एक साथ बच्चों के प्रति दया और व्यवस्था के प्रति रोष व्यक्त करते हैं। यह पंक्ति पाठक के मन में एक गहरी बेचैनी छोड़ती है।
PYQ 5. कवि राजेश जोशी की किसी एक काव्यगत विशेषता का उल्लेख करते हुए इस कविता में उसके प्रयोग को स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: राजेश जोशी की प्रमुख काव्यगत विशेषता है — व्यंग्यात्मक शैली में सामाजिक प्रश्न उठाना। इस कविता में वे काल्पनिक और असंभव प्रश्नों की झड़ी लगाते हैं ("क्या गेंदें अंतरिक्ष में गिर गईं?", "क्या दीमकों ने किताबें खा लीं?") जो वास्तव में हास्यास्पद हैं, लेकिन इनके माध्यम से वे यह सिद्ध करते हैं कि बाल श्रम का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है — यह केवल सामाजिक अन्याय और व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। इस व्यंग्यात्मक शैली से कविता में एक तीखापन आता है जो पाठक को झकझोर देता है।
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