रीढ़ की हड्डी

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CLASS IX Hindi ~5 अंक Ch 16 of 16
रीढ़ की हड्डी

Class 9 · Hindi · NCERT chapter notes · Akanksha Classes

एक नज़र में (Snapshot)
  • विधा: एकांकी (One-act play) — नाटक का वह रूप जिसमें केवल एक अंक होता है।
  • लेखक: जगदीशचंद्र माथुर — हिंदी के प्रसिद्ध एकांकीकार, नाटककार एवं रेडियो नाटक के पुरोधा।
  • विषय: स्त्री-शिक्षा का समर्थन, दहेज-प्रथा का विरोध, पुरुष-प्रधान मानसिकता पर व्यंग्य।
  • रीढ़ की हड्डी का प्रतीक: आत्मसम्मान, स्वाभिमान — बिना जिसके व्यक्ति टेढ़ा (अनैतिक) हो जाता है।
  • केंद्रीय पात्र: उमा — शिक्षित, साहसी, आत्मसम्मानी लड़की जो अपमान का प्रतिकार करती है।
  • Board weightage: ~5 अंक — पात्र-परिचय, सारांश, विषय-वस्तु और NCERT प्रश्नोत्तर से प्रश्न।
विस्तृत नोट्स

1. लेखक परिचय — जगदीशचंद्र माथुर

जन्म: 16 जुलाई 1917, शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) | निधन: 14 मई 1978

जगदीशचंद्र माथुर हिंदी साहित्य के उन विरल लेखकों में से हैं जिन्होंने एकांकी विधा को नई ऊँचाइयाँ दीं। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (ICS) के अधिकारी थे और आकाशवाणी (All India Radio) के महानिदेशक भी रहे। रेडियो नाटक को लोकप्रिय बनाने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रमुख रचनाएँ:

  • एकांकी संग्रह: भोर का तारा, ओ मेरे सपने, खिड़की, सेतु-बंध, रीढ़ की हड्डी
  • नाटक: कोणार्क, पहला राजा, शारदीया
  • गद्य: दस तस्वीरें, बंदी (आत्मकथात्मक)

माथुर जी की रचनाओं में सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य, संवादों में नाटकीय तीव्रता और पात्रों के मनोविज्ञान की गहरी समझ दिखती है। वे स्त्री-स्वतंत्रता और शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।

साहित्यिक महत्त्व: माथुर जी ने हिंदी एकांकी को वह परिपक्वता दी जो पहले केवल उपन्यास और कहानी में मिलती थी। उनके पात्र समाज की सच्ची तस्वीर हैं। उन्होंने रेडियो नाटक के माध्यम से साहित्य को सामान्य जन तक पहुँचाया। वे मानते थे कि रचना का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, सामाजिक जागरण भी है।

2. पात्र परिचय

1. रामस्वरूप — उमा के पिता। मध्यमवर्गीय, भले और सरल स्वभाव के व्यक्ति। वे उमा से प्रेम करते हैं परंतु सामाजिक दबाव में आकर उसकी पढ़ाई छुपाने का नाटक करते हैं। उनका आचरण एक ऐसे पिता का प्रतीक है जो भीतर से सही जानता है, पर बाहर समझौता करता है। वे कमज़ोर इच्छाशक्ति के कारण गोपाल प्रसाद की हर शर्त मान लेते हैं। रामस्वरूप खलनायक नहीं हैं — वे उस समाज के शिकार हैं जो नारी की शिक्षा को विवाह में बाधा मानता है।

2. गोपाल प्रसाद — शंकर के पिता। रिटायर्ड वकील। पढ़े-लिखे परंतु दकियानूसी सोच वाले व्यक्ति। वे चाहते हैं कि बहू कम पढ़ी-लिखी हो ताकि वह "घर में रहे और आज्ञा माने।" वे दहेज को सभ्य भाषा में माँगते हैं और अपने बेटे की कमियाँ छुपाते हैं। एकांकी में वे पुरुष-वर्चस्ववादी मानसिकता के प्रतिनिधि पात्र हैं। उनके लंबे-लंबे भाषण उनकी अहंकारी प्रवृत्ति को उजागर करते हैं।

3. शंकर — गोपाल प्रसाद का बेटा, विवाह का पात्र। वह चश्मा लगाता है, शरीर से कमज़ोर है, और पर्दे के पीछे छुपा रहता है। बाद में पता चलता है कि उसने एक नर्स के साथ अशोभनीय व्यवहार किया था। वह पाखंडी, कायर और चरित्रहीन है — "दोगले व्यवहार" का प्रतीक। उसके व्यक्तित्व की कमज़ोरी ही एकांकी के व्यंग्य की धुरी है।

4. उमा — रामस्वरूप की बेटी, एकांकी की नायिका। वह BA पास है, अंग्रेज़ी जानती है, आत्मसम्मानी और साहसी है। जब गोपाल प्रसाद उसे नाचने-गाने के लिए कहते हैं और उसकी पढ़ाई छुपाने की कोशिश होती है, तब वह सब कुछ स्पष्ट कर देती है। वह शंकर का पर्दाफाश करती है और बिना डरे सत्य बोलती है। उमा "रीढ़ की हड्डी" — अर्थात आत्मसम्मान — का जीवंत प्रतीक है।

5. रमा — रामस्वरूप की पत्नी और उमा की माँ। घरेलू महिला जो पति की बात मानती है। वह चिंतित रहती है कि लड़की की शादी हो जाए। वह पुरानी सोच का प्रतिनिधित्व करती है, परंतु बेटी से प्रेम करती है।

6. रतन — रामस्वरूप का नौकर। वह सहायक पात्र है। उसे भी समझाया जाता है कि मेहमानों के सामने सब ठीक दिखे। उसकी उपस्थिति घर की तैयारी के दृश्य को स्वाभाविक बनाती है।

3. सारांश (Plot Summary)

प्रारंभिक स्थिति: एकांकी का आरंभ रामस्वरूप के घर से होता है। आज उनकी बेटी उमा को देखने के लिए गोपाल प्रसाद और उनका बेटा शंकर आने वाले हैं। रामस्वरूप अपनी पत्नी रमा और नौकर रतन से घर की साफ-सफाई और तैयारी करवा रहे हैं। घर में तनाव और उत्साह दोनों हैं।

रामस्वरूप की चिंता और समझौता: गोपाल प्रसाद ने पहले से सूचित किया है कि वे पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहते। इसीलिए रामस्वरूप उमा को निर्देश देते हैं कि वह अपनी पढ़ाई की बात न करे — यह बताए कि वह केवल आठवीं-नवीं तक पढ़ी है। उमा इस पर आपत्ति जताती है, परंतु माता-पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए चुप रहती है।

गोपाल प्रसाद का आगमन और पूछताछ: गोपाल प्रसाद शंकर के साथ आते हैं। वे स्वयं को बड़ा बुद्धिमान और अनुभवी समझते हैं। वे उमा से कई प्रश्न पूछते हैं — पढ़ाई, घर का काम, गाना-बजाना आदि। वे उमा को मात्र एक "वस्तु" की तरह जाँचते हैं। उनका मानना है कि पढ़ी-लिखी लड़की "घर नहीं चला सकती" और "घमंडी" होती है। वे चाहते हैं कि बहू केवल सेवा करे, अपनी राय न रखे।

शंकर का दोगला व्यवहार: शंकर पर्दे के पीछे बैठा है। वह कोई बातचीत नहीं करता। जब उमा उसे देखती है तो पाती है कि वह चश्मा पहने हुए है और शरीर से कमज़ोर है। यहाँ विडंबना है कि जो पिता पढ़ी-लिखी लड़की की आँखें जाँचना चाहता है, उसके अपने बेटे की आँखें कमज़ोर हैं।

उमा का प्रतिकार — नाटक का चरमबिंदु: जब गोपाल प्रसाद उमा को नाचने-गाने के लिए कहते हैं और उसे एक मनोरंजन की वस्तु की तरह व्यवहार करते हैं, तब उमा का धैर्य टूट जाता है। वह साफ-साफ बोलती है — वह BA पास है, अंग्रेज़ी जानती है। फिर वह शंकर की सच्चाई उजागर करती है: कॉलेज के दिनों में शंकर ने एक नर्स के साथ अशोभनीय व्यवहार किया था। उमा कहती है — जिसमें स्वयं आत्मसम्मान नहीं, वह दूसरों को क्या परखेगा।

गोपाल प्रसाद का सामना और अंत: उमा की इस बात से गोपाल प्रसाद स्तब्ध रह जाते हैं। शंकर सिर झुकाए बैठा रहता है — मानो उसकी रीढ़ की हड्डी ही न हो। गोपाल प्रसाद बिना कुछ कहे वहाँ से चले जाते हैं। रामस्वरूप को दुख होता है कि रिश्ता टूट गया, परंतु उमा ने जो किया वह सही था।

अंत का संदेश: एकांकी का अंत यह सिखाता है कि स्त्री को अपनी "रीढ़ की हड्डी" — अर्थात् आत्मसम्मान — कभी नहीं छोड़नी चाहिए। झूठ और पाखंड पर बने रिश्ते टिकाऊ नहीं होते। असली "रीढ़विहीन" शंकर है, उमा नहीं।

4. मुख्य विषय (Themes)

4.1 स्त्री-शिक्षा का समर्थन: एकांकी का सबसे प्रमुख संदेश है कि स्त्री को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। गोपाल प्रसाद जैसे लोग सोचते हैं कि पढ़ी-लिखी लड़की "घमंडी" होती है और घर नहीं चला सकती — यह मानसिकता समाज के लिए हानिकारक है। उमा अपनी शिक्षा को छुपाने से इनकार करके इस विचार को चुनौती देती है।

4.2 दहेज-प्रथा का विरोध: गोपाल प्रसाद की पूरी बातचीत में यह संकेत मिलता है कि वे अप्रत्यक्ष रूप से दहेज और सुविधाएँ चाहते हैं। वे उमा को एक वस्तु की तरह जाँचते हैं — जैसे बाज़ार में सामान खरीदा जाता है। यह विवाह-प्रथा की विकृति का चित्रण है।

4.3 पुरुष-प्रधान मानसिकता का खंडन: गोपाल प्रसाद की सोच यह है कि लड़की "आज्ञाकारी" होनी चाहिए, "कम पढ़ी-लिखी" होनी चाहिए, और "घर में ही रहनी" चाहिए। माथुर जी ने इस सोच को व्यंग्य के माध्यम से उजागर किया है। उमा का प्रतिकार इस मानसिकता का सीधा उत्तर है।

4.4 आत्मसम्मान (Self-respect) — रीढ़ की हड्डी: "रीढ़ की हड्डी" शीर्षक प्रतीकात्मक है। जिस तरह रीढ़ की हड्डी के बिना शरीर सीधा खड़ा नहीं हो सकता, उसी प्रकार आत्मसम्मान के बिना व्यक्ति का जीवन झुका हुआ और दब्बू हो जाता है। रामस्वरूप ने अपनी "रीढ़ की हड्डी" खो दी है — वे झूठ बोलने को तैयार हैं। शंकर की "रीढ़ की हड्डी" नैतिक रूप से टूटी है। उमा की रीढ़ सीधी है।

4.5 पाखंड और दोहरे मापदंड: गोपाल प्रसाद पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहते, परंतु उनका खुद का बेटा शारीरिक और चारित्रिक रूप से दोषपूर्ण है। यह दोहरा मापदंड (double standard) समाज की विकृत मानसिकता को दर्शाता है।

4.6 समझौतावादी मध्यवर्गीय मानसिकता: रामस्वरूप उस मध्यमवर्गीय सोच के प्रतीक हैं जो सच जानते हुए भी चुप रहती है। यह समझौतावाद ही समाज में कुप्रथाओं को जीवित रखता है। माथुर जी यह भी सुझाते हैं कि परिवर्तन के लिए साहस चाहिए — जैसा उमा ने दिखाया।

5. व्यंग्य और विडंबना (Satire and Irony)

व्यंग्य (Satire): माथुर जी ने इस एकांकी में तीखे व्यंग्य का प्रयोग किया है। गोपाल प्रसाद एक पढ़े-लिखे वकील हैं, फिर भी स्त्री-शिक्षा के विरोधी हैं — यह स्वयं में व्यंग्य है। उनके संवाद जैसे "औरत का काम घर चलाना है, किताबें पढ़ना नहीं" — यह उनकी संकुचित सोच को उजागर करता है।

विडंबना / Irony के प्रमुख उदाहरण:

  • गोपाल प्रसाद लड़की की आँखें जाँचना चाहते हैं, पर उनके अपने बेटे की आँखें ही कमज़ोर हैं — वह चश्मा लगाता है।
  • जो पिता बेटी की पढ़ाई छुपाने के लिए कहता है, वही उसे "अच्छा" इंसान भी बनाना चाहता है।
  • जो परिवार "संस्कारी बहू" चाहता है, उसका अपना बेटा चारित्रिक रूप से कमज़ोर है।
  • जो व्यक्ति दूसरों की "जाँच-पड़ताल" करने आया, वही अंत में बेनकाब हो जाता है।
  • जो "दिखाई जाने वाली" लड़की थी, वही अंत में "परखने वाली" बन जाती है।

हास्य का प्रयोग: माथुर जी ने स्थितियों के हास्य (situational comedy) का भी उपयोग किया है — जैसे शंकर का पर्दे के पीछे बैठना, रामस्वरूप का घबराना, घर की भागदौड़ भरी तैयारी आदि। इससे पाठक हँसते-हँसते गंभीर बातें सोचने पर मजबूर होते हैं।

6. भाषा-शैली (Language and Style)

बोलचाल की भाषा: माथुर जी ने सहज, सरल और बोलचाल की हिंदी का प्रयोग किया है। संवाद (dialogue) इतने स्वाभाविक हैं कि पाठक को लगता है वह वास्तविक बातचीत सुन रहा है।

व्यंग्यात्मक शैली: पूरी एकांकी व्यंग्य पर आधारित है। लेखक सीधे उपदेश नहीं देते, बल्कि पात्रों के व्यवहार के माध्यम से समाज की बुराइयाँ सामने रखते हैं।

नाटकीय तनाव (Dramatic Tension): एकांकी में धीरे-धीरे तनाव बढ़ता है — पहले तैयारी, फिर मेहमानों का आना, फिर पूछताछ और अंत में उमा का प्रतिकार। यह नाटकीय संरचना बहुत प्रभावशाली है।

प्रतीकात्मकता: शीर्षक "रीढ़ की हड्डी" स्वयं एक बड़ा प्रतीक है। साथ ही चश्मा (कमज़ोरी का प्रतीक), पर्दा (छिपाव का प्रतीक), और उमा का सीधे खड़े होना (आत्मसम्मान का प्रतीक) — ये सभी प्रतीक गहरे अर्थ रखते हैं।

संवाद-योजना: प्रत्येक पात्र के संवाद उसके चरित्र को स्पष्ट करते हैं। गोपाल प्रसाद के लंबे-लंबे व्याख्यान उनकी अहंकारी प्रवृत्ति दर्शाते हैं। उमा के छोटे और तीखे उत्तर उसकी निर्भीकता को प्रकट करते हैं।

एकता (Unity): एकांकी में स्थान, काल और क्रिया — तीनों की एकता है। समस्त घटनाक्रम एक ही शाम, एक ही कमरे में घटित होता है। यह एकांकी की विधागत विशेषता भी है।

7. शब्द-अर्थ (Shabdarth / Word Meanings)

शब्दअर्थ
एकांकीएक अंक वाला नाटक (one-act play)
रीढ़ की हड्डीमेरुदंड; यहाँ — आत्मसम्मान, स्वाभिमान
दकियानूसीपुराने विचारों वाला, रूढ़िवादी
पाखंडबाहर कुछ, भीतर कुछ — दिखावा, ढोंग
विडंबनाIrony — परिस्थिति की विचित्रता या विरोधाभास
आत्मसम्मानअपने आप का सम्मान, self-respect
दहेजविवाह में लड़की की ओर से दी जाने वाली संपत्ति
मेरुदंडरीढ़ की हड्डी, spine
पर्दाफाशअसलियत खोलना, भेद उजागर करना
स्तब्धहैरान होकर चुप रह जाना, dumbfounded
व्यंग्यSatire — किसी बात पर कटाक्ष करना
दोगलापनदो चेहरे रखना — hypocritical behaviour
प्रतिकारविरोध करना, जवाब देना
वर्चस्वप्रभुत्व, dominance
संस्कारअच्छे मूल्य, traditions and values
अशोभनीयअनुचित, जो शोभा न दे, improper
समझौतावादीcompromise करने वाला, अन्याय को मान लेने वाला

8. NCERT प्रश्नोत्तर (Question-Answers)

प्रश्न 1. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बात-बात में "आजकल की लड़कियों" पर क्या-क्या आरोप लगाते हैं?

उत्तर: दोनों पात्र "आजकल की लड़कियों" के बारे में निम्नलिखित आरोप लगाते हैं:

  • पढ़ी-लिखी लड़कियाँ घमंडी हो जाती हैं।
  • वे घर का काम नहीं करतीं।
  • वे बड़ों की आज्ञा नहीं मानतीं।
  • वे ससुराल में ताने देती हैं और मुँहजोरी करती हैं।
  • पढ़ाई से लड़कियाँ "बिगड़" जाती हैं।

ये आरोप वास्तव में उनकी पुरानी और संकुचित मानसिकता को दर्शाते हैं। माथुर जी इन विचारों पर गहरा व्यंग्य करते हैं।

प्रश्न 2. रामस्वरूप उमा की उच्च शिक्षा छुपाने की कोशिश क्यों करते हैं?

उत्तर: गोपाल प्रसाद ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहते। रामस्वरूप को डर है कि यदि उमा की पढ़ाई का पता चल गया तो रिश्ता टूट जाएगा और बेटी की शादी नहीं होगी। सामाजिक दबाव और बेटी के भविष्य की चिंता में वे सत्य को छुपाने का समझौता करते हैं। यह उनकी कमज़ोरी है, बुराई नहीं — परंतु माथुर जी इस "समझौतावादी" मानसिकता पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

प्रश्न 3. अपनी बेटी को उच्च शिक्षा देने के बाद भी रामस्वरूप उसे ससुराल वालों से क्यों छुपाना चाहते हैं?

उत्तर: यह एकांकी की केंद्रीय विडंबना है। एक पिता जो बेटी को पढ़ाता है, वही उसकी पढ़ाई छुपाता है। कारण यह है कि समाज में पढ़ी-लिखी लड़की के लिए "योग्य वर" मिलना कठिन माना जाता था। रामस्वरूप व्यक्तिगत रूप से शिक्षा के पक्षधर हैं, परंतु समाज की विकृत सोच के सामने झुक जाते हैं। यह "रीढ़ की हड्डी" के न होने का प्रतीक है।

प्रश्न 4. गोपाल प्रसाद विवाह को "बिज़नेस" की तरह देखते हैं — इस बारे में अपने विचार लिखिए।

उत्तर: गोपाल प्रसाद की पूरी सोच व्यावसायिक है — वे लड़की में "गुण" खोजते हैं जैसे कोई सौदा तय करता है। वे उमा से गाने-बजाने की माँग करते हैं, उसकी आँखें जाँचना चाहते हैं, पढ़ाई की जानकारी लेते हैं। परंतु अपने बेटे की कमियाँ छुपाते हैं। यह "बिज़नेस" एकतरफा है — लड़की को हर कसौटी पर खरा उतरना है, लड़के को नहीं। यही विवाह प्रथा की सबसे बड़ी विकृति है जिसे माथुर जी ने व्यंग्य से उजागर किया।

प्रश्न 5. "रीढ़ की हड्डी" शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

उत्तर: "रीढ़ की हड्डी" शीर्षक अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है। शारीरिक रूप से रीढ़ की हड्डी के बिना कोई सीधा नहीं खड़ा हो सकता — वह झुका और टूटा रहता है। इसी प्रकार आत्मसम्मान के बिना व्यक्ति भी झुकता है, समझौता करता है, सच्चाई छुपाता है।

  • रामस्वरूप की "रीढ़ की हड्डी" नहीं है — वे झूठ बोलने को तैयार हैं।
  • शंकर की नैतिक "रीढ़ की हड्डी" टूटी है — वह कायर और चरित्रहीन है।
  • उमा की "रीढ़ की हड्डी" सीधी है — वह आत्मसम्मान के साथ खड़ी है।

इस तरह शीर्षक एकांकी के केंद्रीय संदेश को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है।

प्रश्न 6. उमा ने शंकर का पर्दाफाश कैसे किया? उसके साहस की प्रशंसा कीजिए।

उत्तर: जब गोपाल प्रसाद उमा से अत्यधिक निजी सवाल पूछते हैं और उसे मनोरंजन का साधन बनाना चाहते हैं, तब उमा का धैर्य टूट जाता है। वह स्पष्ट कहती है कि वह BA पास है। फिर वह शंकर की असलियत बताती है — उसने कॉलेज के दिनों में एक नर्स के साथ अशोभनीय व्यवहार किया था। यह साहस उमा को एकांकी की नायिका बनाता है। वह सिखाती है कि अपमान सहना गुण नहीं, प्रतिकार करना अधिकार है।

अभ्यास MCQs
1. "रीढ़ की हड्डी" एकांकी के लेखक कौन हैं?
  1. प्रेमचंद
  2. जगदीशचंद्र माथुर
  3. महादेवी वर्मा
  4. हजारीप्रसाद द्विवेदी
उत्तर: (B) जगदीशचंद्र माथुर — ये हिंदी एकांकी के प्रसिद्ध लेखक हैं।
2. गोपाल प्रसाद अपने बेटे के लिए कैसी लड़की चाहते थे?
  1. अत्यधिक पढ़ी-लिखी
  2. कम पढ़ी-लिखी और आज्ञाकारी
  3. विदेश में पढ़ी हुई
  4. नौकरी करने वाली
उत्तर: (B) कम पढ़ी-लिखी और आज्ञाकारी — वे नहीं चाहते थे कि बहू पढ़-लिखकर "घमंडी" बने।
3. रामस्वरूप ने उमा को क्या झूठ बोलने को कहा?
  1. वह नौकरी करती है
  2. वह केवल आठवीं-नवीं तक पढ़ी है
  3. वह पाँचवीं तक पढ़ी है
  4. वह बिल्कुल नहीं पढ़ी
उत्तर: (B) आठवीं-नवीं तक पढ़ी है — जबकि वास्तव में उमा BA पास है।
4. "रीढ़ की हड्डी" शीर्षक किसका प्रतीक है?
  1. शारीरिक बीमारी
  2. आत्मसम्मान और स्वाभिमान
  3. पैसे की ताकत
  4. शिक्षा की शक्ति
उत्तर: (B) आत्मसम्मान और स्वाभिमान — बिना जिसके व्यक्ति झुका और टूटा रहता है।
5. शंकर का पर्दाफाश उमा ने कैसे किया?
  1. उसकी पढ़ाई की बात बताकर
  2. एक नर्स के साथ उसके दुर्व्यवहार की बात बताकर
  3. उसकी आँखों की कमज़ोरी का ज़िक्र करके
  4. उसके पिता को चुनौती देकर
उत्तर: (B) उमा ने बताया कि शंकर ने कॉलेज में एक नर्स के साथ दुर्व्यवहार किया था।
6. एकांकी में "विडंबना" का सबसे बड़ा उदाहरण क्या है?
  1. उमा का गाना गाना
  2. रामस्वरूप का घर सजाना
  3. लड़की की आँखें जाँचने वाले के बेटे की आँखें स्वयं कमज़ोर हैं
  4. गोपाल प्रसाद का वकील होना
उत्तर: (C) यही सबसे बड़ी विडंबना है — जो पिता लड़की की आँखें जाँचना चाहता है, उसका बेटा चश्मा लगाता है।
7. गोपाल प्रसाद का पेशा क्या था?
  1. डॉक्टर
  2. इंजीनियर
  3. रिटायर्ड वकील
  4. प्रोफेसर
उत्तर: (C) रिटायर्ड वकील — वे पढ़े-लिखे हैं फिर भी स्त्री-शिक्षा के विरोधी हैं।
8. उमा की माँ का नाम क्या है?
  1. सुमन
  2. रमा
  3. कमला
  4. सावित्री
उत्तर: (B) रमा — वे घरेलू महिला हैं जो पति की बात मानती हैं।
9. "रीढ़ की हड्डी" किस विधा में लिखी गई है?
  1. कहानी
  2. उपन्यास
  3. एकांकी (one-act play)
  4. निबंध
उत्तर: (C) एकांकी — यह एक अंक वाला नाटक है।
10. इस एकांकी में माथुर जी ने मुख्य रूप से किस सामाजिक बुराई पर व्यंग्य किया है?
  1. बाल-विवाह
  2. जाति-प्रथा
  3. स्त्री-शिक्षा विरोध और दहेज-प्रथा
  4. छुआछूत
उत्तर: (C) स्त्री-शिक्षा विरोध और दहेज-प्रथा — ये दो प्रमुख विषय हैं।
11. रामस्वरूप का चरित्र किसका प्रतिनिधित्व करता है?
  1. समाज-सुधारक का
  2. एक ऐसे व्यक्ति का जो सच जानता है पर समझौता करता है
  3. खलनायक का
  4. आदर्श पिता का
उत्तर: (B) वे जानते हैं कि सच क्या है, पर सामाजिक दबाव में समझौता कर लेते हैं — यही उनकी दुर्बलता है।
12. उमा के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
  1. वह बहुत सुंदर है
  2. वह अमीर है
  3. वह शिक्षित और आत्मसम्मानी है
  4. वह विदेश में पढ़ी है
उत्तर: (C) शिक्षित और आत्मसम्मानी — यही उसे एकांकी की नायिका बनाता है।
पूर्व-वर्षीय प्रश्न (PYQ)
PYQ 1. "रीढ़ की हड्डी" एकांकी में उमा का चरित्र-चित्रण कीजिए। (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: उमा इस एकांकी की नायिका है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ:
  • शिक्षित: वह BA पास है और अंग्रेज़ी जानती है।
  • आत्मसम्मानी: अपनी पढ़ाई छुपाने से इनकार — वह समझती है कि झूठ का आधार कमज़ोर होता है।
  • साहसी: गोपाल प्रसाद जैसे दबंग व्यक्ति के सामने सच बोलती है।
  • न्यायप्रिय: शंकर की असलियत उजागर करती है — दोहरे मापदंड को स्वीकार नहीं करती।
  • आधुनिक नारी का प्रतीक: वह परंपरागत "दिखाई जाने वाली" लड़की की छवि तोड़ती है।
उमा "रीढ़ की हड्डी" का जीवंत प्रतीक है।
PYQ 2. गोपाल प्रसाद के चरित्र पर प्रकाश डालिए। (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: गोपाल प्रसाद रिटायर्ड वकील हैं। उनके चरित्र की विशेषताएँ:
  • दकियानूसी सोच: स्त्री-शिक्षा के विरोधी, चाहते हैं बहू "आज्ञाकारी" हो।
  • दोहरे मापदंड: लड़की की हर जाँच करते हैं, पर बेटे की कमियाँ छुपाते हैं।
  • अहंकारी: खुद को बड़ा विद्वान समझते हैं।
  • व्यंग्य का पात्र: माथुर जी ने उन्हें पुरुष-प्रधान समाज के प्रतिनिधि के रूप में चित्रित किया है।
अंत में उमा के सामने वे बेनकाब हो जाते हैं।
PYQ 3. "रीढ़ की हड्डी" एकांकी की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालिए। (CBSE, 5 अंक)
उत्तर: इस एकांकी की विषय-वस्तु तीन प्रमुख सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित है:
  1. स्त्री-शिक्षा का विरोध: समाज में पढ़ी-लिखी लड़की को "अवगुण" माना जाता है — इसी पर व्यंग्य।
  2. दहेज-प्रथा: विवाह को व्यापार की तरह देखना।
  3. दोहरे मापदंड: लड़की से सब अपेक्षाएँ, लड़के से कोई जवाबदेही नहीं।
उमा के प्रतिकार के माध्यम से लेखक यह संदेश देते हैं कि स्त्री को अपनी "रीढ़ की हड्डी" — अर्थात् आत्मसम्मान — नहीं खोनी चाहिए।
PYQ 4. इस एकांकी में व्यंग्य और विडंबना के प्रयोग को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (CBSE, 5 अंक)
उत्तर:
  • व्यंग्य: गोपाल प्रसाद पढ़े-लिखे वकील हैं फिर भी स्त्री-शिक्षा के विरोधी — यह उनकी बौद्धिक दरिद्रता पर व्यंग्य है।
  • विडंबना 1: लड़की की आँखें जाँचने वाले के बेटे को चश्मा लगा है।
  • विडंबना 2: जो "संस्कारी बहू" चाहते हैं, उनका बेटा चारित्रिक रूप से दोषपूर्ण है।
  • विडंबना 3: जो बेटी को पढ़ाता है, वही उसकी पढ़ाई छुपाता है।
ये सभी उदाहरण माथुर जी की व्यंग्य-दृष्टि को प्रमाणित करते हैं।
PYQ 5. रामस्वरूप का चरित्र समाज की किस मानसिकता का प्रतिनिधित्व करता है? (CBSE, 3 अंक)
उत्तर: रामस्वरूप उस मध्यमवर्गीय मानसिकता के प्रतीक हैं जो भीतर से सही जानती है, परंतु बाहर सामाजिक दबाव में झुक जाती है। वे बेटी को पढ़ाते हैं, प्रेम करते हैं, परंतु उसकी पढ़ाई छुपाने को तैयार हैं — ताकि शादी हो सके। यह "समझौतावादी" मानसिकता ही समाज में गलत परंपराओं को जीवित रखती है। उनकी "रीढ़ की हड्डी" कमज़ोर है।
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