इस जल प्रलय में

www.akankshaclasses.com
CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 14 of 16
इस जल प्रलय में

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

सार एक नज़र में
  • विधा: यह पाठ एक रिपोर्ताज (Reportage) है — पत्रकारिता और साहित्य का अनूठा मिश्रण, जिसमें आँखों देखी घटना को साहित्यिक भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
  • लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु — हिंदी के सुप्रसिद्ध आंचलिक कथाकार; इनकी रचना 'मैला आँचल' हिंदी का प्रथम आंचलिक उपन्यास माना जाता है।
  • विषय: सन् 1975 में बिहार में आई भीषण बाढ़ — पटना नगर में जल-प्रलय का आँखों देखा विवरण और ग्रामीण जन-जीवन पर बाढ़ का कहर।
  • लेखक स्वयं बीमार और अस्वस्थ हैं, फिर भी बाढ़ के दृश्यों को देखते हैं, महसूस करते हैं और उन्हें शब्दों में पिरोते हैं।
  • पाठ में मानवीय संवेदना, प्राकृतिक आपदा की विभीषिका, पशु-पक्षियों की दयनीय दशा और ग्रामीण जीवन का मार्मिक चित्रण है।
  • बोर्ड महत्त्व: लगभग 5 अंक प्रतिवर्ष — रिपोर्ताज की विशेषताएँ, सारांश, भाव-प्रश्न तथा MCQ।
विस्तृत नोट्स

1. लेखक-परिचय — फणीश्वरनाथ रेणु

जन्म: फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गाँव में हुआ था। उनका निधन 11 अप्रैल 1977 को हुआ।

शिक्षा एवं जीवन: रेणु जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अररिया और फिर नेपाल में प्राप्त की। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। बाद में नेपाल में राणाशाही के विरुद्ध भी संघर्ष किया। सन् 1974-75 में जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से भी जुड़े और विरोध में पद्मश्री सम्मान लौटा दिया।

प्रमुख रचनाएँ:

  • उपन्यास: मैला आँचल (1954) — हिंदी का प्रथम आंचलिक उपन्यास; परती परिकथा, जुलूस, दीर्घतपा, कितने चौराहे।
  • कहानी-संग्रह: ठुमरी, अग्निखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप।
  • रिपोर्ताज: नेपाली क्रांति कथा, ऋणजल धनजल, वन-तुलसी की गंध, श्रुत अश्रुत पूर्वे।

साहित्यिक विशेषताएँ: रेणु को आंचलिक कथा-साहित्य का जनक माना जाता है। उनकी रचनाओं में बिहार के ग्रामीण अंचल की मिट्टी की सोंधी खुशबू है। उन्होंने लोकगीत, लोकभाषा, लोकरंग, लोकसंस्कृति और लोकजीवन को अपनी रचनाओं में बड़े कलात्मक ढंग से उतारा। उनकी भाषा में मैथिली, भोजपुरी, हिंदी का मनोरम मिश्रण मिलता है। रेणु का उपन्यास 'मैला आँचल' 1954 में प्रकाशित हुआ और इस पर आधारित फिल्म 'तीसरी कसम' भी बनी जिसमें राजकपूर और वहीदा रहमान ने अभिनय किया।

2. सारांश — इस जल प्रलय में

पृष्ठभूमि: यह रिपोर्ताज सन् 1975 में बिहार में आई भयंकर बाढ़ पर लिखा गया है। उस वर्ष बिहार में भीषण वर्षा के कारण नदियाँ उफान पर थीं और हर तरफ जल-प्रलय की स्थिति थी। लेखक फणीश्वरनाथ रेणु उस समय बीमार थे, पर आपदा की विकटता देखकर वे भी मौन नहीं रह सके।

बाढ़ की पूर्वसूचना और तैयारी: जब रेडियो पर खबर आई कि पटना में बाढ़ आने वाली है, तो लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लेखक बीमार होने के बावजूद पड़ोसियों की हलचल देखते हैं। लोग अपना सामान ऊपर उठाने, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित करने में लग जाते हैं। मकान-मालकिन, मकान-मालिक और आस-पड़ोस के लोग सब मिलकर जल-प्रकोप से बचने की कोशिश करते हैं। रेणु जी खिड़की और छत से यह सब देखते हैं — एक जागरूक और संवेदनशील पर्यवेक्षक की तरह।

पटना में बाढ़ का प्रवेश: धीरे-धीरे पानी सड़कों पर फैलने लगा। पटना नगर, जो एक आधुनिक शहर है, में भी जल-प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गई। गलियों में घुटने-घुटने और कमर-कमर तक पानी भर गया। कुछ ही घंटों में स्थिति भयावह हो गई। सड़कें और गलियाँ नदी-नालों में बदल गईं। आटो-रिक्शा और साइकिलें पानी में डूब गईं। लोग घरों में बंद हो गए और छतों पर चले गए।

लेखक का निजी अनुभव: लेखक बीमार हैं — उनके पैर में तकलीफ है और वे ठीक से चल-फिर नहीं सकते। मित्र और सहयोगी उनकी मदद करते हैं। पर लेखक का मन एक सच्चे पत्रकार और संवेदनशील साहित्यकार का मन है — वे आपदा को महसूस करते हैं, उसे अपने भीतर उतारते हैं। वे नाव में बैठकर बाढ़ग्रस्त इलाकों का भ्रमण करते हैं और वहाँ के दृश्यों का सजीव चित्रण करते हैं। उनकी नजर हर दृश्य को देखती है, हर इंसान की पीड़ा को महसूस करती है।

भूखे-प्यासे लोग: बाढ़ में सबसे अधिक कष्ट में थे — मकानों की छतों और ऊँचे चबूतरों पर फँसे आम नागरिक। कई लोग बिना खाने-पानी के घंटों, दिनों तक छतों पर बैठे रहे। भूख और प्यास से बच्चे-बूढ़े, सब बेहाल थे। राहत-नावें आती थीं पर भीड़ इतनी अधिक थी कि सबको मदद नहीं मिल पाती थी। कुछ लोग ऊपर से खाना-पानी माँगते थे, कुछ हाथ हिलाते थे — इन दृश्यों ने लेखक का मन भर दिया।

पशु-पक्षियों की दयनीय दशा: लेखक ने देखा कि बाढ़ में न केवल मनुष्य, बल्कि जानवर भी बेहाल थे। गाय, बकरी, कुत्ते, बिल्लियाँ, साँप — सब बाढ़ के पानी में इधर-उधर भटक रहे थे। पशु और मनुष्य, शत्रु-मित्र सब एक साथ किसी ऊँची जगह पर शरण लेने को मजबूर थे। साँप जैसे जहरीले जीव भी पानी में बहे आ रहे थे। लेखक इस दृश्य को देखकर स्तब्ध रह जाते हैं — प्रकृति के सामने सब एक समान हैं। बाढ़ ने मनुष्य और पशु के बीच की सारी दूरियाँ मिटा दी थीं।

ग्रामीण जीवन पर बाढ़ का कहर: पटना नगर के साथ-साथ आस-पास के गाँवों में तो स्थिति और भी भयावह थी। खेत-खलिहान, घर-द्वार, पशु — सब बाढ़ में समा गए। फसलें नष्ट हो गईं, मकान गिर गए, संचित अनाज सड़ गया। ग्रामीण लोग बेसहारा हो गए। वर्षों की मेहनत पल भर में पानी में बह गई। किसान, जो पहले से ही संघर्षरत थे, इस बाढ़ ने उन्हें और तोड़ दिया। सरकारी राहत की कमी और जन-साधारण की बेबसी का लेखक ने मार्मिक चित्र खींचा है।

राहत और बचाव कार्य: सेना, पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों ने राहत-कार्य किया। नावों के द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया। लेकिन आपदा इतनी बड़ी थी कि राहत-कार्य अपर्याप्त लगता था। लेखक ने इस पूरे चित्रण में सरकारी व्यवस्था की कमियों की ओर भी परोक्ष रूप से संकेत किया है।

उपसंहार: बाढ़ धीरे-धीरे उतरने लगी। जब पानी घटा तो चारों ओर तबाही का मंजर था — गंदगी, कीचड़, टूटे मकान, मृत पशु। पर मनुष्य की जिजीविषा (जीने की इच्छा) अदम्य है — लोग फिर से जीवन को संवारने में जुट गए। रेणु का यह रिपोर्ताज बाढ़ की विभीषिका का दस्तावेज़ है, साथ ही यह मानवीय साहस और संवेदना का भी गवाह है।

3. प्रमुख प्रसंग

प्रसंग 1 — बाढ़ की पूर्व-सूचना: रेडियो पर बाढ़ आने की खबर सुनकर मुहल्ले में हड़कंप मच जाता है। मकान-मालकिन घबराई हुई हैं, पड़ोसी सामान ऊपर उठा रहे हैं। लेखक बीमार हैं और सब कुछ देख-सुन रहे हैं। यह प्रसंग आम आदमी की घबराहट और तैयारी को दर्शाता है।

प्रसंग 2 — नाव पर बाढ़-भ्रमण: लेखक नाव में बैठकर बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा करते हैं। सड़कें और गलियाँ नदी बन गई हैं। दुकानें, मकान, पेड़ — सब पानी में आधे डूबे हैं। नाव पर बैठे लेखक की आँखें हर दृश्य को अपने भीतर उतार रही हैं। यह प्रसंग रिपोर्ताज का केंद्रीय और सबसे जीवंत हिस्सा है।

प्रसंग 3 — साँपों का बाढ़ में आना: बाढ़ के पानी में साँप भी बह आए। कई साँप घरों में घुस गए। लोग उनसे डरे, पर साँप भी जीवन बचाने की जुगत में थे। यह दृश्य बहुत प्रतीकात्मक है — आपदा में इंसान और जानवर एक ही नाव में हैं।

प्रसंग 4 — छतों पर फँसे लोग: जो लोग समय पर नहीं निकल सके, वे अपनी छतों पर फँस गए। राहत-नावें आती थीं पर सबको साथ नहीं ले जा सकती थीं। बच्चे भूख से रो रहे थे, बुजुर्ग असहाय थे। लेखक इस दृश्य को देखकर विचलित हो उठते हैं।

प्रसंग 5 — बाढ़ उतरने के बाद: जब पानी घटा तो पूरी तरह तबाही का मंजर था। मकानों में कीचड़ भर गई, सामान सड़ गए, खेत बर्बाद हो गए। पर इस तबाही के बीच भी लोग नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने में जुटे थे — मानवीय अदम्य इच्छाशक्ति का यह दृश्य भावुक करने वाला है।

4. मुख्य विषय और संदेश

प्राकृतिक आपदा की विभीषिका: पाठ का केंद्रीय विषय 1975 की बिहार की भीषण बाढ़ और उससे उत्पन्न जल-प्रलय की विकरालता है। लेखक ने दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा किस तरह जन-जीवन को पल भर में तहस-नहस कर देती है। आधुनिक नगर हो या पिछड़ा गाँव — बाढ़ सब पर समान रूप से कहर बरपाती है।

मानवीय संवेदना: इस भयावह आपदा के बीच भी मानवीय संवेदना की जड़ें मजबूत रहती हैं। पड़ोसी एक-दूसरे की मदद करते हैं, अजनबी लोग भी एकजुट होते हैं। लेखक स्वयं बीमार होने पर भी आपदाग्रस्त लोगों के दर्द को महसूस करते हैं और उसे शब्द देते हैं।

सरकारी व्यवस्था पर सवाल: राहत-कार्य की अपर्याप्तता और सरकारी लापरवाही पर लेखक ने परोक्ष रूप से प्रश्न उठाया है। जब आपदा आती है तो सबसे अधिक कष्ट गरीब और कमजोर तबके को होता है।

पशु-मानव एकता: बाढ़ में साँप, कुत्ते, बिल्ली और मनुष्य एक साथ ऊँची जगहों पर शरण लेते हैं। प्रकृति की इस आपदा ने सभी प्राणियों को एक धरातल पर खड़ा कर दिया।

जिजीविषा और पुनर्निर्माण: बाढ़ उतरने के बाद लोग हार नहीं मानते — वे फिर से जीवन को पटरी पर लाते हैं। यह मानव-स्वभाव की अदम्य जिजीविषा का प्रमाण है।

5. रिपोर्ताज शैली — विशेषताएँ

रिपोर्ताज क्या है? रिपोर्ताज (Reportage) एक ऐसी गद्य-विधा है जो पत्रकारिता और साहित्य के बीच की कड़ी है। इसमें किसी वास्तविक घटना को — जो लेखक ने स्वयं देखी हो — साहित्यिक भाषा और कलात्मक शैली में प्रस्तुत किया जाता है। यह सूखी रिपोर्ट नहीं, बल्कि जीती-जागती आँखों देखी कहानी है। हिंदी में रिपोर्ताज विधा का प्रारंभ शिवदान सिंह चौहान से माना जाता है, पर रेणु ने इसे नई ऊँचाई दी।

रिपोर्ताज की प्रमुख विशेषताएँ:

  • प्रत्यक्षदर्शी वर्णन: लेखक स्वयं घटना का हिस्सा होता है या उसे प्रत्यक्ष देखता है। 'इस जल प्रलय में' में रेणु स्वयं बाढ़ग्रस्त पटना में हैं।
  • तथ्य और भावना का मेल: रिपोर्ताज में तथ्यात्मक सूचना के साथ-साथ लेखक की भावनात्मक प्रतिक्रिया भी होती है।
  • सजीव चित्रण: घटनाओं, स्थानों और व्यक्तियों का इतना जीवंत वर्णन कि पाठक खुद उस दृश्य में उपस्थित महसूस करे।
  • वर्तमान काल का प्रयोग: रिपोर्ताज में प्राय: वर्तमान काल का प्रयोग होता है जिससे घटना तात्कालिक और जीवंत लगती है।
  • संवाद और विवरण: वास्तविक संवाद और विस्तृत विवरण से रिपोर्ताज पाठक को घटना-स्थल पर ले जाता है।
  • आंदोलनकारी स्वर: अच्छा रिपोर्ताज पाठक के मन में जागरूकता और बेचैनी पैदा करता है।

इस पाठ में रिपोर्ताज के तत्त्व: रेणु ने इस पाठ में बाढ़ का ऐसा जीवंत चित्र खींचा है कि पाठक स्वयं उस आपदा को महसूस करने लगता है। लेखक की बीमारी, खिड़की से देखे दृश्य, नाव पर का भ्रमण, छतों पर फँसे लोगों की बेबसी — ये सब मिलकर इसे एक श्रेष्ठ रिपोर्ताज बनाते हैं।

6. भाषा-शैली

आंचलिक भाषा का प्रयोग: रेणु ने इस पाठ में स्थानीय बोलियों — मैथिली, भोजपुरी — के शब्दों का स्वाभाविक प्रयोग किया है। इससे पाठ में बिहार के जन-जीवन की सुगंध आती है।

चित्रात्मक भाषा: रेणु की भाषा बेहद चित्रात्मक है। वे शब्दों से ऐसे चित्र बनाते हैं कि पाठक की आँखों के सामने बाढ़ का दृश्य जीवंत हो उठता है।

संवेदनशील शैली: बाढ़-पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना भाषा में झलकती है। लेखक तटस्थ रिपोर्टर नहीं हैं — वे दर्द को महसूस करते हैं और उसे व्यक्त भी करते हैं।

व्यंग्य और आलोचना: सरकारी व्यवस्था और राहत-कार्य की कमियों को लेखक ने सीधे नहीं, बल्कि व्यंग्यात्मक ढंग से उजागर किया है।

लोकगीत और लोक-तत्त्व: रेणु की शैली में लोकगीतों और लोकोक्तियों का स्वाभाविक समावेश होता है जो पाठ को जीवंत बनाता है।

वर्णनात्मक और संस्मरणात्मक शैली: पूरा पाठ एक ऐसी शैली में लिखा गया है जहाँ लेखक अपने निजी अनुभव और भावनाओं को घटना-वर्णन के साथ गूँथते हुए चलते हैं। संवाद, वर्णन और विश्लेषण का यह त्रिकोण रिपोर्ताज को अत्यंत प्रभावशाली बनाता है।

7. कठिन शब्द और अर्थ

  • जल-प्रलय — बाढ़, पानी का भयंकर विस्तार; प्रलयकारी बाढ़।
  • रिपोर्ताज — आँखों देखी घटना का साहित्यिक विवरण; पत्रकारिता की एक विशेष विधा।
  • आंचलिक — किसी विशेष अंचल (क्षेत्र) से संबंधित।
  • विभीषिका — भयानकता, भयावह दृश्य।
  • जिजीविषा — जीने की प्रबल इच्छा।
  • अफरा-तफरी — भगदड़, अव्यवस्था।
  • तहस-नहस — पूरी तरह बर्बाद, नष्ट।
  • विकराल — बहुत भयानक, डरावना।
  • दयनीय — दया योग्य, करुणाजनक।
  • अदम्य — जिसे दबाया न जा सके, अजेय।
  • उफान — नदी का बहुत तेज बहाव, उबाल।
  • तटबंध — नदी के किनारे बनाया गया बाँध।
  • बेसहारा — बिना किसी आधार के, असहाय।
  • मंजर — दृश्य।
  • स्तब्ध — हक्का-बक्का, आश्चर्य या भय से चुप।
  • राहत — कष्ट से मुक्ति, सहायता।
  • तात्कालिक — उसी समय का, तुरंत का।
  • कहर — आफ़त, संकट।
  • पर्यवेक्षक — ध्यान से देखने वाला, निरीक्षक।
  • प्रकोप — क्रोध, कोप; यहाँ प्रकृति का प्रकोप अर्थात् बाढ़ की मार।

8. NCERT प्रश्नोत्तर (अभ्यास)

प्रश्न 1. बाढ़ की खबर सुनकर लोगों ने क्या किया?

उत्तर: बाढ़ की खबर सुनते ही मुहल्ले में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत अपने घरों का जरूरी सामान — राशन, कपड़े, बर्तन — ऊँचे स्थानों पर रख दिया। बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित जगह पहुँचाने की व्यवस्था की गई। कुछ लोग अपने पशुओं को ऊँचे स्थानों पर बाँधने में लगे तो कुछ अपने पड़ोसियों की मदद करने में। मकान-मालकिन और पड़ोसी सब मिलकर बाढ़ से बचने की तैयारी करने लगे।

प्रश्न 2. बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ होती हैं?

उत्तर: बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं —

  • खाने-पीने की भारी कमी हो जाती है — भूख और प्यास से लोग बेहाल हो जाते हैं।
  • छतों पर फँसे लोगों तक राहत पहुँचाना कठिन होता है।
  • घर, खेत और सामान सब नष्ट हो जाते हैं।
  • बीमारियाँ फैलती हैं — गंदे पानी से हैजा, डायरिया आदि।
  • पशुओं के भी मरने से किसानों को भारी नुकसान होता है।
  • बिजली, सड़क, संचार व्यवस्था ठप हो जाती है।
  • साँप और अन्य जहरीले जीव-जंतु घरों में घुस आते हैं।

प्रश्न 3. 'इस जल प्रलय में' पाठ में बाढ़ के कौन-से चित्र मन को अधिक प्रभावित करते हैं और क्यों?

उत्तर: इस पाठ में अनेक मार्मिक चित्र हैं, पर दो चित्र सबसे अधिक हृदय को छूते हैं। पहला — छतों पर फँसे भूखे-प्यासे लोगों का चित्र, जो असहाय होकर राहत का इंतज़ार कर रहे हैं — बच्चे रो रहे हैं, बुजुर्ग निढाल हैं। दूसरा — बाढ़ में साँप और मनुष्य का एक साथ शरण लेने का चित्र, जो यह दर्शाता है कि प्रकृति की आपदा में सब प्राणी एक समान हैं। ये दृश्य इसलिए अधिक प्रभावशाली हैं क्योंकि ये मानवीय असहायता और प्रकृति की शक्ति को एक साथ उजागर करते हैं।

प्रश्न 4. रेणु जी ने बाढ़ की पूर्वसूचना और बाढ़ के पश्चात् के दृश्यों का वर्णन कैसे किया है?

उत्तर: बाढ़ की पूर्वसूचना के समय लेखक ने लोगों की घबराहट, अफरा-तफरी और तैयारियों का जीवंत चित्रण किया है। मुहल्ले में हड़कंप, रेडियो की खबरें, सामान उठाना — सब कुछ बड़े स्वाभाविक ढंग से वर्णित है। बाढ़ के बाद के दृश्य अत्यंत मार्मिक हैं — कीचड़ में लिपटे मकान, सड़ता हुआ सामान, मृत पशु और तबाह खेत। इन सबके बावजूद लोग फिर से जीवन को सँवारने में लग जाते हैं — यह जिजीविषा का अद्भुत उदाहरण है।

प्रश्न 5. रिपोर्ताज विधा की विशेषताएँ बताइए और 'इस जल प्रलय में' में उन्हें कहाँ देख सकते हैं?

उत्तर: रिपोर्ताज की प्रमुख विशेषताएँ हैं — प्रत्यक्षदर्शी वर्णन, तथ्य और भावना का मेल, सजीव चित्रण, वर्तमान काल का प्रयोग। इस पाठ में ये सभी विशेषताएँ स्पष्ट दिखती हैं। रेणु स्वयं बीमार अवस्था में पटना में हैं और आँखों देखी बाढ़ का विवरण देते हैं (प्रत्यक्षदर्शी वर्णन)। साथ ही वे बाढ़-पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त करते हैं (भावना)। नाव पर बैठकर बाढ़ का भ्रमण और उसका जीवंत वर्णन (सजीव चित्रण) रिपोर्ताज को उत्कृष्ट बनाता है।

प्रश्न 6. फणीश्वरनाथ रेणु के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ इस पाठ में झलकती हैं?

उत्तर: इस पाठ में रेणु का संवेदनशील, मानवतावादी और सजग नागरिक रूप स्पष्ट झलकता है। बीमार होने पर भी वे बाढ़ के दर्द को महसूस करते हैं। आम जनता के कष्टों के प्रति उनकी गहरी सहानुभूति है। वे एक सच्चे पत्रकार की तरह सच्चाई को सामने लाते हैं और सरकारी कमियों की ओर ध्यान दिलाते हैं। साथ ही उनका साहित्यकार मन इन सब दृश्यों को कलात्मक भाषा में ढालता है।

अभ्यास MCQ
1. 'इस जल प्रलय में' किस विधा में लिखा गया है?
  1. कहानी
  2. रिपोर्ताज
  3. निबंध
  4. संस्मरण
उत्तर: (B) रिपोर्ताज — यह पत्रकारिता और साहित्य के मेल से बनी गद्य-विधा है।
2. 'इस जल प्रलय में' के लेखक कौन हैं?
  1. प्रेमचंद
  2. हजारीप्रसाद द्विवेदी
  3. फणीश्वरनाथ रेणु
  4. महादेवी वर्मा
उत्तर: (C) फणीश्वरनाथ रेणु — आंचलिक साहित्य के सुप्रसिद्ध कथाकार।
3. यह रिपोर्ताज किस वर्ष की बाढ़ पर आधारित है?
  1. 1965
  2. 1970
  3. 1975
  4. 1980
उत्तर: (C) 1975 — बिहार में आई भीषण बाढ़ का प्रत्यक्षदर्शी विवरण।
4. रेणु का पहला आंचलिक उपन्यास कौन-सा है?
  1. परती परिकथा
  2. मैला आँचल
  3. जुलूस
  4. दीर्घतपा
उत्तर: (B) मैला आँचल (1954) — हिंदी का प्रथम आंचलिक उपन्यास।
5. 'रिपोर्ताज' में मुख्य रूप से क्या होता है?
  1. काल्पनिक कहानी
  2. प्रत्यक्ष देखी घटना का साहित्यिक विवरण
  3. किसी व्यक्ति की जीवनी
  4. ऐतिहासिक घटना का केवल तथ्यात्मक वर्णन
उत्तर: (B) प्रत्यक्ष देखी घटना का साहित्यिक विवरण — पत्रकारिता और साहित्य का मेल।
6. बाढ़ के समय साँपों का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
  1. खतरा बताने के लिए
  2. इंसान-जानवर की समान असहायता दर्शाने के लिए
  3. साँप-पकड़ने वाले की बहादुरी बताने के लिए
  4. साँप-विष की दवा बताने के लिए
उत्तर: (B) प्राकृतिक आपदा में मनुष्य और पशु दोनों की एक जैसी बेबसी को दर्शाने के लिए।
7. फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म किस राज्य में हुआ था?
  1. उत्तर प्रदेश
  2. पश्चिम बंगाल
  3. बिहार
  4. मध्य प्रदेश
उत्तर: (C) बिहार — पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गाँव में।
8. रेणु की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?
  1. संस्कृतनिष्ठ शुद्ध भाषा
  2. आंचलिक एवं लोकभाषा का प्रयोग
  3. केवल अंग्रेजी शब्दों की भरमार
  4. केवल शुद्ध खड़ीबोली
उत्तर: (B) आंचलिक एवं लोकभाषा — मैथिली, भोजपुरी मिश्रित जीवंत भाषा।
9. 'जिजीविषा' का अर्थ है —
  1. मृत्यु की इच्छा
  2. जीने की प्रबल इच्छा
  3. सोने की इच्छा
  4. भोजन की इच्छा
उत्तर: (B) जीने की प्रबल इच्छा — बाढ़ के बाद लोगों का जीवन पुनर्निर्माण करना इसी का उदाहरण है।
10. बाढ़ के समय लेखक की क्या अवस्था थी?
  1. वे पूर्णतः स्वस्थ थे
  2. वे बीमार थे, ठीक से चल नहीं सकते थे
  3. वे दूसरे शहर में थे
  4. वे सरकारी राहत-कार्य में लगे थे
उत्तर: (B) लेखक बीमार थे, पर फिर भी उन्होंने बाढ़ का आँखों देखा विवरण लिखा।
11. 'मैला आँचल' उपन्यास किस वर्ष प्रकाशित हुआ?
  1. 1947
  2. 1950
  3. 1954
  4. 1960
उत्तर: (C) 1954 — यह हिंदी का पहला आंचलिक उपन्यास है।
12. इस पाठ में 'विभीषिका' का अर्थ है —
  1. खुशी का वातावरण
  2. भयानकता, भयावह दृश्य
  3. शांत वातावरण
  4. उत्सव का माहौल
उत्तर: (B) भयानकता, भयावह दृश्य — बाढ़ की 'विभीषिका' यानी उसका भयंकर रूप।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)
PYQ 1. फणीश्वरनाथ रेणु की साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: रेणु आंचलिक कथा-साहित्य के जनक हैं। उनकी भाषा में मैथिली-भोजपुरी का मिश्रण है। वे लोकजीवन, लोकगीत और लोकसंस्कृति के श्रेष्ठ चितेरे हैं। प्रमुख रचनाएँ: मैला आँचल (उपन्यास), परती परिकथा (उपन्यास), ठुमरी (कहानी-संग्रह), नेपाली क्रांति कथा (रिपोर्ताज)।
PYQ 2. 'इस जल प्रलय में' पाठ के आधार पर रिपोर्ताज और साधारण रिपोर्ट में अंतर स्पष्ट कीजिए। (CBSE, 4 अंक)
उत्तर: साधारण रिपोर्ट में केवल तथ्य होते हैं — सूखी, निर्भावनात्मक भाषा में। रिपोर्ताज में तथ्य के साथ लेखक की भावना, संवेदना और साहित्यिक कला भी होती है। रिपोर्ट में कोई भी पत्रकार लिख सकता है, पर रिपोर्ताज में प्रत्यक्षदर्शी साहित्यकार का होना जरूरी है। 'इस जल प्रलय में' में रेणु ने बाढ़ की तथ्यात्मक जानकारी के साथ अपनी संवेदना, बीमारी और मानवीय दृष्टि को भी पिरोया है।
PYQ 3. 'इस जल प्रलय में' पाठ के आधार पर बताइए कि बाढ़ की आपदा का आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है? (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: बाढ़ की आपदा का आम जनता पर बहुआयामी प्रभाव पड़ता है। (1) आर्थिक प्रभाव: घर, फसल, पशु और संपत्ति नष्ट हो जाती है। (2) शारीरिक कष्ट: भूख, प्यास और बीमारियाँ बढ़ती हैं। (3) मानसिक पीड़ा: असहायता और भविष्य की चिंता से लोग टूट जाते हैं। (4) सामाजिक प्रभाव: परिवार बिछड़ जाते हैं। (5) पशु-क्षति: पशुधन का नुकसान किसानों को बर्बाद करता है। लेकिन इन सबके बावजूद मानवीय जिजीविषा और सामुदायिक सहयोग की भावना लोगों को पुनर्निर्माण के लिए प्रेरित करती है।
PYQ 4. 'इस जल प्रलय में' पाठ के आधार पर रेणु की संवेदनशीलता को अपने शब्दों में प्रस्तुत कीजिए। (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: रेणु की संवेदनशीलता इस पाठ में हर जगह झलकती है। स्वयं बीमार होने पर भी वे बाढ़-पीड़ितों की तकलीफ को महसूस करते हैं। छतों पर फँसे भूखे लोगों को देखकर उनका मन विचलित होता है। साँप और मनुष्य की एक जैसी बेबसी पर उनकी कलम रुक जाती है। वे केवल घटना के दर्शक नहीं, बल्कि दर्द के भागीदार हैं — यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।
PYQ 5. 'जल प्रलय' के दृश्यों ने लेखक पर जो प्रभाव डाला, उसे पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (CBSE, 4 अंक)
उत्तर: बाढ़ के दृश्यों ने लेखक को बहुत गहरे स्तर पर प्रभावित किया। भूखे-प्यासे लोगों की बेबसी देखकर उनका मन व्यथित हो उठा। छतों पर फँसे लोगों को राहत न मिलते देख उन्हें सरकारी व्यवस्था पर रोष आया। पशुओं की दयनीय दशा देखकर वे स्तब्ध रह गए। इन सभी दृश्यों को उन्होंने अपनी संवेदनशील कलम से शब्द दिए और एक ऐसा रिपोर्ताज लिखा जो पाठक के हृदय को भी उद्वेलित कर देता है।
Want personal coaching in Dwarka?
Book a free demo class
More Class 9 Hindi chapters