मेरे संग की औरतें

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 15 of 16
मेरे संग की औरतें

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नजर में
  • विधा: संस्मरण (Memoir) — लेखिका के निजी जीवन की स्त्रियों पर आधारित।
  • लेखिका: मृदुला गर्ग — हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार।
  • मुख्य पात्र: नानी, माँ, और बुआ — तीनों स्त्रियाँ साहस, स्वाभिमान और विद्रोह की प्रतीक।
  • केंद्रीय विषय: स्त्री-स्वतंत्रता, आत्मसम्मान, परिवार में स्त्री की भूमिका, सामाजिक बंधनों का विरोध।
  • भाषा: सहज, आत्मीय, व्यंग्यात्मक पुट के साथ खड़ी बोली हिंदी।
  • बोर्ड वेटेज: ~5 अंक — लघु प्रश्न (2 अंक) और दीर्घ प्रश्न (5 अंक) दोनों आते हैं।
विस्तृत नोट्स

1. लेखिका परिचय — मृदुला गर्ग

मृदुला गर्ग का जन्म 25 अक्टूबर 1938 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उनकी शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई और उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। वे हिंदी साहित्य की सशक्त लेखिका हैं जो मुख्यतः स्त्री-जीवन, पारिवारिक संघर्ष और सामाजिक विसंगतियों पर लिखती हैं।

प्रमुख रचनाएँ:

  • उपन्यास: उसके हिस्से की धूप, वंशज, चित्तकोबरा, अनित्य, मैं और मैं, कठगुलाब, मिलजुल मन।
  • कहानी संग्रह: कितनी कैदें, टुकड़ा-टुकड़ा आदमी, देवी, ग्लेशियर से, उर्फ सैम, समागम।
  • निबंध: रंग ढंग, चुकते नहीं सवाल।
  • नाटक: एक और अजनबी, जादू का कालीन, तीन कैदें।

मृदुला गर्ग के लेखन की विशेषता यह है कि वे स्त्री-पात्रों को साहसी, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर रूप में प्रस्तुत करती हैं। "मेरे संग की औरतें" उनका एक प्रसिद्ध संस्मरण है जिसमें उन्होंने अपनी नानी, माँ और बुआ के जीवन के उन प्रसंगों को उजागर किया है जो स्त्री-साहस और स्वाभिमान के अद्भुत उदाहरण हैं।

2. पाठ का सारांश

यह पाठ एक संस्मरण है जिसमें लेखिका मृदुला गर्ग ने अपने जीवन में आई तीन महत्वपूर्ण स्त्रियों — नानी, माँ और बुआ — के व्यक्तित्व, उनके साहस, उनके स्वाभिमान और उनके जीवन-संघर्षों का वर्णन किया है।

नानी का प्रसंग: लेखिका की नानी एक असाधारण महिला थीं। नानी ने अपनी पोती (लेखिका) को जो उपहार दिया, वह था — शिक्षा, स्वाभिमान और स्वतंत्र सोच। नानी स्वयं अनपढ़ थीं परंतु उन्होंने हमेशा लड़कियों की पढ़ाई का समर्थन किया। नानी बेहद साहसी और धैर्यवान थीं। उन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद कभी घबराहट नहीं दिखाई। उनका स्वाभिमान इतना ऊँचा था कि उन्होंने किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। नानी का यह चरित्र लेखिका के लिए सदा प्रेरणास्रोत बना रहा।

नानी का एक विशेष प्रसंग यह है कि वे अपनी पोती के बारे में कहती थीं — "यह लड़की आगे जाएगी।" इस वाक्य में नानी का दूरदर्शी स्वभाव और लड़कियों पर उनका विश्वास स्पष्ट दिखता है। एक अनपढ़ स्त्री का यह दृष्टिकोण उस युग में अत्यंत असाधारण था।

माँ का प्रसंग: लेखिका की माँ एक सुशिक्षित, बुद्धिमान और जागरूक महिला थीं। उनकी माँ का व्यक्तित्व अनूठा था — वे परंपराओं को मानते हुए भी उनमें अंधविश्वास नहीं रखती थीं। माँ ने सभी बेटियों को समान रूप से पढ़ाया-लिखाया। माँ की एक विशेषता यह थी कि वे बिना किसी की परवाह किए अपने निर्णय स्वयं लेती थीं। वे समाज की रूढ़ियों से ऊपर उठकर सोचती थीं। माँ ने लेखिका को यह सीख दी कि स्त्री को अपना जीवन स्वयं जीना चाहिए, किसी के निर्देशों का इंतजार किए बिना।

बुआ का प्रसंग: बुआ का व्यक्तित्व कुछ अलग था। वे एक विधवा थीं जिन्होंने समाज की परवाह किए बिना अपना जीवन अपनी शर्तों पर जिया। उन्होंने वैधव्य की पीड़ा को तो स्वीकार किया परंतु समाज द्वारा थोपे गए नियमों को नहीं। बुआ बेहद जीवंत, हँसमुख और ऊर्जावान थीं। उन्होंने जीवन के प्रत्येक क्षण को पूरी जागरूकता के साथ जिया। उनका यह संघर्ष और उनकी यह जिजीविषा लेखिका के लिए बेहद प्रेरणादायक थी।

इस संस्मरण में लेखिका यह स्पष्ट करती हैं कि इन तीनों स्त्रियों ने अपने-अपने तरीके से समाज की बेड़ियों को तोड़ा और अपनी अलग पहचान बनाई। इन सभी का लेखिका के जीवन और व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा। लेखिका का मानना है कि उनके व्यक्तित्व की जो नींव आज है, वह इन्हीं स्त्रियों ने डाली है।

3. नानी का चरित्र-चित्रण

लेखिका की नानी इस संस्मरण की सबसे प्रभावशाली पात्र हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • साहस और धैर्य: नानी ने जीवन की हर विपत्ति का सामना बिना घबराए किया। पति की मृत्यु के बाद भी वे टूटी नहीं, बल्कि और मजबूत बनीं। उनका यह साहस किसी युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की कठिनाइयों में प्रकट होता था।
  • स्वाभिमान: नानी ने कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाया नहीं। वे अपनी ज़रूरतें खुद पूरी करती थीं और दूसरों पर बोझ बनने से सख्त परहेज करती थीं। उनका स्वाभिमान उनकी पहचान था।
  • शिक्षा की समर्थक: स्वयं अनपढ़ होने के बावजूद नानी ने हमेशा लड़कियों की शिक्षा का समर्थन किया। उनका मानना था कि पढ़ाई ही स्त्री की असली ताकत है और उसे किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
  • स्वतंत्र विचार: नानी का सोचने का ढंग अपने समय से बहुत आगे था। वे पितृसत्तात्मक व्यवस्था में रहते हुए भी अपनी सोच को कभी कैद नहीं होने देती थीं। उनके विचार प्रगतिशील थे।
  • प्रेरणास्रोत: नानी का पूरा जीवन ही लेखिका के लिए एक अनूठी पाठशाला था। नानी ने बिना कुछ कहे, केवल अपने आचरण से लेखिका को जीवन के गहरे सबक सिखाए।
  • ममता और वात्सल्य: नानी अपनी पोती से बेहद प्यार करती थीं। वे उसे बताती थीं कि स्त्री-जीवन में स्वाभिमान और प्रेम दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
  • राष्ट्रप्रेम: नानी का हृदय देश के प्रति समर्पित था। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में उनके घर में देशभक्तों का आना-जाना था और वे उनकी मदद करती थीं।

नानी का चरित्र यह सिद्ध करता है कि शिक्षा और पद से नहीं, बल्कि आत्मशक्ति और संकल्प से एक स्त्री महान बनती है।

4. माँ का चरित्र

लेखिका की माँ इस संस्मरण की दूसरी प्रमुख स्त्री-पात्र हैं। माँ एक सुशिक्षित, सजग और आधुनिक विचारों वाली महिला थीं। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ:

  • सुशिक्षित और जागरूक: माँ ने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वे अपने समय की पढ़ी-लिखी महिलाओं में से थीं जो समाज की चुनौतियों का सामना बौद्धिक रूप से करती थीं।
  • स्वतंत्र निर्णय-क्षमता: माँ ने जीवन के हर महत्वपूर्ण मोड़ पर अपने निर्णय स्वयं लिए। वे किसी के दबाव में नहीं आती थीं और न ही लोकलाज का डर उनके रास्ते में आता था।
  • पुत्री-पुत्र में समानता: माँ ने अपनी सभी बेटियों को उतनी ही शिक्षा और अवसर दिए जितने बेटों को दिए जाते थे। यह उस जमाने में एक क्रांतिकारी सोच थी।
  • परंपरा और प्रगति का संतुलन: माँ परंपराओं का सम्मान करती थीं परंतु उनमें अंधा विश्वास नहीं रखती थीं। वे परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का काम करती थीं।
  • निर्भीकता: माँ ने समाज की आलोचना की परवाह किए बिना अपनी बेटियों को खुलकर जीने का अवसर दिया। उनकी यह निर्भीकता लेखिका के लिए बड़ी प्रेरणा थी।
  • व्यावहारिक समझ: माँ की सोच बेहद व्यावहारिक थी। वे जानती थीं कि स्त्री को कब परंपरा का पालन करना है और कब उससे आगे जाना है।
  • स्त्री-शिक्षा की पक्षधर: माँ ने न केवल अपनी बेटियों को पढ़ाया, बल्कि समाज में भी स्त्री-शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई।

माँ का चरित्र यह दर्शाता है कि घर की चारदीवारी में रहकर भी एक स्त्री अपनी बेटियों के लिए एक बेहतर दुनिया बना सकती है — बस उसकी सोच खुली होनी चाहिए।

5. मुख्य विषय — स्त्री-शक्ति, स्वाभिमान और पारिवारिक संबंध

इस संस्मरण में लेखिका ने कई महत्वपूर्ण विषयों को उठाया है:

(क) स्त्री-शक्ति: पाठ की तीनों नायिकाएँ — नानी, माँ, बुआ — अपने-अपने तरीके से शक्तिशाली हैं। उनकी शक्ति बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति है। वे जीवन की चुनौतियों का सामना करती हैं, झुकती नहीं। यह पाठ हमें बताता है कि स्त्री-शक्ति शारीरिक बल में नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में होती है।

(ख) स्वाभिमान: तीनों पात्रों के जीवन में स्वाभिमान की धागा एक समान है। किसी ने भी विपरीत परिस्थितियों में अपना सिर नहीं झुकाया। समाज की परवाह किए बिना उन्होंने अपनी शर्तों पर जीवन जिया। यह स्वाभिमान ही उनकी सबसे बड़ी विरासत है जो लेखिका को मिली।

(ग) पारिवारिक संबंध: यह पाठ परिवार के महत्व को भी रेखांकित करता है। माँ, नानी और बुआ — ये सिर्फ रिश्ते नहीं, बल्कि ये जीवन की पाठशाला हैं। परिवार में ये स्त्रियाँ एक-दूसरे को ताकत देती हैं, एक-दूसरे से सीखती हैं।

(घ) सामाजिक बंधनों का विरोध: तीनों पात्र उस समय की पितृसत्तात्मक व्यवस्था में रहती थीं, परंतु उन्होंने उसे चुपचाप स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपने-अपने तरीके से प्रतिरोध किया — कभी शिक्षा के माध्यम से, कभी स्वतंत्र निर्णयों से, कभी अपनी जीवन-शैली से।

(ङ) स्त्री-विद्रोह की परंपरा: लेखिका यह भी दर्शाती हैं कि स्त्री-विद्रोह की यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रही है। नानी से माँ को, माँ से बेटी को — यह विरासत हस्तांतरित होती रही।

(च) शिक्षा का महत्व: इस पाठ में शिक्षा को स्त्री-मुक्ति का सबसे बड़ा हथियार बताया गया है। नानी अनपढ़ थीं परंतु शिक्षा की समर्थक थीं; माँ शिक्षित थीं और उन्होंने अपनी बेटियों को भी पढ़ाया। शिक्षा ने इन स्त्रियों को आत्मनिर्भर और साहसी बनाया।

6. भाषा-शैली

मृदुला गर्ग की भाषा-शैली इस पाठ में अत्यंत प्रभावशाली है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • सहज और आत्मीय भाषा: लेखिका ने ऐसी भाषा प्रयोग की है जो पाठक को अपनी लगे। शब्दों में आत्मीयता है, जो पाठक को लेखिका के परिवार का हिस्सा बना देती है।
  • व्यंग्यात्मक पुट: जहाँ-जहाँ समाज की रूढ़िवादिता का चित्रण है, वहाँ लेखिका ने हल्के व्यंग्य का सहारा लिया है। यह व्यंग्य कटु नहीं, बल्कि सौम्य और प्रभावशाली है।
  • वर्णनात्मक शैली: संस्मरण होने के कारण भाषा वर्णनात्मक है। घटनाओं और पात्रों का विवरण इतना जीवंत है कि पाठक उन्हें साक्षात देखता-सा प्रतीत होता है।
  • संवादात्मकता: यद्यपि यह संस्मरण है, तथापि इसमें कहीं-कहीं संवाद का-सा प्रभाव है। लेखिका की बात सीधे पाठक से जुड़ती है।
  • खड़ी बोली हिंदी: भाषा परिष्कृत खड़ी बोली हिंदी है जिसमें उर्दू शब्दों का भी संतुलित प्रयोग है।
  • चित्रात्मकता: लेखिका के शब्द चित्र उकेरते हैं। पात्रों के व्यक्तित्व और उनके परिवेश का वर्णन इतना जीवंत है कि पाठक के मन में एक स्पष्ट चित्र बन जाता है।
  • भावप्रवणता: संस्मरण में भावनात्मक गहराई है। लेखिका के अपनी नानी, माँ और बुआ के प्रति प्रेम और श्रद्धा के भाव हर पंक्ति में झलकते हैं।
  • प्रतीकात्मकता: लेखिका ने कुछ प्रसंगों को प्रतीक के रूप में प्रयोग किया है। जैसे — नानी का अपनी पोती की तारीफ करना केवल व्यक्तिगत प्रशंसा नहीं, बल्कि यह स्त्री-सशक्तीकरण का प्रतीक है।

7. शब्द अर्थ (कठिन शब्द एवं उनके अर्थ)

  • संस्मरण — स्मृतियों पर आधारित गद्य-रचना, Memoir
  • स्वाभिमान — आत्मसम्मान, Self-respect
  • वैधव्य — विधवा होने की अवस्था, Widowhood
  • पितृसत्तात्मक — जहाँ पुरुष को सर्वोच्च मानने की परंपरा हो, Patriarchal
  • जिजीविषा — जीने की प्रबल इच्छा, Will to live
  • रूढ़ि — पुरानी परंपरा या प्रथा जो अंधविश्वास बन चुकी हो, Orthodoxy/Convention
  • विद्रोह — विरोध, बगावत, Revolt
  • आत्मनिर्भर — स्वयं पर निर्भर, Self-reliant
  • परिवेश — वातावरण, आस-पास का माहौल, Environment
  • आचरण — व्यवहार, चाल-चलन, Conduct
  • विसंगति — असंगति, विरोधाभास, Incongruity
  • अनुकरणीय — अनुकरण करने योग्य, Worth emulating
  • प्रतिरोध — विरोध करना, Resistance
  • हस्तांतरित — एक से दूसरे को सौंपना, Transferred
  • ममता — माँ जैसा स्नेह, Maternal love
  • वात्सल्य — संतान के प्रति प्रेम, Parental affection
  • दृढ़ता — मजबूती, Firmness
  • विरासत — उत्तराधिकार में मिली सम्पत्ति या गुण, Legacy
  • साहसिक — साहस से भरपूर, Courageous
  • आत्मशक्ति — भीतरी ताकत, Inner strength

8. NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी था या नहीं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: नहीं, लेखिका ने अपनी नानी को कभी नहीं देखा था। उनकी नानी का देहांत लेखिका के जन्म से पहले ही हो गया था। लेखिका को अपनी नानी के बारे में जो भी जानकारी मिली, वह उनकी माँ और अन्य परिजनों की बातों से मिली। फिर भी नानी की कहानियों और उनके व्यक्तित्व ने लेखिका को गहराई से प्रभावित किया। नानी का जीवन और उनका आचरण लेखिका के लिए एक अदृश्य प्रेरणा की तरह काम करता रहा।

प्रश्न 2. लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?

उत्तर: लेखिका की नानी स्वयं प्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में भाग नहीं लेती थीं, परंतु उनका हृदय देश के प्रति पूरी तरह समर्पित था। उनके घर में स्वतंत्रता सेनानियों का आना-जाना था और वे उनकी सहायता करती थीं। उनकी राष्ट्रभक्ति मौन थी, परंतु अटूट थी। नानी का यह रवैया दर्शाता है कि देश-प्रेम को प्रदर्शित करने की ज़रूरत नहीं होती — वह आचरण में झलकता है।

प्रश्न 3. लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह करते हुए भी आधुनिक थीं — कैसे?

उत्तर: लेखिका की माँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम थीं। एक ओर वे घर-परिवार की सभी जिम्मेदारियाँ निभाती थीं और परंपराओं का पालन करती थीं। दूसरी ओर उन्होंने अपनी सभी बेटियों को समान शिक्षा दी, उन्हें स्वतंत्र सोचने और निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। वे अंधविश्वास में नहीं पड़ती थीं और अपने विवेक से काम लेती थीं। यही उनकी आधुनिकता थी — परंपरा का पालन, परंतु विवेक के साथ।

प्रश्न 4. "आप अपनी माँ से थे, माँ अपनी माँ से थीं" — इस कथन का क्या आशय है?

उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि स्त्री-स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्र सोच की यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रही है। नानी से उनकी बेटी (लेखिका की माँ) को, और माँ से लेखिका को — यह विरासत हस्तांतरित होती रही। यह महज एक पारिवारिक परंपरा नहीं, बल्कि स्त्री-शक्ति का एक निरंतर प्रवाह है। लेखिका यह बताना चाहती हैं कि प्रत्येक पीढ़ी की स्त्री ने अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से शक्ति और प्रेरणा ली है।

प्रश्न 5. इस पाठ में लेखिका के पिता का उल्लेख बहुत कम हुआ है। इससे क्या संकेत मिलता है?

उत्तर: यह संस्मरण विशेष रूप से स्त्रियों को समर्पित है। लेखिका का उद्देश्य उन स्त्रियों को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। पिता का उल्लेख कम होना यह संकेत देता है कि लेखिका के जीवन पर स्त्री-पात्रों का प्रभाव अधिक गहरा था। यह पाठ स्त्री-केंद्रित है और यही इसकी विशेषता भी है।

प्रश्न 6. लेखिका की बुआ ने वैधव्य को किस प्रकार जिया?

उत्तर: लेखिका की बुआ एक असाधारण महिला थीं। विधवा होने के बाद समाज ने उन पर कई प्रतिबंध लगाने चाहे, परंतु बुआ ने इन्हें चुपचाप स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपना जीवन उत्साह और जीवंतता से जिया। वे हँसमुख और ऊर्जावान थीं। उन्होंने वैधव्य की पीड़ा को तो स्वीकार किया, परंतु समाज द्वारा थोपी गई मृत्यु-सी जिंदगी को नहीं। उनका यह जीवट लेखिका के लिए बेहद प्रेरणादायक था।

प्रश्न 7. इस संस्मरण से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तर: इस संस्मरण से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि (1) स्त्री-शक्ति आंतरिक होती है, बाहरी परिस्थितियाँ उसे नहीं तोड़ सकतीं। (2) शिक्षा ही स्त्री की सबसे बड़ी ताकत है। (3) स्वाभिमान को कभी नहीं त्यागना चाहिए। (4) पारिवारिक स्त्रियाँ हमारी सबसे बड़ी शिक्षक होती हैं। (5) समाज की रूढ़ियों से लड़ने के लिए हिंसा नहीं, बल्कि विवेक और साहस की जरूरत होती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. "मेरे संग की औरतें" पाठ की लेखिका कौन हैं?
  1. महादेवी वर्मा
  2. मृदुला गर्ग
  3. मन्नू भंडारी
  4. सुभद्रा कुमारी चौहान
उत्तर: (B) मृदुला गर्ग — यह उनका प्रसिद्ध संस्मरण है।
2. यह पाठ किस विधा में लिखा गया है?
  1. कहानी
  2. निबंध
  3. संस्मरण
  4. नाटक
उत्तर: (C) संस्मरण — लेखिका ने अपनी स्मृतियों के आधार पर यह रचना लिखी है।
3. लेखिका ने इस पाठ में किन-किन स्त्रियों का वर्णन किया है?
  1. माँ, दादी, बहन
  2. नानी, माँ, बुआ
  3. नानी, दादी, मौसी
  4. माँ, बुआ, मामी
उत्तर: (B) नानी, माँ, बुआ — ये तीनों इस संस्मरण की मुख्य पात्र हैं।
4. क्या लेखिका ने अपनी नानी को देखा था?
  1. हाँ, बचपन में
  2. हाँ, युवावस्था में
  3. नहीं, नानी का देहांत पहले हो चुका था
  4. हाँ, बहुत बार
उत्तर: (C) नहीं — लेखिका के जन्म से पहले ही नानी का देहांत हो गया था।
5. लेखिका की माँ की प्रमुख विशेषता क्या थी?
  1. वे केवल बेटों को ही पढ़ाती थीं
  2. वे परंपरा में अंधविश्वास रखती थीं
  3. वे परंपरा निभाते हुए भी आधुनिक सोच रखती थीं
  4. वे बिल्कुल परंपरावादी थीं
उत्तर: (C) माँ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन बनाकर चलती थीं।
6. बुआ की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
  1. वे बहुत धनी थीं
  2. विधवा होने के बावजूद उन्होंने जीवन उत्साह से जिया
  3. वे हमेशा रोती रहती थीं
  4. उन्होंने समाज के सभी नियम माने
उत्तर: (B) बुआ ने वैधव्य की पीड़ा में भी जिजीविषा बनाए रखी।
7. इस पाठ का केंद्रीय विषय क्या है?
  1. पुरुष-शक्ति का गुणगान
  2. स्त्री-स्वाभिमान और स्वतंत्रता
  3. केवल देशभक्ति
  4. केवल बचपन की यादें
उत्तर: (B) स्त्री-स्वाभिमान और स्वतंत्रता — यही पाठ का मूल संदेश है।
8. "जिजीविषा" शब्द का सही अर्थ क्या है?
  1. मरने की इच्छा
  2. जीने की प्रबल इच्छा
  3. दुःख की भावना
  4. क्रोध की भावना
उत्तर: (B) जिजीविषा का अर्थ है — जीने की प्रबल इच्छाशक्ति।
9. मृदुला गर्ग के किस उपन्यास ने उन्हें विशेष प्रसिद्धि दिलाई?
  1. गोदान
  2. चित्तकोबरा
  3. निर्मला
  4. मधुशाला
उत्तर: (B) चित्तकोबरा — यह मृदुला गर्ग का सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है।
10. इस पाठ में स्त्री-शक्ति की परंपरा किस प्रकार आगे बढ़ती है?
  1. केवल बेटों के माध्यम से
  2. नानी से माँ को, माँ से बेटी को — पीढ़ी-दर-पीढ़ी
  3. केवल धन के माध्यम से
  4. विद्यालय की शिक्षा से
उत्तर: (B) स्त्री-शक्ति की यह विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है।
11. लेखिका की नानी स्वयं किस स्थिति में थीं?
  1. उच्च शिक्षित थीं
  2. अनपढ़ थीं परंतु शिक्षा की समर्थक थीं
  3. डॉक्टर थीं
  4. स्वतंत्रता सेनानी थीं
उत्तर: (B) नानी अनपढ़ थीं, परंतु उन्होंने हमेशा लड़कियों की शिक्षा का समर्थन किया।
12. "संस्मरण" और "आत्मकथा" में क्या मुख्य अंतर है?
  1. कोई अंतर नहीं
  2. संस्मरण में दूसरों की स्मृतियाँ होती हैं, आत्मकथा में लेखक का अपना सम्पूर्ण जीवन
  3. आत्मकथा में दूसरों की बात होती है
  4. दोनों एक ही विधा हैं
उत्तर: (B) संस्मरण में लेखक की स्मृतियों में आए अन्य लोगों का वर्णन होता है, जबकि आत्मकथा लेखक का अपना जीवन-वृत्त होती है।
अभिकथन-कारण (Assertion-Reason)
अभिकथन (A): लेखिका ने इस पाठ में केवल स्त्रियों के बारे में लिखा है।
कारण (R): यह संस्मरण उन स्त्रियों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने लेखिका के व्यक्तित्व को गढ़ा।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — लेखिका का उद्देश्य उन स्त्रियों को याद करना था जो उनकी प्रेरणा रही हैं।
अभिकथन (A): नानी स्वयं अनपढ़ थीं इसलिए उन्होंने लड़कियों की पढ़ाई का विरोध किया।
कारण (R): अनपढ़ व्यक्ति हमेशा शिक्षा का विरोध करते हैं।
उत्तर: (A) गलत है और (R) भी गलत है — नानी अनपढ़ होते हुए भी शिक्षा की प्रबल समर्थक थीं।
पूर्व-वर्षों के प्रश्न (PYQ)
PYQ 1. "मेरे संग की औरतें" पाठ में लेखिका ने किन स्त्रियों के बारे में लिखा है और उनकी क्या विशेषताएँ थीं? (5 अंक)
उत्तर-संकेत: लेखिका ने तीन स्त्रियों का वर्णन किया है — (1) नानी: साहसी, स्वाभिमानी, शिक्षा की समर्थक, पति की मृत्यु के बाद भी दृढ़; (2) माँ: सुशिक्षित, आधुनिक, सभी बेटियों को समान शिक्षा देने वाली, परंपरा और प्रगति का संतुलन; (3) बुआ: विधवा होने के बावजूद जीवंत और उत्साही, समाज के बंधनों से मुक्त। तीनों ने अपने-अपने ढंग से स्त्री-शक्ति और स्वाभिमान का परिचय दिया।
PYQ 2. लेखिका की नानी के चरित्र की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: (1) साहस और स्वाभिमान: नानी ने जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी अपना सिर नहीं झुकाया। (2) शिक्षा की समर्थक: स्वयं अनपढ़ होते हुए भी उन्होंने हमेशा लड़कियों की पढ़ाई का समर्थन किया।
PYQ 3. "मेरे संग की औरतें" पाठ में किस सामाजिक समस्या की ओर संकेत किया गया है? (2 अंक)
उत्तर: इस पाठ में पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री के संघर्ष की ओर संकेत किया गया है। समाज ने स्त्री पर कई बंधन लगाए हैं — वैधव्य, शिक्षा से वंचित रखना, स्वतंत्र निर्णय न लेने देना आदि। लेखिका की नानी, माँ और बुआ ने इन बंधनों को अपने-अपने तरीके से तोड़ा।
PYQ 4. मृदुला गर्ग की भाषा-शैली की दो विशेषताएँ लिखिए। (2 अंक)
उत्तर: (1) सहज और आत्मीय भाषा: लेखिका की भाषा पाठक से सीधे जुड़ती है, बनावटी नहीं लगती। (2) व्यंग्यात्मक पुट: जहाँ समाज की रूढ़िवादिता का वर्णन है, वहाँ हल्का किंतु तीखा व्यंग्य है जो बेहद प्रभावशाली है।
PYQ 5. "आप अपनी माँ से थे, माँ अपनी माँ से थीं" — इस पंक्ति का भाव विस्तार से स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)
उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि स्त्री-शक्ति और स्वाभिमान की यह धारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी बहती रही है। नानी से माँ को और माँ से लेखिका को — साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्र सोच की यह विरासत हस्तांतरित होती रही। यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय स्त्री-जाति की कहानी है। प्रत्येक पीढ़ी की स्त्री ने अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से शक्ति ग्रहण की और उसे आगे बढ़ाया। लेखिका यह संदेश देती हैं कि यह परंपरा भविष्य में भी जारी रहनी चाहिए और प्रत्येक माँ अपनी बेटी को यह विरासत जरूर सौंपे।
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